कहाँ रहता है ऊपरवाला उसकी लाठी और न्याय
कहाँ रहता है ऊपरवाला उसकी लाठी और न्याय
दो कविताएँ
ऊपर वाले की लाठी और न्याय : 1 :
सदियों से सुना है वह न्याय करता है
लाठी तो चलायें
पर चलायें कैसे
जिनके पास लाठियां हैं भैंसे भी उनकी हैं
छुड़ाएँ कैसे
ऊपरवाला शीत युग की निद्रा में है
उसे जगायें कैसे
ताले में बंद है
चाबी है लठैतों के पास
हथियाएँ कैसे
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कहाँ रहता है ऊपरवाला उसकी लाठी और न्याय : 2 :
उसकी लाठी बेआवाज
हमारी आवाज भी बेआवाज
वह कहां सुनता
मग्न है आत्मरति में
वहीं रहनें दें उसे
करोड़ों आकाश ऊपर
ऊंचाई पर रहता है
लाखों प्रकाश वर्ष दूर
हमारी आवाज जाती नहीं जहाँ
किसके लिये वह लाठी उठा सकता है वहाँ
जसबीर चावला
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