जाहिद खान
सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में सबसे बड़ी कार्यवाही करते हुए चुनाव आयोग ने बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के इल्जाम में गुजरात के मुख्य सचिव और डीजीपी से एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। चुनाव आयोग ने यह फैसला, वोट डालने के बाद मोदी के संबोधन की वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के बाद किया। चुनाव आयोग को शिकायत की गई थी कि नरेन्द्र मोदी ने मतदान केंद्र के नजदीक न सिर्फ पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल प्रदर्शित किया, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने राजनीतिक भाषण भी दिया। आयोग ने वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के बाद कहा कि मोदी के भाषण की सामग्री, स्वर और उनके द्वारा दिया गया बयान और जिस तरीके से उन्होंने प्रतीक चिह्न कमल को प्रदर्शित किया वह भाषण राजनैतिक भाषण की प्रकृति का था। जिसका उद्देश्य, उन चुनाव क्षेत्रों के नतीजों को प्रभावित करना था, जिनमें मतदान चल रहा था। यह बात सही भी है। जिस समय मोदी ने यह गैर जिम्मेवाराना हरकत की उस वक्त न सिर्फ अमदाबाद बल्कि गुजरात के अन्य सभी निर्वाचन क्षेत्र और देश के अन्य हिस्सों में भी मतदान चल रहा था।
गौरतलब है कि मोदी ने सातवें चरण के मतदान के दौरान अमदाबाद के रानिप इलाके में एक मतदान केंद्र पर वोट डालने के तुरंत बाद संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया, जहां उन्होंने बीजेपी के चुनाव चिह्न कमल का खुलकर प्रदर्शन किया। एक लिहाज से देखें तो यह सारी कार्यवाही जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 126 (1) (ए) तथा 126 (1) (बी) का खुला उल्लंघन है। इस धारा के तहत चुनाव संपन्न कराने के लिए निर्धारित अवधि के समाप्त होने से पहले के 48 घंटों के दौरान जनसभा करने पर पाबंदी है। इस कानून के मुताबिक कोई भी व्यक्ति चुनाव के संबंध में किसी जनसभा या जुलूस का न तो आयोजन करेगा, न हिस्सा लेगा या संबोधित करेगा। इसके अलावा सिनेमेटोग्राफ, टेलीविजन या उसी तरह के अन्य उपकरणों के माध्यम से वह किसी चुनाव सामग्री का जनता के लिए प्रदर्शन नहीं कर सकता। कानून के तहत सिनेमेटोग्राफी, टीवी या ऐसे ही किसी अन्य माध्यम के जरिये किसी चुनावी मामले पर कुछ भी प्रसारित करना पूरी तरह से गैर कानूनी है। यदि जानते-बूझते इन कानूनों का उल्लंघन किया जाता है, तो संबंधित शख्स को दो साल की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष हों, इसके लिए चुनाव आयोग के कई दिशा-निर्देश हैं। मसलन लोग ऐसी टोपी, शॉल और कपड़े पहनकर मतदान केंद्र में प्रवेश नहीं कर सकते, जिस पर किसी राजनैतिक दल का चुनाव चिह्न हो। यही नहीं जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 130 चुनाव के दिन मतदान केंद्र के भीतर किसी व्यक्ति को वोट के लिए प्रचार करने या चुनाव से संबंधित किसी नोटिस या चिहन का प्रदर्शन करने से रोकती है। चुनाव आयोग के इन साफ-साफ दिशा-निर्देशों के बाद भी राजनीतिक पार्टियां और उनके उम्मीदवार कानून तोड़ने से बाज नहीं आते। यह पार्टियां और उम्मीदवार इस तरह का बर्ताव करते हैं, मानो कि वे पहली बार चुनाव लड़ रहे हों। नरेन्द्र मोदी बीते तेरह साल से एक राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे हैं और उन्हें ये मालूम होना चाहिए कि चुनाव के वक्त किस तरह की आचार संहिता होती है एवं इसका पालन करना कितना जरूरी।
बहरहाल चुनाव आयोग के निर्देशानुसार अहमदाबाद अपराध शाखा ने चुनाव कानून के उल्लंघन को लेकर मोदी के खिलाफ दो प्राथमिकियां दर्ज कर ली हैं। टीवी चैनल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिसने बैठक की पूरी कार्यवाही और चुनाव मामले को दिखाया, चुनाव आयोग ने उनके खिलाफ भी धारा 126 (ए) (बी) के तहत अलग से शिकायत, प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। यह कार्यवाही जरूरी भी है। गर यह कार्यवाही नहीं की जाती तो पूरे देश में यह संदेश जाता कि चुनाव आयोग नरेन्द्र मोदी और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रति नरम है। मौजूदा लोकसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने जिस तरह से एक अभियान के तहत बीजेपी और नरेन्द्र मोदी को प्रोजेक्ट किया है, जाहिर है सवाल उस पर भी है। समाचार, न्यूज स्टोरी, चुनाव कवरेज और सर्वे के नाम पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया लगातार बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने का काम कर रहा है।
