क्या पठानकोट मोदी और नवाज की मुलाकात का रिटर्न गिफ्ट है ?
क्या पठानकोट मोदी और नवाज की मुलाकात का रिटर्न गिफ्ट है ?
नवाज को यह साबित करना होगा कि पठानकोट आखिरी हमला है और मोदी को यह सुनिश्चित करना होगा 7 जवानों की मौत आखिरी कुर्बानी।
कारगिल की याद दिला देता है पठानकोट आतंकी हमला
मोदी और नवाज की मुलाकात को जादुई छड़ी समझना भूल होगी। एक अचानक की मुलाकात से सब कुछ तुरंत बदलने की उम्मीद बेमानी है।
महेंद्र मिश्रा
इस घटना को आतंकवादियों की हताशा भरी कोशिश या फिर पाकिस्तान की अंदरूनी समस्या को आखिरी बार भारत की ओर मोड़ने के हिस्से के तौर पर देखा जा सकता है। लेकिन एक बात तय है कि जनमत के खिलाफ जाकर यह बहुत दूर तक नहीं चल सकता है। क्योंकि बड़े से बड़े तानाशाह के लिए भी जनमत की अनदेखी करना मुश्किल होता है। अनायास ही नहीं घटना के तुरंत बाद पाक सरकार ने घटना की जमकर मजम्मत की।
इस मामले में सवाल दोनों देशों के रिश्तों को बढ़ाने की प्रक्रिया को लेकर है। क्या पाकिस्तान को लेकर भारत सरकार की कोई नीति है? अगर कोई है तो उसका क्या खाका है? और उसको बढ़ाने के लिए किस तरह की प्रक्रिया ली जा रही है? इतनी बड़ी समस्या को इतने हल्के तरीके से हल करने की कोशिश कई सवाल खड़े कर देती है। मोदी और नवाज की मुलाकात को जादुई छड़ी समझना भूल होगी। एक अचानक की मुलाकात से सब कुछ तुरंत बदलने की उम्मीद बेमानी है। एक पूरा देश है उसकी करोड़ों करोड़ जनता है। पूरा एक तंत्र है। आपके विदेश मंत्री तक को आप की यात्रा की जानकारी नहीं होती। नवाज को भी क्रिसमस की छुट्टी पर गए अपने सुरक्षा सलाहकार को बुलाना पड़ता है। क्या ऐसी किसी एक आसमानी पहल से सब कुछ हासिल हो जाएगा? किसी समस्या को हल करने में जब पूरा एक तंत्र जुटता है तो उसके साथ ही दोनों तरफ एक माहौल भी बनना शुरू हो जाता है। इस प्रक्रिया में शासन तंत्र से लेकर पूरी व्यवस्था मिलकर जब आगे बढ़ती है तो साथ-साथ वह जनता की जेहनियत भी तैयार कर रही होती है। ऐसे दौर में जबकि जनता आतंकवाद के खिलाफ हो और सरकार की भी यह जरूरत हो तब इस काम को करना आसान हो जाता है। इस कड़ी में अगर शासन तंत्र का कोई हिस्सा अपने निहित स्वार्थ में आतंकवाद का समर्थन कर रहा हो तो उसको चिन्हित करना और फिर उसे अलग-थलग करना आसान हो जाता है। और अगर आतंकवाद का खात्मा दोनों देशों की जनता और सरकारों की जरूरत बन गया है तो उसको किसी तीसरे के लिए बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए इस घटना को भी अचानक हुई मुलाकात की प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखा जा सकता है।


