कायदा – कायदा – कायदा
कायदा – कायदा – कायदा
अब यह जो मुन्नी है जब जवान भई तो शीला हो गई । उसे पता था कि सब उसकी जवानी पर फिदा हैं । उसने बिझिझक कह दिया कि किसी के हाथ नहीं लगने वाली है । टिंकु जी लाख उसके बल पर जीने का दम भरते हुए कहते रहें कि मैं जट –
यमला – पगला – दीवाना , इत्ती सी बात न जाना …अभी कल परसो यही तो कहा हमारे देश के मुख्य सतर्कता आयुक्त पी जे थामस ने कि सरकार ने या यूं ही कहिए कि उन्हें बदनाम करने वालों ने इत्ती सी बात न जाना कि कायदा ही खराब है जो हर बात पर कायदा – कायदा – कायदा करता
है । अब बसंती , अपनी शोले वाली की जबान में यूं तो वही बात हो गई जो अदालतों में होती है कि तारीख – तारीख – तारीख । किसी ने गब्बर का तवारीख पूछा है कि उसका इतिहास क्या था । वही कहा हमारे मुकेंसआ ने कि हम तो
कायदे कानून के पक्के हैं कि हम में कोई दोष नहीं है ।
उनकी बात दुखी दिल की पुकार है कि दुखवा कासे कहूं सजनी । जब भारत सरकार में सचिव बनाए जा रहे थे तो किसी को नहीं दिखा , उनके ऊपर पामोलिन तेल का दाग । तब तो कुछ अच्छा होता है तो दाग अच्छे हैं के अंदाजे बयां में
उन्हें केरल राज्य का मुख्य सचिव भी बना दिया गया । तब कहां थे आज उन्हें नारियल पानी पी पी कर कोसने वाले लोग । भारत सरकार में सचिव बनाया गया , तब भी वह पाक साफ थे । उनके वक्त के मुकेंसआ ने उन्हें पास कर दिया था ।
पास काहे को किया कि उन पर कार्रवाई करने की कोई अनुमति नहीं मिली थी ।
अनुमति न मिलने का कारण वही कायदा कि कार्रवाई तभी होगी जब अनुमति मिलेगी । अब कायदा यह भी है कि अनुमति न दी जाए । न दिया जाना हमारे देश की
परंपरा है – लटकाना । इसी लिए कायदा है कि जब तक दोष साबित न हो जाए सब कुछ साफ साफ होता है । ऐसी हालत में थामस साहब कैसे दोषी होते । दोषी तो
कायदा – कायदा – कायदा है ।
अब इस कायदा का कोई इलाज है क्या ? पर सवाल इसी कायदे से जुड़ा है कि जब आदमी तरक्की कर रहा होता है तो उसका बेकायदा किसी को नहीं दिखता । तब तो
लगता है कि ऐसे काबिल को जो भी मिला है , वह कम है । जब कोई भारी चीज मिलने वाली होती है तो कायदा कायदा कायदा याद आता है ।
मान लीजिए श्री सुषमा स्वराज ने उनकी बहाली की अनियमितता का सवाल नहीं उठातीं तो हम को कहां से पता चलता कि मामला बेकायदा है । न जाने इस तरह
के कितने बेकायदे मामले देश में चल रहे हैं । सब के सब कायदा से ही चल रहे हैं । अब जरूरत इस बात की है कि यह कायदा – कायदा बदला जाए । खास तौर
पर सरकारी अफसरों के मामले में । जैसे ही उन पर कायदे से कोई कायदा वाला बेकायदा आरोप लगे तो तुरत जांच हो जाए । अभी का कायदा – कायदा – कायदा
तरीका तो बढ़ा बेकायदा है कि सब कुछ कायदे से बेकायदा चलता रहता है ।


