अखिलेश सरकार इस्तीफा दे -आइपीएफ
25-26 फरवरी को होगा लखनऊ में धरना
प्रदेश की राजनीति को बदलना होगा और परिवारवाद, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक जुनून की राजनीति से इसे बचाना होगा।
लखनऊ, 20 जनवरी। पूरे प्रदेश में किसानों से धान तक की सरकारी खरीद नहीं हुई, परिणामस्वरूप किसानों को मजबूरी में अपने धान को बिचौलियों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य से बेहद कम दाम पर बेचना पड़ा। गन्ना का पेराई सत्र शुरू हुए दो माह बीत जाने के बावजूद सरकार ने अभी तक इसका रेट तय नहीं किया है। ऐसे समय जब प्रदेश का किसान प्राकृतिक आपदा और सूखे से जूझ रहा हो, सरकार द्वारा राहत देने की बजाए उसकी उपज की खुलेआम लूट एक तरह का आपराधिक कृत्य है। वहीं सरकार खेती-किसानी को तबाही से बचाने के बजाए सैफई महोत्सव में धन की बर्बादी कर रही है। किसान तबाह सरकार सैफई महोत्सव में व्यस्त है। किसानों की इस तबाही के लिए जवाबदेह अखिलेश सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए।
यह प्रस्ताव आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) की प्रदेश ईकाई की बैठक में पारित किया गया। बैठक की अध्यक्षता आइपीएफ की प्रदेश अध्यक्ष व बीएचयू उर्दू विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 क़मर जहां ने की।
प्रस्ताव में कहा गया कि मुख्यमंत्री के इस तर्क को मान भी लिया जाए कि महोत्सव पर पार्टी फण्ड से खर्च किया गया, तो भी प्रदेश की जनता को यह जानने का हक है कि क्या पार्टी फण्ड से इस तरह के निजी आयोजन सैफई महोत्सव में अकूत धन खर्च किया जा सकता है और पार्टी में यह अकूत धन कहां से आया? यदि सैफई महोत्सव पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रम ही था तो इसमें पूरा सरकारी अमला क्यों लगा रहा?
बैठक में ‘किसान फ्रंट’ के नाम से किसान संगठन के गठन का निर्णय लिया गया, जिसकी जिम्मेदारी अजीत सिंह यादव को दी गयी। ‘किसान फ्रंट’ की तरफ से ‘खेती में निवेश बढ़ाओ-रोजगार के अधिकार की गारंटी करो‘ के नारे पर किसानों के उपज की खरीद और भुगतान की गारंटी, सूखा/आपदा में राहत की जगह मुआवजा देने, प्रदेश में हुई धान खरीद में घपले की जांच कराने, गन्ने का मूल्य निर्धारित करने और किसानों के बिजली बिल का ब्याज माफ करने सम्बंधी सवालों को लेकर आगामी 25-26 फरवरी को लखनऊ में दो दिवसीय धरना देने का निर्णय हुआ।
बैठक को संबोधित करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, चारों तरफ आशंका, भय, जुल्म और अराजकता का माहौल व्याप्त है। लोकतंत्र की संस्थाओं को बर्बाद कर दिया गया है। विरोध और अभिव्यक्ति की आवाज सरकार को कतई पसंद नहीं है। प्रदेश में न तो पूंजी बन रही है और न बाहर से आ रही है। प्रदेश के संसाधनों का सामंती अय्याशी में दुरुपयोग किया जा रहा है। खेती जो कि हमारी अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है बर्बादी के कगार पर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजनीति को बदलना होगा और परिवारवाद, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक जुनून की राजनीति से इसे बचाना होगा। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी, कृषि आधारित उद्योग, छोटे-मझोले उद्योग तथा दस्तकारी क्षेत्र के विकास से ही रोजगार सृजन और प्रदेश का वास्तविक विकास हो सकता है। इसलिए कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे जनहित के मदों पर बजट में पर्याप्त धन आवंटन की मांग आइपीएफ पुरजोर तरीके से उठायेगा।
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बैठक में पूर्व आई़.जी. व आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस.आर. दारापुरी ने प्रदेश में बढ़ रही दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सपा सरकार दलित विरोधी कार्रवाईयों में लगी हुई है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लाल बहादुर सिंह ने बैठक में आंकड़ों के साथ बताया कि मुलायम, मायावती और अखिलेश सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की विकास दर लगातार कम होती गई है और अब उत्तर प्रदेश बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से भी पिछड़ गया है। बैठक में आइपीएफ की प्रदेश सचिव नसीम खान, आर. के. अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, अजीत सिंह यादव, राधेश्याम कनौजिया, दिनकर कपूर, राजेश सचान, अखिलेश दुबे समेत विभिन्न जिलों से आये हुए प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी।