एस्सार के आरोपों की कटु आलोचना करते हुये ग्रीनपीस ने वन समुदायों के अधिकारों पर जोर दिया
4 अप्रैल, सिंगरौली। ग्रीनपीस इंडिया ने एस्सार द्वारा महान के ग्रामीणों को उकसाने के आरोपों की कटु आलोचना करते हुये कहा है कि कंपनी ने प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में उठ रही आवाज को एक बार फिर डराने का प्रयास किया है। एस्सार द्वारा जिला एवं सत्र न्यायालय वैढ़न में ग्रीनपीस और महान क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों पर मुकदमा दायर किया गया है। ग्रीनपीस अपने ऊपर लगाये गये आधारहीन आरोपों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया में हिस्सा लेगी।
ग्रीनपीस की सीनियर अभियानकर्ता प्रिया पिल्लई ने कहा कि, “एस्सार एक बार फिर अपने विरोध में उठ रही आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है लेकिन उनके आरोपों में कोई दम नहीं है। एस्सार को अदालत में मुकदमा दायर करने से पहले सही तथ्यों की जांच करनी चाहिए”।
एस्सार दूसरे चरण के पर्यावरण मंजूरी के लिये दी गयी 36 शर्तों को पूरा करने का दावा करती है लेकिन तथ्य बताते हैं कि जिस ग्राम सभा के प्रस्ताव के अधार पर मंजूरी दी गयी उसे फर्जी तरीके से पारित किया गया था।
प्रिया कहती हैं कि, “इस बात के सबूत हैं कि पारित प्रस्ताव में जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं उनमें कुछ लोग सालों पहले मर चुके हैं। लोगों के लिखित गवाही भी हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि उनके नाम फर्जी तरीके से प्रस्ताव में डाले गये हैं। दूसरे चरण की मंजूरी असंवैधानिक है और इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी”। उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर और जनजातीय मामलों के मंत्रालय का ध्यान दिलाने के बाद फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव के बारे में फरवरी में पुलिस में शिकायत दर्ज करायी जा चुकी है।
अमिलिया के निवासी जगनारायण शाह ने कहा कि, “हमने सिंगरौली में बड़े-बड़े कंपनियों से विस्थापित लोगों को गंभीर हालत में रहते देखा है। यह हमारे लिए असंभव है कि हम अपना जंगल और जमीन छोड़कर दस बाय दस के घर में विस्थापित जिन्दगी बितायें। अगर कंपनी खनन योजना में सफल होता है तो हम आजीविका से वंचित हो जायेंगे। हमें प्रकृति के साथ सद्भाव से रहने की वजह से सताया जा रहा है”।
इस साल के शुरुआत में एस्सार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ग्रीनपीस पर 500 करोड़ के मानहानि तथा बोलने की आजादी पर प्रतिबंध लगाने का मुकदमा दायर किया था। इस मुकदमे में यह भी मांग की गयी थी कि ग्रीनपीस मुंबई स्थित एस्सार के मुख्यालय के 100 मीटर के भीतर कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं कर सके। ग्रीनपीस ने इसकी प्रतिक्रिया कोर्ट में पहले ही दायर कर दिया है। कंपनी ने यह मुकदमा ग्रीनपीस के 14 कार्यकर्ताओं द्वारा मुंबई में महालक्ष्मी स्थित मुख्यालय पर बैनर लहरा कर प्रदर्शन करने के बाद किया था।
सुश्री पिल्लई ने बताया कि ग्रीनपीस एक अलाभकारी गैर सरकारी संगठन है जो पर्यावरण और वनवासियों के अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक काम करता है। प्रिया बताती हैं कि, “ग्रीनपीस शांतिपूर्वक तरीके से काम करता है और आगे भी हम ऐसा करते रहेंगे जबतक कि महान के लोगों के साथ न्याय नहीं हो जाता। हम इन हास्यास्पद रणनीतियों से विचलित नहीं होंगे”।