एमओयू के 4 साल बाद निजी घरानों के लिए रियायत और कोयला लिंकेज मांगना बेमतलब
एमओयू के 4 साल बाद निजी घरानों के लिए रियायत और कोयला लिंकेज मांगना बेमतलब
एमओयू आधारित सभी करार तत्काल रद्द किये जाने की मांग
सार्वजनिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुपर क्रिटिकल बिजली इकाइयाँ लगाने की मांग
लखनऊ। एम ओ यू आधारित बिजली परियोजनाओं के करार तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए बिजली इंजीनियरों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव से अपील की है कि यदि बिजली समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रदेश सरकार सचमुच गम्भीर है तो एम ओ यू के चार साल बाद भी काम शुरू न करने वाले निजी घरानों को और रियायत देने तथा उनके लिए कोयला लिंकेज माँगने के बजाय सार्वजनिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुपर क्रिटिकल बिजली इकाइयाँ लगाने हेतु कार्यवाही प्रारम्भ की जाए अन्यथा प्रदेश में आने वाले वर्षों में बिजली के अकाल जैसे हालात होंगे और बिजली कानून व्यवस्था का सबब बन सकती है।
आल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, विद्युत अभियंता संघ के के अध्यक्ष आर के सिंह एवं महासचिव डी सी दीक्षित ने आज यहाँ कहा कि 10340 मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों के लिए 2010 में 9 एम ओ यू निजी क्षेत्र के साथ किये गए थे जिन्हे कार्य शुरू करने हेतु दो बार समय विस्तार दिया जा चुका है किन्तु लगभग चार साल होने जा रहे हैं और ललितपुर के अलावा कहीं भी एक ईंट तक नहीं लगाई गयी तो अब इन्ही परियोजनाओं के लिए कोयला लिंकेज माँगने का कोई मतलब नहीं रह गया है। उल्लेखनीय है कि यह सभी परियोजनाएं बिना टेंडर प्रक्रिया के एम ओ यू रूट से दी गयी थीं जिसमें कोयला, पर्यावरण और पानी का कार्य निजी घरानों को करना होता है। अब चार साल बाद टोरेंट और बजाज एनर्जी ने कोयला और पानी के नाम पर काम करने से मना कर दिया है तो क्या गारन्टी है कि अन्य लोग भी किसी न किसी बहाने कल मना कर देंगे तो प्रदेश का क्या होगा। उन्होंने कहा कि वैसे भी एम ओ यू रूट से बनने वाले बिजली घरों से 10-12 रु प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी जो प्रदेश के हित में नहीं है। ध्यान रहे कि एम ओ यू रूट से बनने वाले बिजली घरों की लागत काफी बढ़ाकर बतायी जाती है जिससे उत्पादन लागत बढ़ी हुई दिखाई जाती है और प्रदेश को महंगी बिजली लेनी पड़ती है, आज भी एम यू रूट से 2010 में बने रोजा और बजाज बिजली घरों से रु 6.06 और रु 7.75 प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलाती है तो अब से पांच साल बाद बनने वाले बिजली घरों से 10-12 रु प्रति यूनिट या और अधिक दाम पर बिजली मिलेगी। ऐसे में इन्हें और रियायत देने के बजाय करार रद्द किया जाना ही प्रदेश हित में होगा। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आज पूरे देश में कहीं भी एम ओ यू रूट से कोई नयी बिजली परियोजना का कार्य नहीं हो रहा है तो एम ओ यू रूट पर प्रतिबन्ध लगने के चार साल बाद उ प्र में जिन्होंने काम भी नहीं शुरू किया उन्हें और समय देने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
उन्होंने कहा कि टोरेंट और बजाज के जाने के बाद अब भोगनीपुर में लैंको कंपनी को 1320-1320 मेगावाट के दो बिजली घर, मिर्ज़ापुर में वेल्सपन को 1320 मेगावाट, मुरका में क्रिएटिव थर्मोलाइट को 600 मेगावाट, बाराबंकी में पारीख अलुमनिक्स को 250 मेगावाट, औरैय्या में यूनिटेक मशीन्स को 250 मेगावाट के बिजली घर लगाने हैं। लैंको कंपनी उडीपी का अपना बिजली घर बेच चुकी है और आनपारा सी बेचने की तैयारी में है तो उससे नए बिजली घर लगाने की उम्मीद करना बेकार है। वेल्सपन,यूनिटेक मशीन्स, पारीख अलुमनिक्स और क्रिएटिव थर्मोलाइट का देश में कहीं भी बड़े बिजलीघर लगाने का कोई अनुभव नहीं है तो उ प्र सरकार किस उम्मीद में इनका इंतज़ार कर रही है यह बड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा कि 2017 में प्रदेश में बिजली की प्रतिबंधित मांग 23081 मेगावाट होगी जो आज की तुलना में 10000 मेगावाट अधिक होगी जिसे पूरा करने के लिए नयी परियोजनाएं निजी क्षेत्र को दी गयी थीं तो अब निजी क्षेत्र की विफलता को देखते हुए प्रदेश को बिजली के अभूतपूर्व संकट से बचाने के लिए सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र में नयी इकाइयाँ लगाने का तत्काल फैसला लेना चाहिए। उन्होंने पनकी में 660 मेगावाट की एक और करछना में 660 - 660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल यूनिट लगाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि ओबरा में 660 - 660 मेगावाट की दो, हरदुआगंज में 660 मेगावाट की एक, आनपारा ई में 660 - 660 मेगावाटकी दो, दोपहा में 660 - 660 मेगावाट की तीन, जवाहरपुर में 660 - 660 मेगावाट की दो नयी बिजली परियोजनाओं को लगाने का तत्काल निर्णय लिया जाए तो प्रदेश में 2019 तक 8580 मेगावाट का अतिरिक्त उत्पादन होने लगेगा और प्रदेश को बिजली संकट से राहत मिल सकेगी अन्यथा निजीघरानो पर अतिनिर्भरता के चलते आने वाले वर्षों में उ प्र में बिजली के अकाल जैसे हालात होंगे। उल्लेखनीय है कि उत्पादन निगम को परियोजनाएं देने में जमीन, पानी, पर्यावरण आदि की कोई दिक्कत नहीं है और कोयला लिंकेज भी आसान है।
उन्होंने बहाने से काम बंद करने वाले टोरेंट, बजाज और जे पी पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है जिससे भविष्य में कोई और कंपनी केवल शेयर मार्किट में लाभ कमाने हेतु कुछ साल तक अपने नाम प्रोजेक्ट बनाये रखने और फिर काम करने से मना करने का दुस्साहस न कर सके।
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