नई दिल्ली। बलात्कार पीड़िता लड़की को न्याय दिलाने के नाम पर मरहूम खुर्शीद अनवर के खिलाफ तीन महीने कैंपेन चलाने के मामले में एनजीओ साम्राज्ञी मधु किश्वर धारा 306 की अभियुक्त बन सकती हैं।

हमने इस संबंध में आरुषि मर्डर केस में नूपुर तलवार के अधिवक्ता मनोज सिसौदिया से जब बात की तो उनका साफ कहना था कि मधु किश्वर पर दफा 306 और कथित अभियुक्त व कथित पीड़िता दोनों के डिफेमेशन का साफ मामला बनता है। उन्होंने बताया कि मधु किश्वर या किसी अन्य को कथित पीड़िता का बयान रिकॉर्ड करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और ऐसा करके मधु किश्वर व उनके सहयोगियों ने साफ तौर पर पुलिस के काम में हस्तक्षेप किया है और पुलिस को स्वतः इसकी जाँच करनी चाहिए।

श्री सिसौदिया ने कहा कि जब कथित पीड़िता स्वयं पुलिस में शिकायत करने की इच्छुक नहीं थी तो यह संदेह बनता है कि पता नहीं किन परिस्थितियों में उसका बयान चोरी-छिपे रिकॉर्ड किया गया। यह भी हो सकता है कि उस सीडी के जरिए दुष्प्रचार करके कथित पीड़िता और कथित अभियुक्त दोनों को ही ब्लैकमेल किया जा रहा हो। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कथित पीड़िता का छल के साथ बयान रिकॉर्ड कर लिया गया हो।

मामला इसलिए भी गंभीर है कि कथित पीड़िता का वीडियो रिकॉर्ड मधु किश्वर ने किया था तो वह बिना मधु की सहमति के दूसरे लोगों तक कैसे पहुँचा जिन्होंने पूरे तीन महीने तक उस वीडियो का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि जब बयान रिकॉर्ड कर लिया गया था और कथित पीड़िता पुलिस में शिकायत दर्ज करना नहीं चाहती थी तो उस वीडियो का प्रदर्शन करना पीड़िता की भी अवमानना है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि मीडिया अदालत नहीं है और उसे इस प्रकार का प्रसारण करने का कोई अधिकार नहीं है, यदि मृतक की हत्या नहीं हुई है और उसने आत्महत्या की है तो इंडिया टीवी के जिम्मेदार लोगों, मधु किश्वर और सीडी केजरिए दुष्प्रचार करने वाले लोगों पर पुलिस जाँच के बाद मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाने का भादस की धारा 306 का मुकदमा बन सकता है। यह जाँच का विषय है। उन्होंने कहा कि अब कानून को अपना काम करने देना चाहिए और मीडिया ट्रायल बंद किया जाना चाहिए।

उधर मरहूम खुर्शीद अनवर के भाई प्रो. अली जावेद ने भी कहा है कि पिछले तीन महीने से एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर कुछ लोगों ने उसे (खुर्शीद) को बलात्कारी घोषित कर दिया था, जहां उसने बार-बार कहा था कि कम से कम उसके खिलाफ पुलिस में कोई शिकायत तो दर्ज कराओ।

इस प्रकरण में ध्यान देने की बात यह है एकमात्र कानूनी प्रक्रिया सिर्फ खुर्शीद अनवर द्वारा ही अपनाई गई। उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दर्द कराई थी और अदालत में भी अवमानना का मुकदमा किया था। जबकि कथित पीड़िता का वीडियो जगह-जगह प्रदर्शित करने वाले लोगों ने पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। अब अगर यह बात मान भी ली जाए कि पीड़िता किसी भी दबाव में पुलिस में शिकायत दर्ज कराना नहीं चाहती थी तो सवाल उठता है कि क्या पीड़िता उक्त वीडियो का जगह-जगह प्रदर्शन करवाने के लिए सहमत थी? यदि हाँ तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराना क्यों नहीं चाहती थी और यदि नहीं तो कथित बूँद के कार्यकर्ता किस हैसियत से उक्त वीडियो का प्रदर्शन कर रहे थे ? क्या यह उक्त पीड़िता के साथ छल नहीं है?