किस धर्म में औरत को इंसान का दर्जा दिया गया है विभूति बाबू!!! सुर्खी बटोर रही पोस्ट
किस धर्म में औरत को इंसान का दर्जा दिया गया है विभूति बाबू!!! सुर्खी बटोर रही पोस्ट
मां है, बेटी - बहन है बीवी है औरतें आदमी नहीं होतीं
नई दिल्ली। सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर वरिष्ठ पत्रकार राजीव मित्तल की एक टिप्पणी सुर्खी बटोर रही है।
दरअसल राजीव मित्तल ने महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति व पूर्व पुलिस महानिदेशक विभूति नारायण राय के एक लेख के बहाने धर्म में स्त्रियों के शोषण पर करारी चोट की है।
“धर्म के नाम पर लुटती पिटती अस्मतें
विभूति नारायण राय का आज लेख पढ़ा कि कैसे प्रयाग के कुम्भ में लड़कियों और बुजुर्ग आरतों को जानबूझ कर उनके घर वाले छोड़ कर चले जाते हैं..तो या तो उनका जीवन भीख मांगते कटता है या अस्मत बेचते...
तो उन्होंने ऐसी कौन सी नयी जानकारी दे दी..ब्रांड होने के यही फायदे हैं..कुछ भी लिख दो, लपक के छपेंगे...
दुनिया में जितने धर्म हैं उनमें औरतों को लेकर उतने ही दुष्कर्म हैं...किस धर्म में औरत को इंसान का दर्जा दिया गया है विभूति बाबू!!!
रोम के ऑर्थोडॉक्स चर्च से लेकर कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात की सीमा के हज़ारों क्षेत्रों के मंदिर अय्याशी का अड्डा रहे हैं..देवताओं के लिए बाकायदा सात्विक वेश्याओं का सृजन किया गया..ग़ज़नवी के हमले के समय सोमनाथ का मंदिर वेश्याओं का अखाड़ा बना हुआ था..सभ्य लोग कहेंगे.. पापी, वो वेश्याएं नहीं नृत्यांगनाएं थीं, जो देवताओं को अपनी कला से खुश करती थीं..
जिस पीरियड में मुस्लिम आक्रांता हुआ करते हैं..उनके सारे धार्मिक विश्वास औरतों पर ही क़हर बन कर टूटते हैं..
काशी का विश्वनाथ मंदिर तो लड़कियों और औरतों की अस्मत लुटवाने में विश्व विख्यात है... और धर्मों के धार्मिक स्थल भी इस पुण्यकर्म में पीछे नहीं..
और सैंकड़ों साल से वृंदावन की गलियों में क्या हो रहा है, उसे देखने के लिए कौन से सुरमे की ज़रूरत पड़ेगी.. विधवाओं और घरों से निकाली गई औरतों का विश्व का सबसे बड़ा नारी निकेतन है...
तो विभूति बाबू अपनी जानकारी को अपडेट करो भाई... पुलिस फ़ाइल से तो रोज कई चैनल एपिसोड दिखा रहे हैं...”
राजीव मित्तल की पोस्ट पर कमेंट्स की झड़ी लग गई।
Ajay Singh ने लिखा हमाम में सब नंगे हैं सर।
Amitabha Jaiswal ने लिखा
“इस पर किसी NGO या women commission of India का ध्यान नही है। अगर हिन्दू संख्या में ज्यादा है तो इसका अर्थ सामर्थ्य नही अपितु ये है कि प्रताड़ित हिन्दू की संख्या भी ज्यादा है”
उदयभानु पानडेय ने लिखा -
“ईश्वर ने धर्म की परंपरा के साथ विवेक भी दिया है और इसी लिए हिंदू dharm ग्रंथों में neti neti कहा गया है. विवेकानंद ने कहा था कि Intelligent atheists are far better than superstitious fools who falsely believe in God. अगर एक ashram या मदरसा गलत है तो इसका मतलब यह नहीं कि सारे धर्म और मजहब खराब हैं.”
Swapnil Srivastava ने लिखा -
“धर्म एक धंधे में बदल चुका है। धर्म सियासत से जुड़ कर और भी बिकराल हो गया है। पहले भी निरापद नही था अब और भी भयावह।“
Triloki Yadav ने लिखा -
राजीव भाई साहब धर्म की सड़ांध से समाज बजबजा रहा है। शानदार लेखनी से दमदार हमला।
धर्म की क्षय हो
Noor Mohammad Noor ने लिखा -
“मां है, बेटी - बहन है बीवी है
औरतें आदमी नहीं होतीं।“
Babul Banarsi ने लिखा - दो इंच जमीं पर मरते देखा है अच्छे अच्छों को, विभूति लगाने से कोयी अवधूत नहीं बनता ?


