किसान संकट पर बुलाया जाए संसद का विशेष सत्र -अजीत
आइपीएफ ने भेजा प्रधानमंत्री काे पत्र
किसान का संकट देश का संकट
बदायूँ 11मई. आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) ने बड़े पैमाने पर जारी किसानाें की माैत काे संज्ञान में लेकर किसान संकट पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा कराने की मांग की है.
इस बाबत आज प्रधानमंत्री माेदी काे जिलाधिकारी बदायूँ के माध्यम से आइपीएफ के प्रवक्ता अजीत सिंह यादव ने पत्र भेजा. एक पत्र उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री काे भी भेजा गया, जिसमें किसान मुद्दे पर विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की गई.
पत्र में कहा गया है कि बदायूँ जनपद समेत उत्तर प्रदेश व पूरे उत्तर भारत में किसानाें की लगातार जारी माैतें गम्भीर कृषि संकट काे प्रदर्शित करती हैं. बेमाैसम बरसात व आेलावृष्टि से किसानाें की गेहूँ की फसल बर्बाद हाे गई .सरकाराें द्वारा दिये जा रहे मुआवजे के बाबजूद किसानाें की माैतें जारी हैं जाे साबित करती हैं कि मुआवजा किसान संकट के समाधान के लिए नाकाफी है. देश में विकास की बडी -बडी बातें हाे रही हैं लेकिन हालत यह है कि कृषि में काेई विकास नहीं हाे रहा है ,कृषि विकास दर शून्य पर आकर टिक गई है. देश- प्रदेश में पिछले पच्चीस वर्षाें से जारी आर्थिक नीतियाें के परिणामस्वरूप खेती घाटे में चली गई है .किसान बडे पैमाने पर कर्ज में डूब गये हैं .किसानाें की जेब खाली है.
प्रधानमंत्री काे भेजे पत्र काे जारी करते हुए आइपीएफ के प्रवक्ता अजीत सिंह यादव ने कहा कि किसानाें की जिन्दगी खतरे में है. किसानाें का संकट देश का संकट है .किसानाें की जारी माैताें व कृषि संकट पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा हाेनी चाहिए.
उन्हाेंने कहा कि किसानाें की जिन्दगी बचाने व किसानी काे बचाने लिए खेती काे लाभकारी बनाने व फसलाें का लाभकारी मूल्य दिए जाने की जरूरत है .
पत्र में किसान मसले पर संसद व विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने ,कृषि लागत व मूल्य आयाेग काे संवैधानिक दर्जा देने,किसानाें काे फाैरी राहत के लिए सभी कर्जे माफ करने, सहकारी खेती काे बढावा देने के लिए सुविधायें देने, किसानाें के गन्ना समेत सभी बकायाें का भुगतान करने, फसलाें की सरकारी खरीद की गारन्टी करने आदि मांगें की गई हैं.