औरत मर्द का रिश्ता भी आर्थिक प्रबंध से निर्धारित हो रहा, इस दुश्चक्र को समझना भी जरूरी है और तोड़ना भी
औरत मर्द का रिश्ता भी आर्थिक प्रबंध से निर्धारित हो रहा, इस दुश्चक्र को समझना भी जरूरी है और तोड़ना भी
दूसरी दुनिया बनाना संभव है, इसे हमें खुद ही बनाना होगा - दिशा का दूसरा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन।
शमशाद इलाही शमस।
वरिष्ठ सम्मानीय सहित्यकार वरयाम सिंह संधू ने अपने जीवन के किस्से को बयान करते हुए बताया कि एक बार उन्हें प्रिजनों मित्रों ने महिला का विशेष भरा कर पुरिवारा में घुमाया दिया। वह एक सुंदर स्त्री के वेष में सुंदर लग रही थी, बजी बुझुर्गों में कुछ एक ने आशीरवाद दिया और शगुन भी। एक प्रिजन ने उन्हें ऐसी लालसा के साथ देखा कि उनके अंदर की स्त्री, उस हवस की नज़र की तपिश को आज तक महसुस करती है। अगर कुछ नतमस्तक होना चाहिये तो यही वह नज़र है जिसे मरद किसी औरत के प्रति रखता है। हर मरद के अंदर एक औरत भी है। उस औरत का आभास अगर मरद को हो जाए तो स्त्री पर मरद के श्लूम बंद हो सकते हैं।


