पलायनवाद है केजरीवाल का इस्तीफा- अखिलेन्द्र
कल टूटेगा अखिलेन्द्र का उपवास
पूर्वोत्तर के लोगों पर हुये लाठीचार्ज की निन्दा की और समर्थन में लिया प्रस्ताव
समता सैनिक दल ने किया समर्थन, उपवास का नौवाँ दिन
नर्इ दिल्ली, 15 फरवरी 2014, आल इणिडया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने केजरीवाल द्वारा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने पर आश्चर्यव्यक्त करते हुये कहा कि यह एक पलायनवादी रास्ता है जो एनजीओ मार्का राजनीति के चरित्र में ही निहित है। जंतर-मंतर पर जारी अपने उपवास के नौवें दिन अखिलेंद्र ने कहा कि दरअसल जनता से किये अपने वायदों को पूरा न कर पाने की विफलता को छुपाने और अपने गिरते जनाधार को बचाने के लिये केजरीवाल ने इस पलायनवादी रास्ते को अपनाया है। इस तरह की पलायनवादी एनजीओ मार्का राजनीति अन्तोगत्वा तानाशाही को और मोदी-भाजपा जैसी ताकतों को ही मजबूत करेंगी।
आइपीएफ नेता ने कहा कि यह सच है कि भारतवर्ष में पिछले बीस वर्षो में केन्द्रीयकरण का दौर शुरू हुआ है, आर्थिक संसाधनों पर केन्द्र का कब्जा बढ़ा है और राज्यों के अधिकारों में कटौतियाँ की गयी है। यहां तक कि बहुत सारे संवैधानिक प्रावधान जनविरोधी हैं और राज्यपाल जैसे पद अप्रासंगिक जिन्हें बदलने की माँग देश की प्रगतिशील-जनवाद पसन्द ताकतें लम्बे समय से करती रही है। दक्षिणपंथी तानाशाही प्रवृत्तियों के उभार के कारण इन पर पिछले दिनों जोर कम हो गया था। लेकिन संविधान के जनविरोधी प्रावधानों के खात्मे और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिये संघर्ष को आगे बढ़ाने के बजाये केजरीवाल ने पलायन का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि जनलोकपाल के सवाल पर भी उनका इस्तीफा औचित्यहीन है क्योंकि नीरा राडिया टेपकाण्ड से लेकर केजी बेसिन, टू जी और कोयले समेत देश में हुये तमाम महाघोटालों से यह बात प्रमाणित हुर्यी है कि भ्रष्टाचार पर रोक के लिये किसी भी किस्म का लोकपाल तभी सार्थक होगा जब उसके दायरे में कॉरपोरेट और फोर्ड फाउंडेशन जैसी साम्राज्यवादी एजेन्सियों द्वारा फण्ड प्राप्त करने वाले एनजीओ को लाया जाये। रिर्पोटों के अनुसार दिल्ली सरकार के द्वारा पेश कथित जनलोकपाल में यह दोनों ही बातें नहीं है और यह मात्र उत्तराखण्ड की खंडूरी सरकार के लोकायुक्त की ही कार्बन कापी है।
उन्होंने कहा कि जब उनके इस्तीफे का औचित्य नहीं बन रहा है तो कह रहे कि कांग्रेस-भाजपा काम नहीं करने दे रहे यह तो जगजाहिर है कि कांग्रेस-भाजपा जैसे दल अपने से भिन्न किसी दूसरी ताकत को उभरने नहीं देंगे। पर असली सवाल तो यह है कि दिल्ली में ठेके में कार्यरत श्रमिकों को नियमित करने, सस्ती बिजली-मुफ्त पानी से लेकर जो वायदे जनता से इस सरकार ने किये थे उन्हें पूरा करने की जगह इतने कम समय में इनकी सरकार एस्मा जैसा काला कानून अपने उन कर्मचारियों पर ही लगाने में लग गयी जिनके बूते यह सत्ता में आयी थी और जो इसके नियमितिकरण के वायदे को ही पूरा करने के लिये आवाज उठा रहे थे।
आज उपवासस्थल पर पूर्वोत्तर के लोगों पर कल हुये लाठीचार्ज और उनकी गिरफ्तारी की कड़ी निन्दा करते हुये प्रस्ताव पारित किया गया। उपवास का समर्थन नागपुर से आए समता सैनिक दल के राष्ट्रीय संगठक विमल सूर्य चिमनकर, भूतपूर्व विधायक नागपुर उपेन्द्र शेन्डेय व सुनील सारीपुते ने किया।
आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस आर दारापुरी ने बताया कि कॉरपोरेट घरानों और एनजीओ को लोकपाल कानून के दायरे में ले आने व उन पर टैक्स बढ़ाने, साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक बिल को संसद के इसी सत्र से पारित कराने, रोजगार के अधिकार को संविधान के मूल अधिकार में शामिल कराने, हिफाजत- इंसाफ-जम्हूरियत और पूरे देश में कानून का राज स्थापित करने समेत आम नागरिक की ज़िन्दगी के लिये महत्वपूर्ण सवालों पर 07 फरवरी 2014 से जारी अखिलेन्द्र का दस दिवसीय उपवास कल अपराहन 1 बजे समाप्त होगा। इस अवसर पर सीपीआर्इ (एम) के महासचिव का0 प्रकाश करात, वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता और सीपीआर्इ के पूर्व महासचिव का0 ए0 बी0 वर्धन, सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर समेत लोकतांत्रिक आंदोलनों के नेताओं समेत तमाम प्रमुख हस्तियाँ उपसिथत रहेंगी तथा देशभर से आए हुये कार्यकर्ता हिस्सेदारी करेंगे।