कॉमरेड गोविंद पानसरे नहीं रहे
कॉमरेड गोविंद पानसरे नहीं रहे
कॉमरेड गोविंद पानसरे को लाल सलाम !
निशाना बनाए जाने के पंद्रह दिन पहले ही कॉमरेड गोविंद पानसरे को धमकियां मिली थीं कि वह नाथूराम गोडसे के खिलाफ़ बोलना बंद करें, नहीं तो...
नई दिल्ली। किसानों, ग़रीबों, गन्ना किसानों, सामाजिक और आर्थिक पिछड़ों के लिए 60 वर्षों से अधिक लड़ने वाले कॉमरेड गोविंद पानसरे नहीं रहे। उन्होंने बीती रात आखिरी सांस ली।
बहादुर निर्भीक, अन्धविश्वास के खिलाफ लड़ते हुए सच का झंडा लहराते हुए कामरेड गोविंद पानसरे साम्प्रदायिकता, आतंक और नफरत के शिकार हुए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजानने बताया कि कामरेड गोविन्द पानसरे २० फरवरी को मुंबई के कैंडी अस्पताल में रात साढ़े आठ बजे हम सब को अपना आखरी सलाम कह कर चले गए। कामरेड पानसरे की स्मृति को नमन और लाल सलाम करते हुए श्री अंजान ने बताया कि 21 फरवरी को दोपहर 12 बजे अंतिम संस्कार कोल्हापुर महाराष्ट्र में होगा। उन्होंने कहा हम सब मिल कर कॉमरेड गोविंद पानसरे की स्मृति में सभा करें उन्हें याद करें और साज़िशों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करें।
बता दें, गोविंद पानसरे इस समय टोल के विरुद्ध आंदोलन चला रहे थे। उन पर बीते दिनों जानलेवा हमला किया गया था, जब वे अपनी पत्नी के साथ मॉर्निंग वॉक कर रहे थे।
कॉमरेड अतुल कुमार अंजान ने कहा- "The killers of Com.Govid Pansare has committed a heinous crime against the people who believe in justice and pro people democracy."
वरिष्ठ साहित्यकार और विश्वविद्यालय शिक्षकों के नेता मोहन श्रोत्रिय ने कहा-
"निशाना बनाए जाने के पंद्रह दिन पहले ही उन्हें धमकियां मिली थीं कि वह नाथूराम गोडसे के खिलाफ़ बोलना बंद करें, नहीं तो...
कॉम. पानसारे अंधविश्वास फैलाने वाले तत्वों तथा सांप्रदायिक हिंदुत्ववादियों के खिलाफ़ निरंतर संघर्ष करते रहे थे, आख़िरी क्षण तक!
गोडसेवादियों की यह हरक़त निंदनीय है! सरकार नाम की कोई चीज़ होती महाराष्ट्र में, तो अपराधियों के खिलाफ़ कार्रवाई हो गई होती!
दाभोलकर के अनन्य साथी कॉम. पानसारे कथनी और करनी की अटूट एकता का मूर्तिमान रूप थे!"


