J-K’s Athar Aamir, second rank holder in IAS exams
सिविल सर्विसेज परीक्षा 2015-जम्मू-कश्मीर के अतहर आमिर उल शफी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया
अशोक कुमार पाण्डेय

अनंतनाग के एक युवा अतहर आमिर उल शफी Athar Aamir Ul Shafi Khan के आई ए एस में चुने जाने को लेकर मैं खुश हूँ. अभी तक केंद्र में कश्मीर की रहनुमाई ज़्यादातर कश्मीरी पंडितों ने ही की है. उनका दृष्टिकोण हमेशा शामिल रहा है. प्रेस और मीडिया में भी वही रहे हैं. मोहम्मद इशाक खान ने अपनी किताब में इस फिनोमिना को समझाया है . कश्मीरी मुसलमान की पहुँच घाटी से बाहर एक व्यापारी के रूप में ही अधिक रही है.
मैं चाहता हूँ अधिक से अधिक कश्मीरी देश की मुख्यधारा में शामिल हों. घाटी का कश्मीरी मुसलमान वहां से बाहर निकल कर केंद्र सरकार की नौकरियों, निजी क्षेत्र, मीडिया, खेलों आदि में शामिल हो. मेल मुलाक़ात हो और हमारे रिश्तों की बर्फ पिघले. आज जो गहरा अविश्वास है वह टूटे. यहाँ के कॉफ़ी हाउस में बैठकर वह हमसे निःशंक होकर तीखी बहस कर सके. वहां के लाल चौक में कहवा पीते हम उससे जम के बहस कर सकें. उसके ग्रिवान्सेज समझे मेनलैंड भारत के लोग, और वे भी यहाँ की शिकायतें. आज उनके सामने विकल्प के रूप में केवल मुस्लिम कट्टरपंथी हैं. मैं चाहूंगा वे उसके आगे देखें.
मैं चाहूंगा वहां सेना कम करने के हालात बनें. सरकार बातचीत का माहौल बनाये. गोलियों की जगह ज़ख्मों पर मरहम लगाये जाएँ. आतंकवाद का आर्थिक-सामजिक आधार नष्ट किया जाए और लोकतंत्र की जड़ें गहरी की जाएँ. मैं यह भी चाहूँगा कि वहां से पलायित कश्मीरी पंडितों की वापसी का माहौल बने. अगर वे लौटना चाहें तो लौटें. उन्हें कट्टरपंथी हिंदुत्व की ताक़तों से बाहर लाया जा सके जो उनका इस्तेमाल देश भर में नफरत फैलाने के लिए तो करते हैं, पर उनके लिए कुछ नहीं करते. कश्मीरियत किताबी शब्द की जगह फिर हकीकी मसला बने.
जिन्हें लगता है कि वहां इंक़लाब कर कुछ हल किया जा सकता है वे शायद नहीं जानते कि सर्राफ ग्रुप के सफाए के बाद वहां कुछ नहीं बचा है. ले दे के एक सीपीएम विधायक हैं जिनका दक्षिण कश्मीर के एक छोटे से इलाक़े के बाहर कोई प्रभाव नहीं. वामपंथ के विस्तार की इस ख़ूनी माहौल में कोई संभावना नहीं. सबसे पहले गीलानी जैसे कट्टरपंथियों की चंगुल से लोगों को आज़ाद कराना होगा.
मैं चाहता हूँ कि वह माहौल बने जिसमें प्लेबिसाईट में हिन्दुस्तान को बहुमत मिले और हम सर उठा के संतोष के साथ कह सकें कि हम एक सेक्यूलर देश हैं और कश्मीर हमारा बेहद अजीज़ हिस्सा है और यह सुनकर कश्मीरी मुस्कुरा कर सहमति दे ....
खैर मेरे चाहने से क्या होता है.

Jammu and Kashmir’s Athar Aamir ul Shafi Khan, who has ranked second in the 2016 national civil services exam.