जुगनू शारदेय

आपको यह जानकर अत्यंत ही प्रसन्नता और हर्ष होगा कि देश के विदेश बिहार में विदेश के देश इंडिया के सौजन्य से एक नया पी जे थॉमस जन्म ले चुके हैं । सनसनी खेज पत्रकार , खोजी पत्रकार – और सिर्फ हमारे चैनल पर ही वाले लोग अभी से तैयारी कर रखें । ऐसा न हो कि फिर किसी नेता को कोर्ट में जा कर कहना पड़े कि बड़ा अन्याय हुआ है । दोस्तों चूक जाओगे । अभी से खास खबर के लिए तैयार रहो । यह और बात है कि अच्छा पत्रकार कभी तैयार नहीं रहता । उसका काम ने राम ने कहा कि सीता को आम बहुत पसंद था या सीता ने कहा कि राम को आम बहुत पसंद था ।
तो खास खबर यह है कि हमारे महान इंडिया के नियम – कायदे खुल्लम खुल्ला प्यार करने दें या न दें , जुगाड़ करने देते हैं । बशर्ते आप भारतीय
प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं । जैसे पी सी थॉमस कि उन पर कोई मुकदमा चलाने की अनुमति ही नहीं दे रहा है । नतीजतन एक दम पाक साफ हो कर बरास्ता भारत सरकार के मंत्रालय के सचिव बन ही गए केंद्रीय मुख्य सतर्कता आयुक्त । अब यह अवसर देश के विदेश बिहार को मिलने वाला है । निर्वहन कुमार की सारी चतुराई इंडिया सरकार की थेथरई के सामने यह साली अफसरी हो जाता है ।
तो मेहरबान – कदरदान – पानदान – उगालदान ( खानदान सबके पास है ) और तरह तरह के दान के साथ पेश है किस्सा ऐय्यार के. संतील कुमार , भारतीय प्रशासनिक सेवा का । कभी यह अपार्टमेंट के स्लम पटना नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारी हुआ करते थे । यह जानकारी तो है ही आपको भ्रष्टाचार की बुनियादी ट्रेनिंग नगर निकायों में ही होती है । जब से देश गांव गांव हुआ है तो यह प्रशिक्षण पंचायत स्तर पर भी मिल जाता है । जिला विकास अधिकारी लगभग इसका कुलपति होता है । लेकिन नगर निगम का प्रशासनिक अधिकारी कुलाधिपति जैसा होता है ।
अब सोचिए संतील कुमार के बारे में इन्होने नीतीश कुमार के कार्यकाल 2009 – 2010 में कारीगरी दिखला दी । वित्तीय अनियमितता तो भ्रष्टाचार के लिए या जालबट्टा तुड़ीबाजी के लिए सम्मानजनक शब्द है । तब नीतीश कुमार निर्वहन कुमार नहीं बने थे – मिस्टर टाइड थे । यह किसने उनके कुरते में दाग लगाने की कोशिश की । यहां तो यह भी नहीं था कि कुछ अच्छा होता है तो दाग अच्छे हैं । नीतीश कुमार को भी स्लम पसंद नहीं हैं । यह और बात है उनकी नीतियों से पटना या तो स्लम बनता जा रहा है या इक्कसवीं सदी का बुद्ध समृति ।
तो खैर संतील साहब का, साहब ही न कहा जाता है बड़े अफसरों को , किस्सा बड़ा निराला है । कभी ऐयार की तरफ गायब हो गए तो कभी गिरफ्तार हो गए । जेल वेल भी गए । इससे उन्हें भविष्य में चुनाव लड़ने में सहायता मिलेगी । सब कुछ हुआ , पर कुछ न हुआ । आखिर उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति तो भारत सरकार को ही देनी है । कितने जरूरी भ्रष्टाचार के मामले भारत सरकार के सामने हैं । फिर मामला किसी फद्दु प्रसाद का नहीं साहब का । यह लद्दु प्रसाद इतना तेज कि केंद्रीय प्रतिनियुक्त पर दिल्ली चला गया । जाहिर है इसने दिल्ली में साबित किया होगा कि बिहार के विशेषज्ञ हैं । मगर कमाल है दिल्ली का वापस उन्हें पटना भेज दिया गया । अब उनका काम जनगणना की तैयारी करना है । वह उसके बिहार के निदेशक हैं । आशा है बिहार की जनगणना पटना का स्लम बने या न बने पर बन ही जाएगा क्या बात है ।
देख लीजिए देश में कैसे पैदा होते हैं तरह तरह के पी जे थामस । आशा है संतील साहब भी अपने कॅडर का नाम रौशन करेंगे । चलते चलते एक सवाल कि बिहार में नगर विकास विभाग नीतीश कुमार के राजपाट में भ्रामक जनता पार्टी के खाते में होता है – क्या बात है !