कोई लघु पत्रिका अपने समय के सही सवालों से टकरा कर ही सार्थक हो सकती है- शम्भूनाथ
कोई लघु पत्रिका अपने समय के सही सवालों से टकरा कर ही सार्थक हो सकती है- शम्भूनाथ
“बनास जन” के “ओमप्रकाश वाल्मीकि अंक” का लोकार्पण
गणपत तेली
नई दिल्ली। विश्व पुस्तक मेले में हिंदी की लघु पत्रिका 'बनास जन' के ओमप्रकाश वाल्मीकि पर प्रकाशित विशेषांक का लोकार्पण हुआ।
शब्द संधान प्रकाशन के तत्वावधान में हुए एक संक्षिप्त आयोजन में युवा आलोचक और दलित लेखन को समर्पित डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी ने इस अंक का लोकार्पण किया। तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि बनास जन ने एक जरूरी काम को ठीक समय पर किया है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। तिवारी में अंक में भँवरलाल मीणा द्वारा लिए गए सुदीर्घ साक्षात्कार को उपलब्धि बताया।
आयोजन की अध्यक्षता कर रहे कोलकाता से आये वरिष्ठ आलोचक शम्भूनाथ ने कहा कि अपने समय के सही सवालों से टकरा कर ही कोई लघु पत्रिका सार्थक हो सकती है।
इस अवसर पर राजस्थान से आये वरिष्ठ कवि सदाशिव श्रोत्रिय, संवेद के सम्पादक किशन कालजयी, पक्षधर के सम्पादक विनोद तिवारी, चौपाल के सम्पादक कामेश्वर प्रसाद सिंह, कथन की सम्पादक संज्ञा उपाध्याय, युवा कवि अशोक कुमार पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में लेखक और पाठक उपस्थित थे।
अंत में बनास जन के सम्पादक पल्लव ने सभी का आभार मानते हुए कहा कि इस अंक को प्रकाशित कर बनास जन की पूरी टीम गहरे संतोष का अनुभव कर रही है।


