एस्सार के समर्थन में खुलकर आई मप्र सरकार, ग्रीनपीस के दो कार्यकर्ता आधी रात में गिरफ्तार
एस्सार के समर्थन में खुलकर आई मप्र सरकार, ग्रीनपीस के दो कार्यकर्ता आधी रात में गिरफ्तार
पुलिस ने वन सत्याग्रहियों की धड़-पकड़ तेज की
फिर से ग्रामसभा कराने की घोषणा के अगले दिन ही ग्रीनपीस के दो कार्यकर्ताओं को आधी रात में गिरफ्तार कर लिया
सिंगरौली (मध्य प्रदेश) 30 जुलाई। सिंगरौली की पुलिस घटिया स्तर पर उतर आई है। दो महीने पहले सिंगरौली की पुलिस ने ग्रीनपीस के वैढ़न स्थित गेस्ट हॉउस ग्रीनपीस के चार सत्याग्रहियों को आधी रात में गिरफ्तार किया था उसी तरह एक बार फिर से उसने उसी गेस्ट हॉउस से ग्रीन पीस के दो कार्यकर्ताओं को आधी रात में गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले मंगलवार को ही अमिलिया गांव से पुलिस ने सोलर पैनल और मोबाइल बुस्टर को उखाड़ कर जब्त कर लिया था, जिसे ग्रीनपीस ने उस गांव में एस्सार के अवैध कोल खदान का विरोध कर रहे लोगों की सुविधा के लिए लगवाया था, जिससे कि महान के जंगल को बचाया जा सके।
ग्रीनपीस की सीनियर कंपैनर प्रिया पिल्लई का कहना है, "ग्रीनपीस ने यह यंत्र देश के दसियों लाख लोगों के साथ सूचना के आदान-प्रदान करने के लिए लगवाया था, जो वहां के लोगों के दुख-दर्द में शामिल होते थे। पहले पुलिस ने बिना किसी कारण के उपकरण को जब्त कर लिया और अब वह लोगों को गिरफ्तार कर रही है क्योंकि वे सच कहना चाहते हैं। "
पिल्लई के मुताबिक जिला अधिकारी एम सेलवेन्दरन ने महान में माइनिंग से प्रभावित होने वाले ग्रामीणों को यह आश्वासन दिया था कि वहां के लोग माइनिंग चाहते हैं या नहीं इसके लिए अगले महीने फिर से निष्पक्ष ग्रामसभा की बैठक बुलाएगा। जिलाधिकारी ने यह आदेश इसलिए दिया क्योंकि स्थानीय लोगों का कहना है कि महान कोल ब्लॉक को एक फर्जी ग्रामसभा में मंजूरी दी गई थी और इसी के खिलाफ वहां के लोग आंदोलनरत थे।
प्रिया पिल्लई का आगे कहना है, "हमारे कार्यकर्ता और महान संघर्ष समिति (एमएसएस) के लोगों के ही प्रयास का नतीजा था कि हम जाली ग्राम सभा के प्रस्ताव का भंडाफोड़ कर सके। अब जबकि कुछ दिनों के बाद नए ग्राम सभा की बैठक हो रही है प्रशासन लोगों के मनोबल को तोड़ना चाहती है। प्रशासन की यह कठोर कार्यवाही इस बात का प्रमाण है कि वे निष्पक्ष और पारदर्शी ग्रामसभा की बैठक नहीं होने देना चाहती है।"
ग्रीनपीस के कार्यकर्ता अक्षय गुप्ता और राहुल गुप्ता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और उनके सहयोगियों को यह कहते हुए धमकी दी है कि अगर वे लोग ग्रामसभा के लिए लोगों को तैयार करते करते पाए गए तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। अक्षय गुप्ता को मई में भी तीन अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था जब वे लोग हिंडालको और एस्सार के महान में प्रस्तावित कोल माइन्स के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
जिस रूप में स्थानीय पुलिस संचार व्यवस्था को भंग की है उसके पीछे सरकार की मंशा क्या है?
ग्रीनपीस की सीनियर कंपैनर प्रिया पिल्लई ने कहा, "स्थानीय प्रशासन बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हितों की रक्षा में लगा हुआ है और उसके कहने के अनुसार ही कार्यवाही कर रहा है। स्थानीय प्रशासन की यह छापेमारी और गिरफ्तारी 30 जून के जबलपुर हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद हुई है जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने सिंगरौली के एस पी को फर्जी ग्राम सभा कराने की शिकायत दर्ज कराने और जांच करने का आदेश दिया है। एक मोबाइल सिग्नल बूस्टर और सौर पैनलों अवैध संचार उपकरण होने के लिए अर्हता प्राप्त करता है?" लोगों को सोलर से बिजली मुहैया कराना कब से अपराध हो गया है?
प्रिया पिल्लई का आगे कहना है -"ऐसा लगता है कि पुलिस ने यह कार्यवाही डर पैदा करने के लिए किया है कि जिससे कि वह बता पाए कि ये उपकरण नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अनधिकृत रुप लगाए गए थे। "हकीकत तो ये है कि सरकारी अधिकारी हमें नक्सली के रूप में पेश करके विरोध की आवाज को किसी भी रूप में दबा नहीं सकते हैं। सरकार गलत तरीके अपनाकर ग्राम सभा की निष्पक्ष प्रक्रिया को रोकने की साजिश कर रही है। छापा मारने और मोबाइल सिग्नल बूस्टर को तोड़कर पुलिस होने वाले ग्राम सभा के दौरान संचार सुविधा में बाधा पहुंचाना चाहती है।"
हालांकि, प्रस्तावित महान कोल ब्लॉक के खिलाफ ग्रामीणों में व्यापक रूप से चल असंतोष को दबाने की कोशिश स्थानीय सिंगरौली के अधिकारी लगातार कर रहे हैं।
महान संघर्ष समिति (एमएसएस) और ग्रीनपीस इंडिया ने प्रशासन से मांग की है कि अगले महीने बुलाए गए ग्रामसभा की बैठक को स्वतंत्र निष्पक्ष संपन्न कराया जाए। अमिलिया के ग्रामीण और एमएसएस के सदस्य हरदयाल सिंह गोंड ने कहा है, "हम किसी भी परिस्थिति में अपने जंगल को बचाना चाहते हैं और हम आनन -फानन में गलत तरीके से बुलाए गए ग्राम सभा की बैठक से वाकिफ हैं। हम इस तरह के डरानेवाली कार्यवाही जरा भी विचलित नहीं हैं। हमारी मांगें जायज है और हम अपनी मांग पर आगे भी कायम रहेगें।"


