‘कुपोषण के खिलाफ जंग‘
‘कुपोषण के खिलाफ जंग‘
‘कुपोषण के खिलाफ जंग‘ अभियान द्वारा 11 जनवरी 2014 को प्रेस क्लब, लखनऊ, आयोजित संगोष्ठी में लिया गया प्रस्ताव आज ‘कुपोषण के खिलाफ जंग’ अभियान में शिरकत कर रहे हम आंगनबाडी कर्मचारी यूनियन, आइसीडीएस सुपरवाईजर एसोसिएशन, आइसीडीएस सीडीपीओं संध, आइपीएफ, महिला पंचायत, सीआइटीयू, भारत ज्ञान विज्ञान समिति, आदि संगठनों के प्रतिनिधि सरकार से मांग करते है कि कुपोषण के प्रति माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा की जा रही चिन्ताओं का सम्मान उ0 प्र0 सरकार करें और कुपोषण के खात्में के लिए काम करने वाली आइसीडीएस योजना को एनजीओं, ठेकेदारों और माफियाओं के हवाले करने का फैसला तत्काल प्रभाव से वापस लें।
गौरतलब है कि भारत विश्व के सर्वाधिक कुपोषित देशों में एक है। हमारा देश कम वजन के बच्चों के मामले में दुनिया में पहले नम्बर पर है और अफ्रीका के देशों से भी दुगने कुपोषित बच्चे हमारे देश में है। 2011 के ग्लोबल भूख इनडेंक्स के अनुसार भारत विश्व में 15 वें नम्बर पर है। उ0 प्र0 की स्थिति भी अच्छी नहीं है हमारा प्रदेश भी देश के प्रमुख कुपोषित क्षेत्रों में है। एक सरकारी रिर्पोट के अनुसार प्रदेश में 60 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं और बच्चे कुपोषण और एनीमिया के शिकार है। कुपोषण की इस भयावह हालत से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा 1975 से समेकित बाल एवं पुष्टाहार योजना संचालित की जा रही है। इस योजना में मुख्यतः नवजात शिशुओं, 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती व धात्री महिलाओं को कुपोषण से बचाने हेतु पूरक पोषाहार, हाट कुक मील आदि दिए जाते है। उ0 प्र0 में यह सारी योजना भ्रष्टाचार, माफिया गिरोह और एनजीओं की भेट चढा दी गयी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना करते हुए प्रदेश में पोषाहार का सम्पूर्ण टेण्डर दिल्ली-नोएड़ा के एक घराने को सौपं दिया गया। इस पोषाहार के सम्बंध में मंत्री तक ने स्वीकार किया है कि इसे जानवर भी खाने से इंकार कर देते है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बच्चों को दिए जाने वाले हाट कुक भोजन को कमीशनखोरी के लिए पूरे प्रदेश में मौजूदा सरकार एनजीओं को देने में लगी है। प्रदेश में आंगनबाडी केन्द्रों पर न्यूनतम बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का अभाव है। कमरतोड़ महंगाई के इस दौर में उ0 प्र0 में आइसीडीएस योजना को जमीनीस्तर पर लागू करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं का महज 3000 और 1500 रूपए मानदेय देकर उन्हें खुद कुपोषित जीवन जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि इनके मानदेय को दुगना करने का वायदा मुख्यमंत्री महोदय ने सरकार बनने के बाद खुद किया था। सुप्रीम कोर्ट तक ने इस पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है और सरकार से इस सम्बंध में कार्रवाही हेतु कहा है।
यह गोष्ठी सरकार से मांग करती है कि वह हाट कुक योजना का एनजीओकरण करना बंद करें, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार पोषाहार निर्माण का काम स्थानीय महिला ग्रुपों और स्थानीय निवासियों को दिया जाए, आगंनबाडियों को कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और जब तक यह न हो उन्हें 10000 रूप्ए मानदेय दिया जाएं, हर आगंनबाड़ी केन्द्र पर न्यूनतम बुनियादी जरूरतों जैसे अपना भवन, पीने का पानी, बच्चों के बैठने व खेलने की व्यवस्था, ईधन, शौचालय आदि की व्यवस्था की जाए। यह गोष्ठी संकल्प लेती है प्रदेश को कुपोषण मुक्त कराने के लिए आवश्यक उपयुक्र्त महत्वपूर्ण सवालों पर पूरी ताकत से अभियान चलाते हुए फरवरी माह में लखनऊमें बड़ा प्रदर्शन किया जायेगा।
विचार गोष्ठी को प्रमुख रूप से हिन्द मेडिकल कालेज के प्रधानाध्यापक डा वी0 के0 श्रीवास्तव, पीयुसीएल की प्रदेश महासचिव वंदना मिश्रा, आइपीएफ के प्रदेश संगठन प्रभारी दिनकर कपूर, सीटू के प्रदेश अध्यक्ष आरएस वाजपेई, महिला पंचायत व सुपरवाइजर एसोसिएशन की प्रांतीय अध्यक्ष रेनू शुक्ला, सीडीपीओ संध के अध्यक्ष अरूण पाण्डेय, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के संजीव सिन्हा, आगंनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की करूण चैधरी, रजनी, माधुरी, गीता सैनी, दिलीप शुक्ला, कमलाकांत आदि ने अपने विचार रखे। गोष्ठी का संचालन आगंनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की प्रदेश महामंत्री वीना गुप्ता ने किया।
(वीना गुप्ता)
महामंत्री


