क्या विधायिका, न्याय पालिका एवं सरकारें संविधान का ईमानदारी से पालन कर रही हैं- रशादी
क्या विधायिका, न्याय पालिका एवं सरकारें संविधान का ईमानदारी से पालन कर रही हैं- रशादी
धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल का
जंतर मंतर पर धरना व कार्मिक अनशन का सातवां दिन
नई दिल्ली- भारतीय संविधान की निगाह में भारत एक धर्मनिरपेक्ष प्रजातांत्रिक देश है यहाँ जाति धर्म, भाषा, नस्ल ,लिंग ,व क्षेत्र के आधार पर किसी के साथ भेद भाव नहीं किया जा सकता है। यही संविधान के मूल भूत संरचनाए हैं। नि:सन्देह इन्हीं कारणों से भारत को विश्व का सर्व श्रेष्ठ लोकतांत्रिक देश होने का गौरव प्राप्त है लेकिन क्या संविधान की धारणाओ का पालन हमारे देश की विधायिका , न्याय पालिका एवं सरकारों द्वारा ईमानदारी के साथ के साथ किया जा रहा है?
यह सुलगता हुआ सवाल किया है राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी ने। धारा 341 में लगे धार्मिक शब्द हटाये जाने की मांग को लेकर शुरू किये गए धरना एवं कार्मिक अनशन के सातवे रोज़ प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध को उदहारण स्वरूप पेश करते हुए कहा कि संविधान के इस अनुच्छेद के तहत एस० सी० जातियों का जीवन ऊंचा उठाने के लिए आरक्षण का संवेधानिक अधिकार प्राप्त है परन्तु 10 अगस्त 1950 को पंडित जवाहर लाल नेहरू की कार्यवाहक सरकार ने एक अध्यादेश जारी करवाया जिसके तहत अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ उन्ही जातियों को मिलेगा जो हिन्दू होंगे इस प्रकार किसको आरक्षण का लाभ मिलेगा और किसको नहीं नहीं मिलेगा यह धर्म के आधार पर तय किया गया बाद में इस अध्यादेश में वर्ष 1956 में संशोधन करते हुए सिक्खो को सम्मलित किया गया वर्ष 1959 में एक और संशोधन करते हुए कहा गया कि जिन जातियों के पूर्वज कभी हिन्दू थे और अपना धर्म परिवर्तित करके दूसरे धर्मो में चले गए अगर वे पुनः हिन्दू धर्म को स्वीकार करले तो उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सकता है इसी प्रकार वर्ष 1990 के अध्यादेश में एक और संशोधन करके आरक्षण के लाभार्थिओं में बौद्द धर्म के दलितों कों शामिल कर लिया गया इस प्रकार ईसाई और मुस्लिम दलित जातियाँ आज भी अपने आरक्षण के संवैधानिक अधिकार से वंचित है जो कि संविधान की धारा 314 ,315 ,316 और 325 के विपरीत है तथा संविधान के मूलभूत संरचना की खुली अवहेलना है।
श्री रशादी ने कहा कि हिंदू होने से जिन जातियों के लोग अनुसूचित जाति की श्रेणी में आकर आरक्षण का लाभ प्राप्त करते हैं मुस्लिम या ईसाई होने से उन्हीं जातियों के लोग इस श्रेणी के बाहा हो जाते हैं और आरक्षण के लाभ से वंचित हो जाते हैं जबकि धर्म अलग होने से ना तो उनका पेश बदल जाता है न ही जीवन दशा में कोई परिवर्तन होता है। धारा 341 में 10 अगस्त 1950 के अध्यादेश को देश के संविधान एवं धर्म निरपेक्ष स्वरूप पर कला धब्बा बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को हर हाल में इसे अब वापस लेना ही पड़ेगा वर्ना हम यहाँ से हटने वाले नहीं हैं।
बता दें कि दिनांक 17 /2 /2014 फरवरी से राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल द्वारा एक मिशन 341 के तहत धार्मिक प्रतिबन्ध हटाने की मांग को लेकर जंतर मंतर पर धरना दिया जा रहा है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए जिसे अब क्रमिक अनशन में परिवर्तित कर दिया गया है तथा आज कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा व यूपीए की चेयर परसन सोनिया गांधी तथा 24 फरवरी को राहुल गांधी के घरों एवं 25 फरवरी को कांग्रेस पार्टी के कार्यालय पर प्रदर्शन एवं घेराओ के घोषणा की गयी थी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार आज कौंसिल के कार्यकर्ताओ ने अपनी मांगो को लेकर उत्तर प्रदेश इकाई युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नूरुल हुडा अंसारी के नेतृत्व में सरकार विरोधी नारे लगते हुए सोनिया गांधी के घर की ओर मार्च किया। राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है की सरकार ने धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध को समाप्त नहीं किया तो उसे आगामी लोक सभा चुनाव में किसी भी हाल में सत्ता में आने नहीं देंगे। साथ ही उसने इस मुद्दे को उठाकर देश के सामने एक बड़ा संवैधानिक प्रश्न खड़ा कर दिया कि यदि धर्म के आधार पर किसी समुदाय को आरक्षण के लाभ संविधान के विरुद्ध है तो धर्म के आधार पर मुस्लिम एवं ईसाई समुदाय के दलित आरक्षण के संवैधानिक अधिकार से वंचित क्यों?
राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल के आंदोलन को विभिन्न राजनैतिक एवं सामाजिक संगठनों की ओर से व्यापक समर्थन मिल रहा है। कौंसिल के प्रवक्ता डॉ० निजामुद्दीन खान ने बताया कि आज यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ० एजाज़ अली एवं आल इण्डिया जमीयत इस्लामी के राष्ट्रीय महा सचिव मुफ़्ती अफ़रोज़ आलम क़ासमी ने भी धरने में पूर्ण समर्थन की घोषणा की। धरने में मुख्य रूप से कौंसिल के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुक्तदा हुसैन खैरी मिस्बाही तमिलनाडू के प्रदेश अध्यक्ष के० एम्० नूरुद्दीन अतीक़ महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सय्यद नूरुद्दीन आफताब मुम्बई अध्यक्ष हाजी नूर मोहम्मद असम वेस्ट बंगाल झारखण्ड डॉ० इज़हार आरज़ू युवा नेता अनिल सिंह दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष एस० एम्० नूरुल्लाह सहित सैकड़ो ने मांग किया /और आज क्रमिक अनशन पर फुरकान अहमद बैठे।


