कहीं संजय गांधी की राह पर तो नहीं चलेंगे कमलनाथ

आम जनता कमलनाथ के व्यवहार को लेकर संतुष्ट है

भोपाल से नीतीश मिश्र

अपने शपथ समारोह के मौके पर जिस तरह से भोपाल में अपने मित्र संजय गांधी को याद करके कमलनाथ ने भले ही दुनिया को दिखाने के लिए अपनी मित्रता की मिसाल पेश करने की कोशिश की हो...लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ जिस तरह से ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं उससे राजनीतिक गलियारे में यह बहस जोरों पर है कि कहीं कमलनाथ संजय गांधी की तर्ज पर तो शासन नहीं करना चाहते है... क्योंकि कमलनाथ संजय गांधी के इकलौते ऐसे मित्र हैं जो संजय गांधी के मरने के बाद भी अपने घर में संजय गांधी की तस्वीर लगाना कभी नहीं भूले।

मुख्यमंत्री कमलनाथ किसानों का कर्जमाफी का आदेश जारी करके लोकतंत्र में भले ही वाहवाही लूटने में लगे हों...लेकिन सीएम बनने के दौरान ही उन्होंने यूपी और बिहार के लोगों पर रोजगार छीनने का आरोप लगाकर यह जता दिया कि उनकी मानसिकता बहुत व्यापक नहीं है। कमलनाथ के इस बयान को या तो एमपी केंद्रित राजनीति का विषय माना जाए...या उनकी संर्कीणता। क्योंकि कमलनाथ खुद उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में पैदा हुए और उनके पुरखे बरेली जिले के आंवला तहसील से तालुक्क रखते हैं।

लेकिन वहीं राजनीतिक गलियारे में यह भी बात जोरों पर चल रही हैं कि यह केवल उनकी छवि धूमिल करने के लिए यह सब बातें की जा रही हैं। संजय गांधी की तस्वीर लगाने के पीछे कमलनाथ ने यह जाहिर कर दिया कि जिस तरह से संजय गांधी मारूति कंपनी को सत्तर के दशक में हिंदुस्तान में लेकर आए थे ... ठीक वैसी हीं कंपनी वह मध्यप्रदेश में ला सकते हैं, क्योंकि कमलनाथ जितने बड़े राजनेता हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ा कद व्यापार क्षेत्र में हैं।

खैर जो भी हो लेकिन इतना तो तय है कि कमलनाथ अपने शासन काल में अपने मित्र संजय गांधी की शैली में ही काम करना पंसद करेंगे, क्योंकि इसी बहाने वह एक साथ जहां अपने मित्र का सपनों को साकार करने की कोशिश करेंगे तो दूसरी ओर वह संजय के साथ जीए हुए पलों को फिर से दुबारा जीने की कोशिश करेंगे। यही वजह है कि प्रशासनिक गलियारे में भी इन दिनों संजय गांधी से जुडे हुए किस्से लोगों की जुबान पर चढ़कर बोलने लगे हैं।

राजनीति से जुड़े जानकारों का कहना है कि संजय गांधी की अपनी जल्दबादी के चक्कर में आज भी उन्हें इतिहास याद नहीं करना चाहता। क्योंकि संजय गांधी जब चाहते थे सेंसरशिप पर रोक लगा देते थे... मीडिया घरानों से जुड़े समूह भी कमलनाथ को लेकर संशय पाले हुए हैं। उन्हें इस बात का डर है कि कहीं कमलनाथ भी संजय की तर्ज पर मीडिया पर कभी प्रतिबंध न लागू कर दें। लेकिन वह प्रतिबंध संजय गांधी जैसा नहीं होगा... क्योंकि उस समय देश का माहौल आज के माहौल से बहुत अलग था।

लेकिन कुछ भी हो कमलनाथ को लेकर सभी के मन में संशय है...लेकिन आम जनता कमलनाथ के व्यवहार को लेकर संतुष्ट है... क्योंकि उसे उम्मीद है कि प्रदेश की कमान ऐसे व्यक्ति के पास है जो जनता की बेहतरी के लिए रात भर सोचता है। वहीं जनता की इस उम्मीद के पीछे दूसरी एक वजह यह भी है कि कमलनाथ सहिष्णु भी उतने ही जितनी जनता।

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