किस तरह होगा एक साथ विधानसभा-लोकसभा चुनाव जबकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष है ?

चुनाव आयोग किस तरह एक साथ कराएगा विधानसभा-लोकसभा चुनाव जबकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष है

नई दिल्ली, 12 जुलाई। नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक, स्टेट लीगल एड कमेटी के कार्यकारी चेयरमैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो.भीमसिंह ने भारत के चुनाव आयोग के कानूनी सलाहकारों की बुद्धिमत्ता पर आश्चर्य प्रकट किया है, जो पिछले दो दिनों से नई दिल्ली में तकरीबन सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों एवं राज्य के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने पर लम्बी बातचीत कर रहे हैं।

प्रो.भीम सिंह ने कहा कि कई राजनीतिज्ञ और राजनीतिक विचारक आम चुनाव और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने का समर्थन कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी ने इस मामले पर अपना कोई सुझाव नहीं दिया है, क्योंकि उसको बैठक में हिस्सा लेने का निमंत्रण ही नहीं दिया गया। मुझे ऐसा लगता है कि ऐसा जानबूझकर किया गया है, ताकि जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के लोग विधानसभा सदस्यों के कार्यकाल के सम्बंध में सवाल न उठा सकें।

उन्होंने कहा कि जब शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कांफ्रेंस, जो कांग्रेस के समर्थन से सत्ता में आयी थी तो उसने राज्य विधानसभा के कार्यकाल को पांच वर्ष से बढ़ाकर छः वर्ष करने को मंजूरी दी थी और 1977 से जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छः वर्ष है। जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी ने इसका विरोध किया था, जो कानूनी तौर पर भिन्न, असंवैधानिक और जिससे राष्ट्रीय मर्यादा की अवहेलना होती है।

प्रो. भीम सिंह ने भारत के चुनाव आयोग, कानून एवं विधि मंत्रालय और विधि आयोग से सवाल किया कि क्या लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराना सम्भव है। क्या विधि एवं न्याय मंत्रालय जम्मू-कश्मीर के मतदाता भारतीय नागरिकों के साथ भेदभाव करेगी, क्योंकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छः वर्ष है, जबकि लोकसभा चुनाव पांच वर्ष में होते हैं।


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