ज्वलन्त सवालों को हल नहीं किया तो उपवास बढ़ेगा आगे - अखिलेन्द्र
किसान आयोग का हो गठन - अम्बावता
उपवास के समर्थन में पहुँचे किसान यूनियन के सैकड़ों कार्यकर्ता
आइपीएफ संयोजक अखिलेन्द्र के उपवास का छठा दिन
लखनऊ 15 जून। खालिद मुजाहिद की मौत और गिरफ्तारी पर दर्ज एफआईआर की विवेचना तत्काल शुरू कराने, अवैध खनन पर रोक लगाने, स्मारक घोटाले में लोकायुक्त की संस्तुतियों को स्वीकार कर इसके दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने व सीबीआई जाँच कराने और प्रदेश में किसान आयोग का गठन करने जैसे प्रदेश के ज्वलन्त सवालों को यदि सरकार ने तत्काल हल नहीं किया तो यह दस दिवसीय उपवास आगे भी बढ़ सकता है। यह प्रतिक्रिया आज उपवास के छठे दिन उपवास स्थल पर आयोजित पत्रकार वार्ता में आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक कॉ. अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाते हुये सरकार से पूछा कि वह प्रदेश की जनता को बताये कि खालिद की मौत को लगभग एक माह हो रहा है बाबजूद इसके आज तक उसकी मौत और गिरफ्तारी पर दर्ज एफआईआर की विवेचना क्यों नहीं शुरू हुयी। सरकार ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई से जाँच कराने की घोषणा पर अमल करने के लिये केन्द्र पर क्यों नहीं दबाब कायम किया। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिये कि प्रदेश में सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर चल रहा अवैध खनन आखिर कब तक बन्द होगा एवम् इसकी सीबीआई से जाँच कब तक होगी और यह भी कि लोकायुक्त की संस्तुतियों के बाद भी अवैध खनन में लिप्त लोगों के विरूद्ध एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हो रही है। उन्होंने कहा कि इस सरकार का रूख लोकतान्त्रिक आन्दोलनों और अनशन के प्रति सम्वेदनहीन हो गया है। अनशन के चौथे दिन ही कीटोन आने के बाबजूद पाँचवे दिन प्रशासन द्वारा भेजे डाक्टरों के पास कीटोन चेक करने वाली किट ही नहीं थी। गौरतलब है कि प्रदेश में कानून के राज की स्थापना के लिये हो रहे इस उपवास का समर्थन माकपा, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी समेत तमाम वाम-जनवादी ताकतों द्वारा किया जा रहा है।

अखिलेन्द्र के उपवास का समर्थन करने आज भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अम्बावता के नेतृत्व में सैकड़ों किसान विधानसभा के सामने उपवासस्थल पर पहुँचे। यहाँ हुयी सभा को सम्बोधित करते हुये भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अम्बावता ने कहा कि किसानों के बकाये भुगतान और कर्ज को माफ करने की घोषणा के साथ सत्ता पर पहुँची यह सरकार आज किसानों के साथ धोखाधड़ी कर रही है। किसानों का आज भी करीब 6 हजार करोड़ बकाया है इस सरकार में एक तो आमतौर पर फसलों की सरकारी खरीद हुयी नहीं और जो कुछ थोड़ी बहुत सरकारी खरीद हुयी उसका भी भुगतान नहीं किया गया। किसानों के कर्ज तो माफ नहीं ही किये गये उलटे कर्ज वसूली के नाम पर उनका दमन हो रहा है। उन्होंने सरकार को उसका वायदा याद दिलाते हुये किसान आयोग के गठन की माँग की और कहा कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी सरकार ने अपने वायदे के अनुसार लागत मूल्य का पचास प्रतिशत जोड़कर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित नहीं किया।

राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष परवेज आफताब ने कहा कि यह सरकार प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को मजबूत करने में लगी है इसका एक मात्र काम हिन्दु-मुस्लिम में वैमनस्य फैलाकर राज करने का है। इसकी इन साम्प्रदायिक नीतियों का मुकाबला हम जनान्दोलन से करेंगे। नौजवानों के जुलूस के साथ पहुँचे सीपीएम राज्य कमेटी सदस्य और डीवीएफआई के प्रदेश सचिव कॉ. राधेश्याम वर्मा ने सरकार से माँग की कि उसे बिजली की बढ़ी दरें वापस लेनी चाहिये और रोजगार के सवाल हल करना चाहिये। राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्व मन्त्री कॉ. कौशल किशोर, सीपीएम राज्य सचिव मण्ड़ल सदस्य कॉ. प्रेमनाथ राय, जिला सचिव कॉ. छोटेलाल, आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी, भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के भानुप्रताप सिंह, गंगा प्रसाद यादव ने अखिलेन्द्र के उपवासस्थल पर आयोजित सभा को सम्बोधित कर समर्थन व्यक्त किया। सभा का संचालन आइपीएफ के प्रदेश प्रवक्ता गुलाब चंद गोड़ ने किया।