नई दिल्ली 21 अप्रैल। कनहर बांध का विरोध कर रहे आदिवासियों के दमन का जायज़ा लेने गई फैक्‍ट फाइंडिंग टीम के सारे सदस्‍य सिंगल पीस सुरक्षित लौट चुके हैं। वहां हमारे साथ जो कुछ हुआ, वह महत्‍वपूर्ण तो है लेकिन उससे कहीं ज्‍यादा अहम कुछ और तथ्‍य हैं जिन्‍हें तत्‍काल जारी किया जाना चाहिए। बिखरे हुए तथ्‍यों, तस्‍वीरों, ऑडियो, वीडियो को समेट कर विस्‍तार से पूरी कहानी एकाध दिन में मैं लिखूंगा, लेकिन फिलहाल निम्‍न तथ्‍य बिंदुवार प्रस्‍तुत हैं:
1) कल दिन में सोनभद्र के डीएम संजय कुमार और एसपी शिवशंकर यादव से हुई हमारी दो घंटे की लंबी मुलाकात के बाद शाम पांच बजे डीएम ने गांव में जाकर स्‍थानीय नेताओं व बांध समर्थकों की मौजूदगी में एक बैठक की। घोषणा की गई कि पहले के सर्वेक्षण के मुताबिक 1810 लाभार्थियों की सूची को दुरुस्‍त करने के लिए नए सिरे से सर्वे करवाया जाएगा और दस दिन के भीतर मुआवजे के चेक बांटे जाएंगे। इस संदर्भ में रात में डीएम ने एक प्रेस नोट जारी किया है।
2) देर रात खबर मिली कि कनहर बांध विरोधी आंदोलन के एक नेता गम्‍भीरा को इलाहाबाद में पीयूसीएल के वकील रविकिरण जैन के घर के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्‍हें सोनभद्र लाया गया है।
3) कल सोनभद्र के एसपी शिवशंकर यादव ने आधिकारिक जानकारी दी कि आंबेडकर जयंती 14 अप्रैल को हुई गोलीबारी में छाती पर मारी गई गोली से घायल सिन्‍दूरी गांव निवासी अकलू चेरो (बीएचयू में भर्ती) के दो साथियों लक्ष्‍मण और अशर्फी को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। उन्‍हें मिर्जापुर की जेल में रखा गया है। इन दो आदिवासियों की 14 के बाद गुमशुदगी को लेकर सस्‍पेंस बना हुआ था।
4) कनहर की खबर आज राष्‍ट्रीय मीडिया में आ जाने के बाद एनडीटीवी की ओबी वैन वहां पहुंच चुकी है। खबर है कि एबीपी के पत्रकार भी पहुंचने वाले हैं। दो दिन बाद मेधा पाटकर भी पहुंच रही हैं।
5) परसों शाम राजकुमारी नाम की एक महिला सुन्‍दरी गांव से अपनी बेटी के साथ बाहर निकली थी। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।
6) कल दुद्धी के प्राथमिक चिकित्‍सालय में मिले घायल कह रहे थे कि उनसे कहा गया है कि या तो अस्‍पताल में रहो या जेल जाओ। आज स्‍थानीय अख़बार में खबर छपी है कि कल शाम पांच को जिला चिकित्‍सालय रेफर कर दिया गया है जबकि 10 को डिसचार्ज कर दिया गया है। यह बात कितनी सही है, कोई इसकी पुष्टि करे।
7) आंबेडकर जयन्‍ती की गोलीबारी के बाद से सुन्‍दरी गांव की दो महिलाएं लापता हैं। पत्रकारों का एक धड़ा मानता है कि उनकी मौत हो चुकी है। दूसरा धड़ा मानता है कि वे नामजद थीं इसलिए उन्‍हें जेल में डाला गया है। एसपी का मानना है कि सब अफ़वाह है, कोई गायब नहीं है।