मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
2013 के कानून के अनुसार पुनः अधिग्रहण के लिए सरकार लाए अध्यादेश
लखनऊ 14 अप्रैल 2015, आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट ने सोनभद्र जनपद में कनहर नदी पर बन रहे बांध से विस्थापित हो रहे परिवारों पर आज हुए गोलीकाण्ड पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के प्रदेश संगठन प्रभारी दिनकर कपूर ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर उनसे तत्काल दमन की कार्यवाही पर रोक लगाने और गोलीकाण्ड के दोषियों को दण्डि़त करने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश देने का अनुरोध किया है।
पत्र द्वारा मुख्यमंत्री के संज्ञान में सोनभद्र जनपद में कनहर नदी पर बन रहे बांध से विस्थापित हो रहे परिवारों की समस्याओं को लाते हुए अवगत कराया गया कि 6 जनवरी 1976 में तात्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किये गए शिलान्यास के समय यहां रह रहे विस्थापित परिवारों की भूमि अधिग्रहित करने की कार्रवाही की गयी थी। इसके बाद परियोजना में कार्य रूक गया और सरकार ने जमीनों पर वास्तविक कब्जा प्राप्त नहीं किया। तब से लेकर आजतक जमीनें उसके मालिकों के पास ही रहीं और इस अवधि में वहां बाकायदें ग्राम पंचायते गठित की गयीं और मनरेगा समेत सभी विकास सम्बंधी कार्य भी बदस्तूर होते रहे। अभी आपकी सरकार ने इस परियोजना में पुनः कार्य की शुरूवात की है।
मुख्यमंत्री से आइपीएफ ने कहा कि संसद द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून 2013 पारित किया गया है। जिसकी धारा 24 (2) के अनुसार ‘‘जिन जमीनों का अधिग्रहण 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार हुआ है परन्तु उन जमीनों पर पांच वर्ष तक सरकार ने कब्जा प्राप्त नहीं किया है या मुआवजा नहीं दिया है ऐसा अधिग्रहण समाप्त माना जायेगा और सरकार को चाहिए कि वह 2013 के कानून के तहत जमीन अधिगहण करने के लिए अध्यादेश जारी करें।‘‘ यह प्रावधान आज भी वैध है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी 24 जनवरी 2014 को पुणे म्युनिस्पिल कारपोरेशन मामले में दिए फैसले में भी यही बात कही है। इसलिए हमने पूर्व में भी आपसे आग्रह किया था कि विधि के अनुकूल प्रदेश की सरकार काम करें, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधनों का अनुपालन करें। दिनांक 1 जनवरी 2015 को महामहिम राज्यपाल महोदय को पत्र देकर मांग की थी कि उ0 प्र0 सरकार कनहर बांध परियोजना में डूब रहे क्षेत्र का पुनः अधिग्रहण करें और वर्तमान कानून के अनुसार विस्थापितों के सम्मानजनक पुर्नवास की व्यवस्था करें।
आइपीएफ नेता ने पत्र में कहा कि यदि विस्थापित हो रहे परिवारों के साथ विधि के अनुसार प्रशासन कार्य करता और उनके सम्मानजनक पुर्नवास और मुआवजा की व्यवस्था होती तो इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से बचा जा सकता था।
ऐसी स्थिति में दुद्धी में पानी के संकट के वास्तविक हल के लिए मुख्यमंत्री से पुनः मांग की गयी कि कनहर बांध परियोजना में डूब रहे क्षेत्र का भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत पुनः अधिग्रहण करने के लिए अध्यादेश जारी करे और वर्तमान कानून के अनुसार विस्थापितों के सम्मानजनक पुर्नवास की व्यवस्था करें।