मधु भाई रामदेव
हमारे राज्य के मुख्यमंत्री गहलोत साब डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से मरीजों को होने वाली परेशानी के बारे में मीडिया में बोले, उधर जनता की वह बुझी आग, एक बार वापस आम जनता के हृदय में धधकने लगी है। गहलोत ने कहा कि डॉक्टर इस बात को समझें कि उनके कुछ लोगों की विकृति के कारण अब वे मरीजों के लिए भगवान नहीं रह गए हैं कम-से- कम इंसान बने रहने की कोशिश तो करें। प्राइवेट अस्पतालों की लूट-खसोट के बारे में भी गहलोत के विचार उद्वेलित करने वाले थे| जैसे मरे हुए इंसान को वेंटिलेटर पर रखकर धन की वसूली और बिना रूपया लिए लाश नहीं देने की बातें जनता में क्रांति पैदा करने वाली होनी हो सकती हैं| डॉक्टरों की ओर से कुछ पहल होनी चाहिए। गहलोत साहब क्या आप की और राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी नहीं कि वह डॉक्टरों की हड़ताल को प्रतिबंधित करे मगर आप ने ऐसा नहीं किया! जब जातीय विद्वेष फैलने की आशंका के कारण राज्य कर्मचारियों के रैली-प्रदर्शनों पर रोक लगाने का एक साहसपूर्ण कदम उठाया जा सकता है तो अत्यंत आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के हड़ताल करने पर रोक क्यों नहीं लगाई जा सकती! चिकित्सा मंत्री दुर्रु मियां इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं कि जब डॉक्टरों ने हड़ताल की घोषणा की तो उन्होंने उसे क्यों नहीं रोका! यह एक दिन की बात तो नहीं है| डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। उन्हें हड़ताल का अधिकार नहीं देने की बात अलोकतांत्रिक नहीं है| लोगों की जीवन-मृत्यु और इसी तरह की अत्यंत आवश्यक सेवाओं में हड़ताल करने को प्रतिबंधित करना चाहिए। मांग मनवाने, विरोध-प्रदर्शन करने के तरीके और भी हो सकते हैं। वे लोग जनहित का ध्यान रखते हुए अपना विरोध प्रदर्शन करें। लेकिन ये सब बातें तभी चल पाएंगी जब हमारी सरकारें वोटों की राजनीति करना छोड़ें। रेल की पटरियां रोककर बैठे जाने पर भी सरकार कुछ नहीं बोलती और जब सत्तारूढ़ दल अपनी रैली को करके शहर को ठप करता है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इससे भी इलाज में देरी हो सकती है और इलाज मिलने से पहले ही मौत हो सकती है। राज्य के मुखिया व नेतृत्वकर्ता होने के नाते आप का यह कर्तव्य है कि जनता और उसके विभिन्न वर्गों को समझाए और उन्हें कर्तव्यों का स्मरण करवाए और उने जागरूक करे; लेकिन मेरी समझ यह में नहीं आ रहा है कि मुख्यमंत्री जी आप इतने लाचार क्यों बने हुए हैं......!!!! गहलोत साहब आप पौने सात करोड़ जनता के सर्वोच्च प्रतिनिधि हो और आप की भी जनता के प्रति अपनी जवाबदेही बनती है। आप खुद को जनता का ट्रस्टी मानते हैं तो वे आप उस भूमिका से क्यों बचना चाहते हैं जो लोकतंत्र में लोक कल्याण के लिए आवश्यक है..? निश्चय ही राज्य की जनता चाहेगी कि उनका मुख्यमंत्री प्रशासनिक दृढ़ता दिखाए। पिछले कार्यकाल में उन्होंने सरकार का इकबाल दिखाया था। बदले में उन्हें मिला पांच साल बाद शासन और अच्छी छवि। वे कालिख लगवाकर सत्ता से नहीं हटे थे। जब गहलोत साहब आप भ्रष्टाचार से दूर हैं,आप की नेकनीयती पर कोई संदेह नहीं है और आप सादगीपूर्ण जीवन बिताते हैं इसके साथ साथ आप गंभीर राजनेता और सच बोलने वाले भी हैं इससे साथ साथ हमारे राज्य के करोड़ों नागरिकों का रक्षा कवच भे आप को प्राप्त है | इसके बाद भी आप खुलकर शासन संचालन करते क्यों नहीं दिखाई दे रहे हैं !!!!
इस समय जनता, शासन संचालक के रूप में सिर्फ अशोक गहलोत को देख रही है और हर बात का आप से जवाब चाहती है भले वे आप हर बात के लिए जवाबदेह हों या नहीं। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए उन्हें अपनी योग्यता का अधिकाधिक उपयोग करना होगा और अनुभवी और योग्य लोगों को साथ लेकर कुशल और दृढ़ प्रशासन का नेतृत्वकर्ता बनना होगा तभी जनता की उम्मीदें पूरी होंगी।और आप के सुशासन का सपना पूरा होगा गहलोत साब ...