कलात्मकता का बेहतरीन नमूना नवीन महाराष्ट्र सदन
कलात्मकता का बेहतरीन नमूना नवीन महाराष्ट्र सदन
ऐतिहासिक विरासत की धनी होने के कारण देश की राजधानी दिल्ली की एक अलग पहचान है। प्राचीन और भव्य इमारतें, ऊँची-ऊँची मीनारें इत्यादि मनमोहक कला-कौशल की ये सभी कृतियाँ अपने आप में अलौकिक हैं। इस ऐतिहासिक विरासत को और अधिक समृद्ध बनाने के लिये एक अन्य वैभवशाली इमारत 'नवीन महाराष्ट्र सदन' का नाम अब इसमें जुड़ने जा रहा है। शहर के मध्य भाग लुटियन्स ज़ोन में इसे बनाया गया है। दिल्ली की प्राचीन इमारतों की विशेषता है कि उनमें धौलपुरी लाल पत्थर का प्रयोग किया गया है। नवीन महाराष्ट्र सदन का निर्माण भी इस बात को ध्यान में रखते हुये किया गया है। इमारत के मध्य भाग में मराठा साम्राज्य के वीर पुरुष छत्रपति शिवाजी महाराज की सिंहासन पर बैठे हुये एक प्रतिमा बनायी गयी है जिन्होंने दिल्ली के तख्त को जीतने का जज्बा दिखाया। इसके ठीक दाँयी ओर देश के महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और बाँयी ओर देश के संविधान निर्माता बाबासाहब अंबेडकर की भव्य प्रतिमायें हैं। पहली ही दृष्टि में यह रचना महाराष्ट्र की सामाजिक और राजनीतिक प्रेरणादायी विरासत से प्रेरित होने का अहसास कराती हैं। सामने के भाग में छत्रपति शाहू महाराज और महाराष्ट्र के शिल्पकार कहे जाने वाले यशवन्तराव चव्हाण की आदमकद प्रतिमायें भी यहाँ बनायी गयी हैं। सभी आधुनिक हाईटेक सुख-सुविधाओं से सुसज्जित यह भवन दिल्ली में सभी राज्यों के विश्राम गृहों के लिये एक आदर्श नमूना है। इस विश्रामगृह की संकल्पना ऐतिहासिक शनिवार वाडा और विश्राम बाग वाडा की पृष्ठभूमि पर की गयी है। महाराष्ट्र से दिल्ली आने वाले अतिथियों के लिये इस भव्य इमारत का निर्माण किया गया है जो अपनी विशालता और खूबसूरती में दिल्ली स्थित अन्य सभी राज्यों के भवनों में सबसे आगे है। दिल्ली वालों के लिये भी यह इमारत गर्व की वस्तु है।
नवीन महाराष्ट्र सदन के लिये स्थान की खोज और उसके निर्माण की कहानी बेहद रोचक है। आज़ादी से पहले सन् 1930 में भारत सरकार ने कस्तूरबा गाँधी मार्ग पर 6.18 एकड़ का प्लॉट हिमाचल में सिरमूर के महाराज को राज्य का सदन बनाने के लिये भेंट किया था। सिरमूर के महाराज ने सन् 1932 में वडोदरा के महाराज को यह भूमि सौंप दी। उसके बाद दूसरे विश्वयुद्ध के समय रक्षा मन्त्रालय ने इस भूमि पर अधिकार जमाने के लिये इस पर कुछ निर्माण कार्य किये। इसके बाद यह भूमि भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आ गयी।
1951 में भारत सरकार ने घोषित किया कि ब्रिटिश काल में राजघरानों को राजभवनों के लिये दी गयी भूमि उस राज्य की सम्पत्ति होगी। इस प्रकार वडोदरा राज्य की यह जमीन स्वतन्त्रता के बाद निर्मित हुये मुम्बई राज्य के अधिकार क्षेत्र में आयी। कुछ समय बाद मुम्बई राज्य, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में बँट गया। तब नवीन राज्य निर्मिति नियम के अनुसार गुजरात के बाहर आने वाली मूल मुम्बई राज्य की सारी सम्पत्ति महाराष्ट्र की हो गयी। इस प्रकार वडोदरा राज्य की इस भूमि पर 1 मई 1960 को महाराष्ट्र का अधिकार हो गया। यद्यपि महाराष्ट्र को इस जमीन का मालिकाना हक 1970 में मिला।
