लखनऊ। प्रदेश में बिजली संकट के नाम पर भारतीय जनता पार्टी के आन्दोलन को समाजवादी पार्टी ने अनुचित और राजनीति से प्रेरित बताया है।
राज्य सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार विद्युत आपूर्ति करने में लगभग 11800 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है उसके विरूद्ध उपभोक्ताओं के 11572 मेगावाट की बिजली उपलब्ध करायी जा रही है। इस बिजली में केन्द्रीय सेक्टर से लगभग 4500 मेगावाट की बिजली मिल रही है और शेष 7072 मेगावाट की बिजली प्रदेश सरकार अपने स्रोतों से उपलब्ध करा रही है। इनमें लगभग 3000 मे0वा0 प्रदेश के तापीय बिजली घरों से उत्पादित हो रही है और बाकी बिजली बजाज इनर्जी, लैन्को, रोजा, कोजनरेशन तथा द्विपक्षीय एवं इनर्जी एक्सचेन्ज के माध्यम से क्रय करके दी जा रही है। द्विपक्षीय, बैंकिंग एवं इनर्जी एक्सचेन्ज से लगभग 15 करोड़ की नगद बिजली रोज क्रय करके उपलब्ध करायी जा रही है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि इस समय बिजली का निर्धारित शेड्यूल की आपूर्ति के लिए 267 मिलियन यूनिट की आवश्यकता है जिसके विरूद्ध 262 मिलियन यूनिट प्रतिदिन बिजली आपूर्ति हो रही है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से प्रदेश में आन्दोलन करने के बजाय यह सुझाव दिया है कि वे केन्द्र सरकार में, जहां उनकी सरकार है, वहीं जाकर धरना प्रदर्शन करें और यह मांग करें कि प्रदेश सरकार का जो कोटा 6082 मे0वा0 है उसके विरूद्ध कुल 4402 मे0वा0 बिजली ही क्यों उपलब्ध हो रही है। इस तरह लगभग 1500 मे0वा0 से भी अधिक की बिजली जो केन्द्रीय सेक्टर से प्रदेश को आवांटित है, नहीं मिल पा रही है। यदि यही बिजली मिल जाये तो गांव-देहात को 12 घण्टे से बढ़ा कर 14 घण्टे बिजली दी जा सकती है। श्री चौधरी ने इस कमी का असली कारण केन्द्र से न मिल पाने वाले कोटे की बिजली को बताया है और यह मांग की है कि उत्तरी ग्रिड के अन्य राज्य जिनका कोटा उनके निर्धारित खपत से अधिक है उसमें से काट कर प्रदेश को कम से कम निर्धारित कोटे की बिजली जरूर उपलब्ध करायी जाये। उन्होंने केन्द्र से यह भी मांग की है कि केन्द्र के पास बड़ी मात्रा में विभिन्न केन्द्रीय परियोजनायें में अनएलोकेटेड पावर उपलब्ध है उसमें से प्रदेश को बिजली उपलब्ध करायी जाये जिससे इस गर्मी में अधिक से अधिक विद्युत आपूर्ति प्रदेश में की जा सके।
सपा प्रवक्ता के मुताबिक इस समय गांव और तहसीलों को 12 घंटे, जनपदीय स्तर टाउन को 15 घंटे, मण्डल मुख्यालयों को 19 घंटे और महानगरों को 20 घंटे से अधिक बिजली उपलब्ध करायी जा रही है। वाराणसी में पिछले 4 दिनों में बीती रात को छोड़कर लगातार 3 दिनों तक अनवरत 24 घंटे बिजली उपलब्ध करायी गयी है। उन्होंने बताया कि हो सकता है कि कहीं ब्रेकडाउन आदि के कारण बिजली प्रभावित रही हो।
श्री चौधरी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने गत मार्च महीने में लगभग 1000 मेगावाट का क्रय करार भारत के पश्चिमी राज्यों से किया था परन्तु केन्द्र सरकार से वेस्टर्न ग्रिड में कॉरिडार का कन्जेशन बताकर बिजली लाने से मना कर दिया। इस कॉरिडार की क्षमता 4200 मे0वा0 थी जिसे ग्रिड के सुरक्षा के नाम पर घटाकर 3700 मे0वा0 कर दिया गया यही कारण था कि पश्चिमी भारत से मार्च महीने में खरीदी गयी बिजली प्रदेश नहीं लायी जा सकी। यही नहीं कोल इण्डिया लि0 से जो कोयले का आवंटन प्रदेश की अनपरा और लैन्को परियोजना के लिये थी वह पूरी मात्रा में नहीं मिल पा रहा है जिससे इस परियोजनाओं से 400 मेगावाट की बिजली कम उत्पादित हो पा रही है।
श्री चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के निर्देश पर बुधवार को प्रदेश भर के मुख्य अभियन्ताओं को लखनऊ तलब कर यह निर्देश दिया है कि प्रत्येक मुख्य अभियन्ता अपने क्षेत्र में, जहां उसका मुख्यालय है रात्रि 12 बजे तक अपने अन्य अधीनस्थ अधिकारियों और अवर अभियन्ताओं के साथ मौजूद रहें और यदि कोई ब्रेक डाउन होता है कि उसे तत्काल अटेन्ड करवायें। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि अधिकारियों और अवर अभियन्ताओं के फोन बन्द मिले और उसकी शिकायत सही पायी गयी तो उनके विरूद्ध सीधे निलम्बन की कार्यवाही की जाये। उन्होंने पाचों डिस्काम के प्रबन्ध निदेशकों को हिदायत दी है कि किसी भी हालत में बिजली की आपूर्ति का जो शेड्यल है उसे लागू किया जाये जिससे उपभोक्ताओं को न्यूनतम् असुविधा हो। बीती सांयकाल पावर कारपोरेशन के चेयरमैन कामरान रिजवी एवं प्रबन्ध निदेशक ए0पी0 मिश्रा को 5 कालीदास मार्ग पर बुलाकर जरूरी हिदायत दी और उन्हें प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुचारू बनाये रखने के निर्देश दिये।