क्या नाम देंगे इन इंसानी मौतों पर हंसने वालों को
क्या नाम देंगे इन इंसानी मौतों पर हंसने वालों को
वसीम अकरम त्यागी
दिल्ली के चिड़िया घर में हुऐ हादसे पर मजाक उड़ाने वालों को आप क्या नाम देना चाहेंगे ? सफेद बाघ को भाजपाई, आरएसएस, वीएचपी का नाम देने वालों, और मरहूम मकसूद को संप्रदाय विशेष से जोड़ने वालों को आप क्या नाम देना चाहेंगे ? क्या नाम देना चाहेंगे मकसूद की मौत पर खिलखिलाकर हंसने वालों को ? क्या नाम दोगे उन ‘इंसानों’ को जिनकी फेसबुक दीवारें केवल मकसूद की दर्दनाक मौत का मजाक उड़ा रही हैं। गलती बाघ की थी या मकसूद की, या फिर वीडियो बनाने वाले, व चिड़िया घर के कर्मचारियों की यह एक अलग विषय है। विषय यह है कि मृतक का मजाक उड़ाया जा रहा है और किसलिये उड़ाया जा रहा है यह भी आप समझते हैं ?
हम कैसे समाज में जीते हैं जहां लाशों से भी हमदर्दी नहीं। सांप्रदायिक होते सामाजिक परिवेश ने युवा पीढ़ी के दिमागों में कैसा जहर ठूंसा है इसका अंदाजा कश्मीरी, और कल चिड़िया घर में मकसूद की मौत पर हंसने वालों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। मंगल पर पहुंच गये इतराईये मत। इतराने का हक उसी को है जिसने इंसानों को सिर्फ इंसान समझा है हिंदू या मुसलमान नहीं।
मुझे मोर की कहानी याद आती है जब वह जंगल में नाचता है और नाचते हुऐ उसकी नजर अपने गंदे पैरों पर पड़ती है तो रोना शुरु कर देता है। हमारी कहानी भी कुछ वैसी ही है जब हम मंगल गृह से जमीन पर इंसानी मौतों पर हंसने वालों को देखते हैं तो हमारे पास भी सिवा आंसू बहाने के और कुछ नहीं होता। हैरान हूं कि रोऊं या पीटूं जिगर को मैं।
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