कॉपरनिकस मार्ग पर निर्मित महाराष्ट्र सदन आकार में काफी छोटे होने के कारण स्वयम् भारत सरकार ने इस भूमि के लिये प्रयास शुरु किया। 1970 से 1999, इन 29 वर्षों के लम्बे प्रयासों के बाद 10 मई 1999 को भारत सरकार ने यह भूमि महाराष्ट्र सरकार को सौंप दी। 1999 में भूमि के कुछ हिस्से पर महाराष्ट्र सरकार ने 100 बिस्तरों वाले सरकारी विश्रामगृह शुरु किये। ये विश्रामगृह केवल कुछ समय के लिये चले। नवीन सदन के निर्माण के आदेश के बाद इन्हें बन्द कर दिया गया। भूमि के हस्तान्तरण, अन्य विविध अनुमतियों और कानूनी कार्यवाहियों के पूरी होने के बाद 12 दिसम्बर 2006 को इस भूमि पर प्रत्यक्ष रूप से नवीन महाराष्ट्र सदन का निर्माण कार्य शुरु हो गया।
अब इस इमारत के डिजाइन पर एक नज़र....
नवीन महाराष्ट्र सदन की इमारत की कुल ऊँचाई 9.2 मीटर है। इस भवन के लुटियन्स ज़ोन में होने के कारण केवल दो मंजिलों के ही निर्माण की अनुमति है। महाराष्ट्र में मराठा शासन की वैभवशाली हवेली संस्कृति रही है। इसी बात को ध्यान में रखकर इस इमारत को बनाया गया है। बीच में खुली जगह छोड़कर दोनों ओर अतिथियों के लिये कमरे बनाये गये हैं। इमारत का डिजाइन इस प्रकार बनाया गया है कि हर जगह सूरज की भरपूर रोशनी आये। इसके साथ ही मुख्यमन्त्री, राज्यपाल और अन्य विशिष्ट की सुरक्षा पर भी इमारत के डिजाइन में विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमन्त्री और राज्यपाल के कक्षों के लिये स्वतन्त्र प्रवेश द्वार है। मन्त्रियों और विधायकों के कक्षों के बाहर खुले स्थान में खूबसूरत बगीचे और फव्वारे भवन के सौंन्दर्य में चार चाँद लगाते हैं। सार्वजनिक प्रयोग के लिये बनाये गये भोजन कक्ष और बैठक कक्ष को मुख्य लॉबी से जोड़ा गया है। वाहनों के लिये अलग से पार्किंग बनाने के नियम का पालन करते हुये यहाँ 207 गाड़ियों की भव्य पार्किंग का निर्माण किया गया है।
भवन में महाराष्ट्र की हवेली संस्कृति की ऐतिहासिकता को दिखाने के लिये बड़े पैमाने पर धौलपुरी पत्थर का प्रयोग किया गया है। भवन के अगले भाग में सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करते पानी के फव्वारे और भरपूर हरियाली पर विशेष ध्यान दिया गया है। महत्वपूर्ण स्थानों का लैंडस्केप करते हुये भिन्न-भिन्न प्रकार के वृक्ष भी लगाये गये हैं। बगीचे के मध्य भाग में छत्रपति शिवाजी महाराज की सिंहासन पर बैठी हुयी भव्य प्रतिमा महाराष्ट्र की गौरवशाली सांस्कृतिक और राजनीतिक विरासत को दर्शाती है। इस प्रेरणादायी प्रतिमा के चारों ओर हरा भरा बगीचा और पीछे भव्य भवन दिखायी देता है।
नवीन महाराष्ट्र सदन का निर्माण मुम्बई की झुग्गी के पुनर्विकास प्राधिकरण के अन्तर्गत विकासकों के निज़ी लाभ के बदले में किया गया है। विकासक के.एम. चमणकर ने सर्वसुविधा युक्त इस उच्च स्तरीय आधुनिक वास्तु का राजवैभव के रूप में निर्माण किया है तथा राज्य सरकार पर इसके लिये किसी प्रकार का आर्थिक भार नहीं डाला गया है।
