क्या आप नीलू को जानते हैं.....?
क्या आप नीलू को जानते हैं.....?
मेरी दिली इच्छा है, एक रोज मैं नीलू को सैल्यूट मारूं
क्या आप नीलू को जानते हैं..? नहीं ना..? नीलू 27 साल की लड़की है। आदिवासी है और मध्यप्रदेश के बालाघाट में रहती है। मां नहीं है नीलू की, सिर्फ पिता हैं। मेरी किसी महिला मित्र ने नीलू को मेरा नंबर दिया, जो मेरे प्रोफाइल पर हमेशा उपलब्ध रहता है। उन महिला मित्र का जिक्र करना इसलिए जरूरी नहीं समझता क्योंकि उन्होंने यह काम निष्काम किया और मैं उन्हें सार्वजनिक करने की जुर्रत नहीं कर सकता।
फोन नंबर सार्वजनिक करने के पीछे मकसद सिर्फ इतना है, ताकि इंसानियत की खिदमत के लायक मुझे यदि कोई समझे तो मैं किसी काम आ सकूं और अपना मानव जीवन कुछ अंश तक सार्थक कर सकूं। यह मेरा निजी स्वार्थ है, और इसे मैं स्वीकार करता हूं।
नीलू दिन भर बांस से टोकरियां बनाती है और फिर उन्हें बेच कर दिन में सौ, सवा सौ रुपए कमा लेती है। और हां, नीलू पढ़ती भी है। कोई महीने भर पहले नीलू से बात हुई तो उल्लासित नीलू ने बताया कि वह "मध्य प्रदेश प्रांतीय सेवा की प्रारंभिक परीक्षा" दे रही है। और आज जब फोन आया तो नीलू ने बताया कि उसने "प्रारम्भिक परीक्षा" पास कर ली है।
"आदिवासियों और आरक्षित वर्ग" के लिए भारत सरकार के चलाए जा रहे कोचिंग में नीलू शामिल नहीं हो सकती क्योंकि नीलू को दिन भर खटते हुए अपने परिवार का भी पेट भरना है। और यह दीगर है कि जंगल विभाग के भ्रष्ट अधिकारी, गिरोहों को आठ-दस रुपए में हरे बांस काटने देते हैं और ईमानदार-मेहनतकश नीलू को यह बांस तीस रुपए का एक पड़ता है। पिछले दस सालों से बालाघाट इलाके में बांस की बनी टोकरियों की कीमत 10 से 12 रुपए पर ही अटकी हुई है। यह एक बड़ा सवाल है पर यह कभी भारतीय मीडिया का हिस्सा नहीं बनेगा...यह मैं मीडिया के अनुभव पर कह रहा हूं।
नीलू ने फोन पर मुझसे कुछ गुजारिश की है, जिसे मैं अपने संवेदनशील और मानवीय मित्रों से बांटना चाहता हूं। नीलू को तत्काल "समाजशास्त्र", "पब्लिक एड", "सामान्य अनिवार्य हिंदी" और "सामान्य ज्ञान" पर सामग्री चाहिए...ताकि वो अपने ख्वाब को मुकम्मल ठौर तक पहुंचा सके।
"इलाहाबाद यूनिवर्सिटी" के छात्रों और इलाहाबाद में रह कर प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी में जुटे मित्रों, और फेसबुक से संपर्क आए तमाम जाने-अनजाने मित्रों से मैं करबद्ध प्रार्थना करता हूं कि क्या आप इंटरनेट पर मध्य प्रदेश पीसीएस का सेलेबस देख कर अपने नोट्स में से छांट कर स्तरीय सामग्री नीलू तक पहुंचवाने की व्यवस्था कर सकते हैं...? क्या अपने जीवन के कुछ घंटे नीलू के लिए निकाल सकते हैं आप में कुछेक मित्र ?
मैं जानता हूं छात्र जीवन बेहद कठिन होता है..आर्थिक तंगी हमेशा लगी रहती है, सो मैं और मेरे कुछ मित्र नीलू के लिए इन सामग्रियों फोटोकॉपी और यदि खरीदनी पड़े तो खर्च भी वहन करने को तैयार हैं। जो सीधे नीलू का सहयोग करना चाहते हैं, वो इनबॉक्स में मुझसे नीलू का नंबर ले सकते हैं। लेकिन यह ध्यान रखें कि नीलू को आपको फोन ना करना पड़े...क्योंक एक-दो रुपए भी नीलू की जिंदगी में बेहद अहम हैं। फोन आप खुद कीजिएगा।
आपकी असीम अनुकंपा होगी यदि यहां मुझे ब्राह्मण मनुवादी ना समझे और नीलू को आरक्षित कोटे का आदिवासी ना मानें....सिर्फ इंसानियत और मानवता की बुनियाद पर यदि सहयोग करना चाहें तो मैं निजी तौर पर आप मित्रों का ताजिंदगी कर्जदार रहूंगा। और यदि ऐसी कोई ग्रंथी आपके दिमाग में है तो कृपया इस पोस्ट से दूर ही रहें। मुझे या नीलू को आपका उपकार नहीं चाहिए...कतई नहीं।
बस ध्यान रखिएगा, नीलू के सामने मदद शब्द का इस्तेमाल मत कीजिएगा..यह बोलिएगा कि मैं तेरा बड़ा भाई हूं और बहन का कर्ज उतार रहा हूं। वरना खुद्दार नीलू आपको खारिज करते तनिक भी देर ना करेगी।
नीलू, मेरी दिली इच्छा है, एक रोज तुम अफसर बनों और मैं तुम्हें सैल्यूट करूं। तुम्हारी आंखों की चमक उस दिन शायद मुझे रुला ही दे......आमीन
O- सुमंत भट्टाचार्या
सुमंत भट्टाचार्या की फेसबुक वॉल से साभार


