विश्वगुरु की हिंदी

संस्कृत में जो भी होता है वह बहुत पवित्र होता है, जैसे— व्यापमं. व्यापमं की पवित्रता इस तरह है कि कोई नहीं बता सकता कि कितने हजार करोड़ पार किए गए, किसने किए और जो 46 लोग मारे गए उनको किसने मारा? सब माया है. व्यापमं सत्यं जगत मिथ्या... हिंदी सम्मेलन का भी पोस्टर संस्कृत में है. विश्व हिंदी सम्मेलन में मोदी और शिवराज के फोटो वाले पोस्टर लगे हैं. कुछ-कुछ संस्कृत और संस्कार टाइप. हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकारों का बहिष्कार करके इसकी पवित्रता सुनिश्चित की गई है.

नेताओं के जितने मूर्खतापूर्ण बयान होते हैं, उनको यह जालिम जमाना तोड़कर मरोड़ देता है और फिर जहाने—फानी में पेश कर देता है. इसी तरह अपनी डिग्री और पदलोलुपता के लिए ब्रम्हांडीय स्तर पर कुख्यात हुए 'आया राम गया राम' टाइप के एक नये नवेले नेताजी ने जो भी फरमाया उसको तोड़कर कुछ इस तरह मरोड़ा गया कि 'कुछ साहित्यकार हिंदी सम्मलेन में सिर्फ शराब पीने आते थे.' इसलिए उनका बहिष्कार कर दिया गया. अब जो 5000 से ज्यादा लोग इस मोदी... सॉरी...सॉरी... हिंदी सम्मेलन में शामिल होंगे, वे सब 24 कैरेट के शुद्ध लोग हैं. उनका परीक्षण गणेश सर्जरी वाली प्रयोगशाला में हुआ है. उन्होंने कभी सुरा, सुंदरी और शबाब का ख्वाब तक नहीं देखा है. प्रकारांतर से यह 'चाल, चरित्र और चेहरा' सम्मेलन है जिसमें मोदीजी हैं और उनके उनके दुलरुआ पूंजीपति लोग हैं.

जहां व्यापमं है वहां प्रतिभाएं हैं. इन्हीं अनन्य प्रतिभाओं में से कलेक्टर लोग भी होंगे जिनसे कहा गया है कि वे अपने इलाके से 50—50 'हिंदी हितैषी' ढूंढकर भेजें. साहित्यकारों को नहीं बुलाया गया है. पद्मश्री, साहित्य अकादमी और विश्व हिंदी सम्मेलन में ही पुरस्कृत साहित्यकार इस सम्मेलन में न्यौता पाने योग्य नहीं समझे गए हैं. हां, कई मल्टीनेशनल कंपनियां और उनके सीईओ जरूर मौजूद हैं. उन सबने कभी शराब वराब का नाम नहीं सुना है.

संसद से लेकर विदेश यात्रा तक मोदीजी के दामन से चोली की तरह चिपके रहने वाले पूंजीपतियों के बीच मोदी जी छाए रहेंगे. वे पोस्टरों में शिवराज के साथ व्याप्त हैं. कुछ देर में महोत्सव शुरू होगा और मोदीजी भाषण देंगे कि 'मैं बचपन से ही साहित्यकार बनना चाहता था.'

कृष्णकांत

कृष्णकांत, युवा पत्रकार हैं। उनकी फेसबुक टिप्पणी साभार