बीजेपी और नरेन्द्र मोदी अपनी इस गैर जिम्मेवाराना हरकत के लिए माफी मांगते, इससे उलट पार्टी का कहना है कि मोदी ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने जो भी काम किया है, वह आदर्श आचार संहिता के दायरे में है। अपनी इस शर्मनाक करतूत के लिए भी बीजेपी, कांग्रेस पर ही इल्जाम लगा रही है। मानो यह शिकायत कर कांग्रेस ने कोई अपराध कर दिया हो। नरेंद्र मोदी को तो अपने ऊपर दर्ज हुई एफआईआर को लेकर भी एतराज है। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ सबको कमल दिखाया था, कोई चाकू नहीं दिखाया। मोदी यहीं चुप नहीं बैठ गए, बल्कि उन्होंने धमकी भरे लहजे में यह तक कह डाला कि, मैं आज का दिन कभी नहीं भूल सकता। आज के दिन मेरे खिलाफ गुजरात में एफआईआर दर्ज हुई। यानी मोदी को अभी भी नहीं लगता कि उन्होंने कोई गलती की है। उलटे अपने ऊपर हुई एफआईआर को वे बड़े ही बेशर्मी से चुनौती दे रहे हैं। अपनी सफाई देने का उनका अंदाज कुछ-कुछ ऐसा है, कि यदि वे प्रधानमंत्री बन गए तो एक-एक को देख लेंगे।
बीजेपी और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी द्वारा मौजूदा लोकसभा चुनाव में आचार संहिता उल्लंघन की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं। बीजेपी ने अपना चुनाव घोषणा-पत्र उस वक्त जारी किया था, जिस दिन देश में प्रथम चरण का मतदान हो रहा था। यही नहीं मोदी ने बनारस में अपना नामांकन भी उस दिन किया, जबकि छठे चरण के लिए मतदान हो रहा था। नामांकन, रोड शो के साथ हुआ। जिसमें देश भर से लाखों लोगों की भीड़ जुटाई गई। भीड़ बीजेपी के चुनाव प्रतीक कमल वाली टीशर्ट पहने हुए थी। एक तरफ देश भर में मतदान हो रहा था, दूसरी ओर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तमाम चैनल इस रोड शो को लाइव दिखला रहे थे। उस दिन मीडिया चैनलों का यह लाइव शो बिना किसी रुकावट के कई घंटे चला। मतदान के सातवें चरण में तो नरेन्द्र मोदी ने सारी हदें ही तोड़ डालीं। वोट डालने के बाद प्रेस वार्ता की और पार्टी के चुनाव चिन्ह को प्रदर्शित किया। सच बात तो यह है कि वह प्रेस वार्ता भी नहीं थी। प्रेस वार्ता के बहाने दरअसल उन्होंने एक बार फिर जनता को संबोधित किया और उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की। कुल मिलाकर मोदी द्वारा चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की यह एक और घटना थी। लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में गहरी आस्था जताने की लंबी-लंबी डींगे मारने वाली बीजेपी और उसके नेता चुनाव आचार संहिता की खुलकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। मोदी को न तो लोकतांत्रिक मर्यादाओं की चिंता है और न ही उनके दिल में चुनाव आयोग की कोई इज्जत। गर उनके दिल में चुनाव आयोग की इज्जत होती, तो वह इस तरह की हरकत करने से पहले दस बार सोचते।
देर से ही सही, चुनाव आयोग ने इन सब बातों का संज्ञान लिया है। आयोग की सख्ती के बाद नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अहमदाबाद में एफआईआर दर्ज हुई हैं। चुनाव आयोग, आचार संहिता उल्लंघन की इन घटनाओं पर यदि पहले ही संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही करता, तो बीजेपी और नरेन्द्र मोदी इतना आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं करते। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके आदेशों का पालन हर हाल में होना चाहिए। गर इन आदेशों का पालन नहीं होगा, तो आयोग की सर्वोच्चता और निष्पक्षता पर कौन विश्वास करेगा ? मोदी ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है। लिहाजा उनके खिलाफ कार्यवाही जरूर होनी चाहिए। चुनाव आयोग को अख्तियार है कि वह इस मामले में संज्ञान लेते हुए ना सिर्फ नरेन्द्र मोदी के ऊपर जुर्माना लगाए बल्कि यदि इससे भी आगे बढ़कर कोई कार्यवाही हो सकती है, तो आयोग को उस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। क्योंकि मोदी हों या फिर और कोई, कानून से ऊपर कोई नहीं। कानून का सम्मान सभी को करना चाहिए। मोदी भी कानून का सम्मान करना सीखें।
जाहिद खान, लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।