अंकुर मिश्र
दुर्घटनाओ से ग्रसित हिंदुस्तान में चुनावो की श्रंखला की शुरुआत हो चुकी है, और इस श्रंखला में कई राज्यों के चुनाव पंक्तिबद्ध है, और पुरातन राजनीति के अनुसार चुनाव प्रचार की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, चुनाव देश के हैं, सरकार देश व् प्रदेश के लिए बननी है, और उसमे प्रमुख भागीदारी भी जनता की है और उसी को चुनना है कौन हमें चलाएगा, इन सबके बावजूद राजनेताओ का मुद्दा कुछ अलग ही दिखाई दे रहा है, दुनिया का सबसे बड़ा “लोकतंत्र” भारत देश में है, दुनिया की सबसे बड़ी राजनीति भारत में होती है लेकिन इसका सबसे बड़ा खोखला-पन भी दुनिया में धीमे-धीमे प्रसिद्द होता जा रहा है !

दुनिया का हर देश एक ही मुद्दा रखता है “विकास” !!

कहने को तो ये मुद्दा भारत में भी है और राजनेताओ की सुने तो वो कहते भी है कि हमारी पार्टी देश के “विकास” को लेकर बहुत चिंतित है लेकिन यह वाक्य कितने सही है और कितने गलत ???? ये यहाँ का कोई भी निवासी बता सकता है! यह किसी विशेष राजनैतिक दल की बात नहीं है भाजपा हो !! कांग्रेस हो !! माकपा हो !! सपा हो !! बसपा हो !! या और कोई सा भी राजनैतिक दल सभी के चुनाव के पहले या बाद की प्रक्रियाये एक ही तरह की होती है ये हम जनता को भी पता है !

आज की राजनीति ही देख लो चुनाव प्रचार की रैलियां जोरो पर है, चुनाव प्रचार के ऐसे सहारे लिए जाते जो वास्तव में अतुलनीय है! पार्टी प्रवक्ता या पार्टी प्रचारक प्रचार में “विकास” शब्द छोड़कर बाकी सभी अशोभनीय शब्दों का प्रयोग करते हैं, एक दूसरे के ऊपर आरोपो का प्रत्यारोपण जिनसे जनता का कोई मतलब नहीं है !! एक कहेगा “क्या उसने “मुझे” ये कहा तो ये ले मेरा “जवाब” ! जवाब की उस भाषा में होगा जो ये सिद्ध कर देता है कि हमारे राजनेता कितने “शिक्षित” है! वैसे भी भारतीय लोकतंत्र में ये नियम “पास” हो चुका है कि कोई भी “क्रिमिनल” चुनाव लड़ सकता है अब इस भाषा से ये भी सिद्ध होता है कि कोई भी “असभ्य” चुनाव लड़ सकता है!!

क्या किसी राजनैतिक पार्टी का मुद्दा "विकास" भी है या फिर सबका एक ही मुद्दा है एक दूसरे के ऊपर पलटवार ??

क्या कोई उस 99% जनता की भी बात करेगा जो कुल संपत्ति के 1% में पल रही है या फिर उन्ही 1% की बात करोगे जो 99% संपत्ति के मालिक है ??
क्या अपने विकास की चिंता को छोड़कर 125 करोड़ लोगो के विकास के बारे में नहीं सोच सकते ??

अरे देश के आकाओ आखिर देश की जनता को समझते क्या हो ??

क्या भूल गए वो एक बार जग गई तो भारत हिल जायेगा, चुनाव में सम्भलियेगा जरा कही जनता जग न जाये और आपका विकास रुक न जाये ??