कन्हहर बांध के मामले में एन.जी.टी. (हरित कोर्ट) द्वारा सरकार का पर्दाफाश करते हुए निर्णय विरुद्धाभासी कन्हहर बांध- नए निर्माण पर रोक, नए सिर से पर्यावरण - वन अनुमती आवश्यकीय कन्हहर बांध के मामले में उच्च स्तरीय जांच का गाज़ न

उ0प्र0 के सोन्बध्द जिलों में गैरिकानूनी रूप से निर्मित कन्हहर बांध व अवैध तरीके से किए जा रहे भू-अधिग्रहण का मामला पिछले एक माह से गर्माया हुआ है। जिसमें अंबेडकर जयंती के अवसर पर प्रदर्शित कर रहे आदिवासी आंदोलनों का अकेला चेहरा पर चला गई गोलियाँ उसके सीने से आर-पार हो गई और कई लोग घायल हो गए। इसके बाद फिर से 18 अप्रैल को आंदोलनों से वार्ता करने के बजाय गोलियाँ व लाठी चार्ज करने का शमनना का गठन के रूप में सामने आया है। जिससे आम समाज का काफी आहत हुआ है। संविधाने व लोकतंत्र को ताक पर रखकर सरकार व प्रशासक द्वारा इस घोटाली परियोजना में करोड़ों रूपए की बंदरबांट करने का खुला नजराया जो सबके सामने आया है, वो हमारे सामाजिक ताने-बाने के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है, जिसमें निहित स्वार्थी और असामाजिक तत्व पूरे तंत्र पर हावी हो गए हैं।

कन्हहर बांध विरोधी आंदोलनों का लगातार यही कहना था कि कन्हहर बांध का गैरिकाकानूनी रूप से निर्मित किया जा रहा है, अधूरे कार्य के कारण कन्हहर बांध के निर्माण में अवैध लूट का हर तंत्र सामने आया है। इसके खिलाफ कई सामजिक ताने-बाने के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है, जिसमें निहित स्वार्थी और असामाजिक तत्व पूरे तंत्र पर हावी हो गए हैं।