और उनके अवतारी पुरुष होने में सुदामा को कोई संदेह न रहा
और उनके अवतारी पुरुष होने में सुदामा को कोई संदेह न रहा
मधुवन दत्त चतुर्वेदी
कोर्ट ने अवधारित किया कि उन्होंने अपराध तो किया पर दंडित नहीं किये जा सकते। दण्डित तो क्या उनके विरुद्ध एफ़ आइ आर तक नहीं की जा सकती है। क्या यह किसी साधारण मनुष्य का भाग्य हो सकता है !
समझते ही नहीं मूर्ख प्रजाजन। हाँ किया अपराध, तो क्या कर लोगे ? असाध्य को साधोगे ?
चुनाव आयोग से विधान सभा चुनावों में अपनी वैवाहिक स्थिति छुपा ली तो क्या हुआ ? त्रेता में सूपर्णखा से नहीं छिपाई थी क्या ? पता चलने पर स्थानीय अधिकारिता धारण करने वाली सूपर्णखा ने दण्डित करने का दुस्साहस किया था तो क्या हाल किया था मुई का ! रामलीला देख देख कर ही तो बच्चे बड़े हुए हैं। बड़े होकर ओहदे लिए हैं। आयोग भी तो मनुष्यों से ही बना है। बचपन में सुने सबक का डर क्या यूँ ही निकल जाता है। किसकी हिम्मत है जो उंगली उठा दे !
ये आप पार्टी का निशांत वर्मा कोई असुर है कदाचित जिसने अपराध पर प्रश्न उठाया है। वैवाहिक स्थिति छुपाने पर राज्य की आपत्ति का ऐसा प्रतिकार किया था कि न लंका बची थी न लंकेश।
कहते है कालातीत है मामला। संज्ञान नहीं लिया जा सकता। विधान में लिखा है। सुदामा शब्द 'कालातीत' का अर्थ यही समझ कर मुदित हो रहा था कि प्रभु का मामला है काल स्वयं अतीत हो गया। त्रेता में तो यही काल हाथ जोड़कर बुलाने आया था। सो अब इसकी क्या हिम्मत ! दैवीय शक्तियां हैं प्रभु की चतुर्दिक रक्षा में सन्नद्ध। बारम्बार प्रणाम मन में करता हुआ बधाई देने प्रासाद की ओर चला जा रहा था लकुटिया टिकाए।
कि मार्ग में मिल गए प्रजाजन। अवरुद्ध कर रखा था मार्ग। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी पर चीखते चिल्लाते, हाय-हाय करते। सुदामा से सहन न हुआ और तनिक ऊँचा स्थान देख कर चढ़ गया। लगा बघारने-"मूर्ख प्रजाजनों ! क्यों बहकते हो विरोधियो की बात से। मेरे प्रभु अवतारी हैं। उन्हें ईश्वर ने राष्ट्र सेवा के लिए चुना है। वे डीजल पेट्रोल गैस की कीमतें और रेल भाड़ा बढ़ाकर भी महंगाई कम कर देंगे। ये न पूछो कैसे। यकीन रखो जैसे सदा रखा है। देखो जो अपराध करके भी दंड का पात्र न माना गया हो उसकी जबाबदेही जनता के प्रति कैसे होगी ! अवतार हैं, उनकी माया को समझना आपके वश में नहीं।"
नहीं सुना किसी ने। आर्तनाद करते रहे लोग। कोई एक था जिसने फुसफुसा कर इतना ही कहा- ये अपराध यदि जन में से किसी ने किया होता तो कालातीत न होता, तब काल गणना जानकारी की तिथि से होती। वास्तव में अवतारी ही हैं।
समझ से परे था सुदामा के लिए। समझना आवश्यक भी न था। साधारण जन का क्या होता या क्या नहीं होता इससे भक्त को क्या !