वास्तुविषारद पी. जी. पत्की ने इस निर्माण कार्य को एक सुन्दर आकार दिया है। इस भवन में निर्माण के छह भागों को जोड़ा गया है। भवन का कुल निर्माण क्षेत्र 16105 वर्ग फुट है जो कि 173290 वर्ग फुट निर्माण क्षेत्र के समान है। भवन का निर्माण 12 दिसम्बर 2006 को शुरू होकर 12 जुलाई 2012 को पूरा हुआ। भवन में कुल 138 कक्ष हैं। इसमें राज्यपाल और मुख्यमन्त्री के लिये बनाये गये अत्याधुनिक कक्षों में 13 कक्ष निहित हैं। इन दो आरक्षित कक्षों के अलावा भवन में 132 कक्ष उपलब्ध हैं। इनमें से 8 कक्ष राज्यमन्त्री, 6 कक्ष मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव के लिये, 21 कक्ष विधायकों के लिये, 80 कक्ष अतिथियों के लिये और 2 कक्ष शारीरिक रूप से विक्लांगों के लिये रखे गये हैं।
भवन में बरामदा ओर लॉबी भी बनायी गयी है। सभागृह, पत्रकार परिषद सभागृह, पुस्तकालय, सांसद समन्वय कक्ष, बैंकेट हॉल, भोजन कक्ष, ज़िम, अत्यावश्यक शॉपिंग कक्ष, जीवनावश्यक वस्तुओं का बिक्री केन्द्र, सांस्कृतिक केन्द्र, क्लास रूम, बिज़नेस सेंटर, प्रशासन और कर्मचारियों के लिये कुछ आरक्षित कक्ष आदि भी भवन में बनाये गये हैं।
इसके अलावा अत्याधुनिक रसोईघर, स्टाफ कैंटीन, लाँड्री, संस्थापन विभाग व शक्तिशाली ए।सी। प्लान्ट आदि का निर्माण आधुनिक तकनीक से किया गया है। साथ ही यहाँ पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिये विश्रामगृह, ड्रेसिंग रूम व स्टाफ लॉकर की व्यवस्था भी की गयी हैं। प्रत्येक अतिथि कक्ष में अटैच्ड बाथरूम, आधुनिक और आरामदायक बेड और आवश्यक फर्नीचर है। साथ ही कम्प्यूटर, वाई फाई इन्टरनेट, इलैक्ट्रॉनिक ताले की भी व्यवस्था यहाँ की गयी है। भवन का सम्पूर्ण परिसर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में सुरक्षित है।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुये भवन में सीवेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट, रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्लान्ट और वॉटर साप्टनिंग प्लान्ट भी बनाये गये हैं। भवन के सौन्दर्य को बरकरार रखने के लिये किसी भी छत पर पानी की टंकी नहीं रखी गयी है। हाइड्रो पेन्यूमैटिक सिस्टम से पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गयी है। भवन की देखरेख का कार्यभार शुरु के पाँच वर्षों के लिये विकासकों को दिया गया है।
नवीन महाराष्ट्र सदन-एक नज़र में
सम्पूर्ण परिसर - 6 एकड़
कुल कक्ष - 138
मुख्यमन्त्री के अपार्टमेन्ट में कुल कक्ष - 13
राज्यपाल के अपार्टमेन्ट में कुल कक्ष - 13
कैबिनेट मन्त्रियों व उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तियों के लिये 3-3 कक्षों के 8 अपार्टमेन्ट
राज्यमन्त्रियों के लिये 2-2 कक्षों के 16 अपार्टमेन्ट
प्रधान सचिव स्तर के अधिकारियों के लिये 6 अपार्टमेन्ट
विधायकों के लिये अत्याधुनिक 21 कक्ष
विक्लांग व्यक्तियों के लिये 2 कक्ष
अधिकारियों व मान्यवरों के लिये 80 कक्ष
प्रबन्धन विभाग के कर्मचारियों के लिये 4 कक्ष
सुसज्जित पुस्तकालय व संग्रहालय
सांसद कक्ष
500 व्यक्तियों की क्षमता वाला सभागार
100 व्यक्तियों की क्षमता वाला पत्रकार कक्ष
(सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय, महाराष्ट्र शासन द्वारा जारी)


