लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए – आइपीएफ
समाजवादी सरकार का लोकतांत्रिक-संवैधानिक संस्थाओं और पारदर्शिता में भरोसा नहीं रह गया
लखनऊ, 29 अगस्त। आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) ने प्रदेश की अखिलेश सरकार द्वारा लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन के जरिए गलत शिकायत पर शिकायतकर्ता के खिलाफ एक लाख रुपए का जुर्माना करने के प्रावधान व चयन प्रक्रिया में उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाघीश को हटाकर सरकार के प्रतिनिधियों को बढ़ाने की कड़ी निंदा की है। इस सम्बंध में आइपीएफ ने राज्यपाल महोदय से इस संशोधन विधेयक पर रोक लगाने की मांग की है।
आइपीएफ के प्रदेश संगठन महासचिव दिनकर कपूर ने बताया कि अखिलेश सरकार द्वारा आनन-फानन में किया गया यह बदलाव प्रदेश में जारी संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार को बढावा देने के लिए है। इसमें उच्चतम या उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की नियुक्ति का अधिकार सरकार को देने और चयन प्रक्रिया में विधानसभा अध्यक्ष को शामिल करने से सरकार का वर्चस्व स्थापित होगा, जिससे लोकायुक्त की निष्पक्षता प्रभावित होगी। यह बदलाव दर्शाता है कि समाजवादी सरकार का लोकतांत्रिक-संवैधानिक संस्थाओं और पारदर्शिता में भरोसा नहीं रह गया है।
श्री कपूर ने कहा कि ‘बन रहा है आज संवर रहा है कल‘ का नारा देने वाली सपा सरकार में कदाचार और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर ऐसे व्यक्ति को बैठा दिया गया जिस पर गुण्डा एक्ट समेत आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। कर्मचारी चयन आयोग, प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा आयोग समेत विश्वविद्यालयों के कुलपति तक में सरकार ने मानदंडों का उल्लंघन कर शीर्ष पदों पर नियुक्तियां कीं, जिस पर उच्च न्यायालय तक ने आपत्ति जताई है। प्रदेश में पीसीएस से लेकर चपरासी की नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर धन की वसूली हो रही है। ट्रांस्फर-पोस्टिंग काली कमाई का उद्योग बन गया है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के निर्माण में लूट हुई है। खनन से लेकर लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग समेत विकास कार्यो में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी हो रही है। प्रदेश में संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार हो रहा है और काली कमाई से सपा सरकार के मंत्रियों का ‘आज और कल बन-संवर’ रहा है।
आइपीएफ नेता ने कहा भ्रष्टाचार की जांच से बचने के लिए सपा सरकार ने पहले बिना मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय और नेता विपक्ष से परामर्श किए लोकायुक्त की नियुक्ति करने का मनमाना फैसला लिया और जब इस पर आपत्तियां आयीं तो मनमाने तरीके से चयन प्रक्रिया में ही बदलाव कर डाला। इतना ही नहीं शिकायत गलत साबित होने पर शिकायतकर्ता पर एक लाख रुपये के जुर्माना लगाने का प्रावधन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि आइपीएफ प्रदेश में अन्य तमाम जनमुद्दों के साथ ही कदाचार और भ्रष्टाचार के खिलाफ जन अभियान संचालित करेगा।