ऐसे में निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद नहीं की जा सकती
ऐसे में निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद नहीं की जा सकती
सोशलिस्ट पार्टी ने चुनाव के लिए विदेशी
धन लेने
के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त को
पत्र लिखा।
नई दिल्ली। सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रेम सिंह ने ईमेल से प्राप्त हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. सुशील बलवदा के 22 अक्तूबर 2013 के पत्र का हवाला देते हुए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को एक पत्र भेजा है। डॉ. बलवदा ने अपने पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त और गृह सचिव से मांग की है कि आम आदमी पार्टी (आप) ने चुनाव के लिए 12 करोड़ भारी भरकम विदेशी धन लेने की बात मीडिया में खुद स्वीकार की है। उनका कहना है कि चुनाव के लिए विदेशी धन लेना एफसीआरए का स्पष्ट उल्लंघन है। डॉ. बलवदा ने अपने पत्र में इस मामले की तुरंत जांच की मांग करते हुए कार्रवाई करने की अपील मुख्य चुनाव आयुक्त और गृह सचिव से की है।
डॉ. सिंह ने अफसोस जाहिर किया है कि ‘आप’, कांग्रेस और भाजपा द्वारा चुनाव के लिए विदेशी धन लेने के मामले में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाने के बावजूद चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। डॉ. बलवदा के पत्र पर भी अभी कार्रवाई के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद नहीं की जा सकती।
डॉ. सिंह ने मांग की है कि मतदान के पहले मतदाताओं को यह जानने का हक है कि चुनाव के लिए विदेशी धन लेने वाली पार्टियों ने देश के कानून का उल्लंघन किया है या नहीं। डॉ. सिंह ने अपने पत्र में अक्तूबर 2011 में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (एडीआर) द्वारा दायर की जनहित याचिका का भी उल्लेख किया है जिसमें डाव केमिकल और वेदांता से कांग्रेस और भाजपा द्वारा धन लेने की सीबीआई अथवा सिट से जांच कराने की मांग की गई थी। उस मामले में पता चला था कि भाजपा ने डाव कंपनी से एक लाख रुपया लिया था जो एफआरसीए का उल्लंघन है। इंग्लैंड की कंपनी वेदांता, जिससे कांग्रेस ने बड़ी मात्रा में धन लिया था, विदेशी नहीं माना गया। वह मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है। उस जनहित याचिका के वकील प्रशांत भूषण थे जो ‘आप’ के प्रमुख स्थापनाकार सदस्यों में से हैं और जिनकी पार्टी न केवल विदेशी स्रोतों से धन ले रही है, चुनाव क्षेत्रों को विदेश में बसे अमीर भारतीयों को गोद दे रही है। विदेशी भारतीय चुनावी रणनीति भी बना रहे हैं।
‘आप’ द्वारा चुनाव के लिए विदेशी धन लेने की जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई जिसे स्वीकार कर लिया गया। लेकिन उसमें संबद्ध पक्षों से 10 दिसंबर 2013 तक जवाब दाखिल करने को कहा है। तब तक चुनाव पूरे हो जाएंगे और मतदाताओं को यह पता नहीं चल पाएगा कि विदेशी स्रोतों से लिए गए धन के मामले में कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं। ऐसे में निश्पक्ष चुनाव का दावा चुनाव आयोग नहीं कर सकता।
डॉ. सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जल्द ओैर लिखित उत्तर देने की अपील की है। अगर चुनाव के पहले चुनाव आयोग का निर्णय नहीं आता है तो सोशलिस्ट पार्टी जनता के बीच यह मुद्दा उठाएगी।


