कोल इण्डिया छुपा रहा है कोयला भण्डार के सच को
कोल इण्डिया छुपा रहा है कोयला भण्डार के सच को
सेबी में ग्रीनपीस ने दर्ज करायी शिकायत
मुंबई 23 सितम्बर। वैश्विक गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस ने अपने शोध में पाया है कि दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादन करने वाली कम्पनी कोल इण्डिया सम्भावित शेयरहोल्डरों से अपने कोयला भण्डार के सच को छिपा रही है। वहीं कोल इण्डिया अपने अतिरिक्त शेयर को अन्तर्राष्ट्रीय निवेशकों को बेचने की तैयारी भी कर रही है। "कोल इण्डियाः रनिंग ऑन इम्पटी" रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार कोल इण्डिया ने अपने आन्तरिक आकलन को शेयर बाजार में जाहिर नहीं किया है जिसमें दिखाया गया है कि 2010 में कम्पनी ने जितना निष्कर्षण योग्य कोयला भण्डार दिखाया है उससे 16 % कम भण्डार ही उपलब्ध है, यह भारतीय शेयर बाजार के नियमों का उल्लंघन है। अभी भी कोल इण्डिया अपने वेबसाइट पर दावा करती है कि उसके पास 21.7 बिलियन टन निष्कर्षण योग्य कोयला भण्डार है। कम्पनी के आन्तरिक दस्तावेजों के समीक्षा में ग्रीनपीस और इंस्टीच्युट फॉर इनर्जी इकोनोमिक्स एंड फाइनेंशियल एनलिसिस (IEEFA) ने दिखाया है कि संयुक्त राष्ट्र रिजर्व वर्गीकरण सिस्टम के अनुसार कम्पनी के पास सिर्फ 18.2 बिलियन टन निष्कर्षण योग्य कोयला भण्डार ही उपलब्ध है। निर्धारित उत्पादन लक्ष्य के हिसाब से यह भण्डार सिर्फ 17 साल में ही समाप्त हो जायेगा।
ग्रीनपीस इण्डिया ने कोयला भण्डार के बारे में सही अनुपात को छिपाने के बारे में कोल इण्डिया के खिलाफ इण्डियन सिक्योरिटी कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन एक्ट 1956 के तहत भारतीय शेयर बाजर नियामक के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज करवायी है।
ग्रीनपीस के आशिष फर्नांडिस ने इन निष्कर्षों पर कहा कि “कोल इण्डिया अपने निष्कर्षण योग्य कोयले के सच को छुपा कर अपने वर्तमान और सम्भावित शेयरहोल्डरों को धोखा देने का प्रयास कर रही है। कोल इण्डिया का यह कानूनी कर्तव्य है कि वो लोगों को सच बताये लेकिन ऐसा करने में वो असफल रहा है”।
सुप्रीम कोर्ट के वकील शौनक कश्यप ने कहा कि “कोल इण्डिया संवैधानिक प्रावधानों को विशेष रुप से सेबी अधिनियम, सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स रेगुलेशन अधिनियम 1956 के तहत सूचीबद्ध करार और सेबी के तीन अप्रैल, 2006 के परिपत्र के अधीन तथ्यों का खुलासा करने का उल्लंघन कर रहा है। यह मामला इसलिये भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अपने भण्डार के बारे में सूचित करने में एक सरकारी नियन्त्रण की कम्पनी असफल रही है, जिसका निवेशकों और बड़े पैमाने पर देश दोनों के लिये गम्भीर प्रभाव पड़ता है”।
कोल इण्डिया ने अपने नये शेयर ऑफर को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने के लिये बैंक ऑफ अमरीका, ड्यूशचे बैंक, गोल्डमैन सैक्स, क्रेडिट सुइस जैसे दुनिया के बड़े बैंकों के साथ करार किया है जबकि यूनियन द्वारा शेयरों को बाहर भेजने पर हड़ताल की धमकी भी दी गयी है। वहीं हाल के हफ्तों में कम्पनी के शेयर गिरे भी हैं। साथ ही, इन बैंकों की भी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि कम्पनी के भण्डार से सम्बंधित सही तथ्यों को निवेशकों के सामने लाया जाये।
कोल इण्डिया के भण्डार के बारे में नये आँकड़ों ने सरकार द्वारा कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में निवेश करने की मौजूदा नीति का पालन करने की क्षमता पर भी सन्देह पैदा कर दिया है। फिलहाल कोल इण्डिया देश का लगभग 80% कोयला उत्पादन कर रहा है और भारत साल 2017 तक 100,000 मेगावाट नये कोयला ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र लगाने की योजना बना रहा है जबकि कम्पनी वर्तमान बिजली संयंत्रों को ही आपूर्ती करने में संघर्ष कर रही है। परिणामतः बढ़ता कोयला आयात ने भारत के बढ़ते चालू खाते और बढ़ती बिजली दरों में भी भूमिका अदा कर रहा है।


