कन्हैया को मिला किसानों का साथ
कन्हैया को मिला किसानों का साथ
किसानों की रैली में जेएनयू से लेकर रोहित वेमुला की बात होगी
नई दिल्ली। जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को किसानों का समर्थन मिला है। यह पहला मौका होगा, जब किसानों की रैली में जेएनयू से लेकर रोहित वेमुला की बात होगी। केन्द्र सरकार के खिलाफ लगातार लड़ाई लड़ रहे किसान अब जेएनयू और हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों के मुद्दे को भी उठाएंगे।
उल्लेखनीय है, 24 फरवरी को भूमि अधिकार मंच एक बार फिर से संसद मार्ग प्रदर्शन करने जा रहा है। पिछले साल भी इसी दिन किसानों ने एक बड़ी रैली की थी, जो भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ था। उस रैली में अन्ना हजारे भी शामिल हुए थे और एकता परिषद के कार्यकर्ता भी पलवल से पदयात्रा करते हुए इस रैली में शामिल हुए थे। इस रैली का आयोजन जन संगठनों और वामपंथी दलों से जुड़े किसान संगठनों ने किया था, जिसे बाद में व्यापकता देते हुए भूमि अधिकार मंच का गठन किया गया।
यह पहला मौका था, जब वाम दलों से जुड़े संगठन जन संगठनों के साथ मैदान में आए थे। इसके बाद चले लगातार आंदोलन के बाद राजनैतिक दलों ने भी भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर सरकार को घेरा और तीन बार अध्यादेश लाने के बाद अंततः मोदी सरकार को इसे वापस लेना पड़ा। हालांकि यह अध्यादेश अभी भी संयुक्त संसदीय समिति के पास है, जिसकी अनुशंसाओं पर सरकार को विचार करना है।
भूमि अधिकार मंच ने अपनी लड़ाई को व्यापक बनाते हुए मजदूरों में हड़ताल के दौरान भी देशभर में प्रदर्शन किए। इस बार इस रैली को और व्यापक बनाते हुए किसानों और खेत मजदूरों के अलावा मछुआरों, छात्रों, दलितों आदिवासियों के मुद्दों को भी उठाया जाएगा।
आज हुई पत्रकार वार्ता में वक्ताओं ने बताया, कि रैली के दौरान पत्रकारों पर व अभिव्यक्ति की आजादी पर हो रहे हमलों के मुद्दे को भी उठाया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार जिस तरह भूमि से जुड़े कानूनों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, वह भी इस रैली का एक बड़ा मुद्दा होगा।
वक्ताओं ने बताया, कि हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने सामुहिक वनों पर से आदिवासियों का अधिकार खत्म करने का कानून पास किया है, जो वनाधिकार कानून को कमजोर करने की कोशिश है।
रैली में सोनी सोरी पर हुए हमले का मामला भी उठाया जाएगा।


