राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हुये गाजियाबाद का पांडव नगर औद्योगिक क्षेत्र सैकड़ों लोगों को
रोजगार व सरकार को करोड़ों रुपया राजस्व देने के बाद भी विकास के लिये तरस रहा है।

इण्डस्ट्रियल एरिया मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के महासचिव अनिल गुप्ता ने
इस सम्बंध में क्षेत्र की समस्याओं पर लोगों का दर्द जानने की कोशिश की
गजियाबाद। नेशनल हाइवे 24 व डायमण्ड फ्लाईओवर के मध्य और बुलन्दशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र व कविनगर औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित 20 वर्ष पूर्व स्थापित लगभग 90 एकड़ औद्योगिक क्षेत्र पांडव नगर अपनी दुर्दशा पर आँसू बहा रहा है। यह औद्योगिक क्षेत्र महरौली गाँव की जमीन पर बसा है और पूरी तरह से फ्री होल्ड है। इस औद्योगिक क्षेत्र की दशा गाँवों से भी बदत्तर है। क्षेत्र में अधिकाँश सड़क कच्ची मिट्टी की बनी हैं। क्षेत्र में सड़कों की स्थिति यह है कि जल निकासी न होने के कारण पूरे वर्ष सड़कों पर पानी भरा रहता है। बरसात के मौसम में तो इतना अधिक जल भराव हो जाता है कि पानी औद्योगिक इकाईयों में भर जाता है जिससे लघु उद्यमियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है, सीवर लाइन भी नहीं है। रात्रि में सुरक्षा की कोई प्रसाशनिक व्यवस्था भी नहीं है। क्षेत्र में लगभग 100 अति लघु इकाईयाँ है जिसमें करीब 800 से 1200 श्रमिक कार्यरत हैं इनमें लगभग 100 महिला श्रमिक भी हैं। क्षेत्र में आने वाले श्रमिकों और उद्यमी को कीचड़ से गुजर कर अपनी ईकाई तक पहुँचना पड़ता है। क्षेत्र में औद्योगिक इकाईयों के प्लॉटों की अभी नगर निगम ने पहचान संख्या भी जारी नहीं की है, इकाईयों के प्लॉट की पहचान खसरा नम्बर से ही होती है। क्षेत्र में अनेक बैंकट हॉल के अलावा दो कॉलेज भी चल रहे हैं। रोजगार के इतने अवसर प्रस्तुत करने के बाद भी क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं के लिये भी तरस रहा है।

हमने औद्योगिक क्षेत्र का दौरा करके अनेक उद्यमियों से पांडव नगर से जुड़ी समस्याओं पर उनकी समस्याएँ जानने की कोशिश की।

उद्यमी हरभजन सिंह का कहना है कि वह पिछले आठ वर्षों से क्षेत्र में ईकाई चला रहे हैं। शुरु में जब वह क्षेत्र में आये तो यहाँ गहरे गड्ढे थे। अब तक उद्यमी सड़कों का करीब 10 फुट भराव अपने पैसों से करवा चुके हैं। क्षेत्र में हर साल उद्यमी सड़कों के भराव के लिये रुपया खर्च करते हैं। लेकिन नालियाँ न होने के कारण जल भराव वर्ष भर रहता है। श्री सिंह ने कहा कि 20 वर्ष पुराना औद्योगिक क्षेत्र होने के बाद भी नगर निगम ने आज तक क्षेत्र में एक रुपये का भी विकास कार्य नहीं कराया इस लिये उद्यमी भी नगर निगम को टैक्स नहीं देते हैं। श्री सिंह ने कहा कि अगर नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्य करेगा तो सभी उद्यमी सहर्ष टैक्स भी जमा करवाना शुरु कर देंगे।

एक अन्य उद्यमी एस.के. सिंह का कहना है कि क्षेत्र में लगभग 100 इकाईयाँ चल रही हैं। यह सभी कम्पनियाँ प्रदेश सरकार को वाणिज्य कर, विद्युत कर आदि के रूप में हर साल कई करोड़ रुपये का राजस्व देती हैं इसके बावजूद जिला प्रशासन व नगर निगम क्षेत्र की घोर उपेक्षा करते हैं। श्री सिंह तर्क देते हुये कहते हैं कि गाँवों से सरकार को कोई टैक्स नहीं मिलता है इसके बावजूद गाँवों के विकास के लिये अनेक योजनाएँ सरकार ने लागू की हुयी हैं। ऐसी ही योजनाएँ औद्यागिक क्षेत्रो के विकास के लिये शुरु की जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि नगर निगम क्षेत्र में गृह कर, सीवर कर के बिल भेजता आ रहा है। किन्तु क्षेत्र में विकास कार्य में उसकी कोई रुचि नहीं है। क्षेत्र में चोरी व डकैती की कई वारदात हो चुकी हैं। क्षेत्र की कम्पनियों में 100 से ज्यादा महिलायें भी कार्य करती हैं लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा का कोई इंतजाम नजर नहीं आता है।

श्री सिंह ने कहा अगर नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्य करवाता है तो सभी टैक्स भी देना शुरु कर देंगे।

उद्यमी महिपाल सिंह का कहना है कि पिछले सात साल से क्षेत्र में इकाई चला रहे हैं। क्षेत्र में सड़कों की बदतर हालत के कारण अपनी इकाई तक पहुँचना ही एक मुश्किल कार्य लगता है। प्रकाश की कोई व्यवस्था न होने के कारण रात्रि में औद्योगिक क्षेत्र एक खतरनाक जगह लगने लगता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की लापरवाही के कारण क्षेत्र में सड़कें और नालियाँ नहीं बन पायी है। श्री सिंह ने बताया कि अब तक उद्यमी कई लाख रुपया केवल सड़कों का लेवल ऊँचा करवाने में खर्च करवा चुके हैं।

क्षेत्र में नगर निगम के प्रति आक्रोश है इसलिये ज्यादातर उद्यमी नगर निगम को टैक्स नहीं देते हैं। अगर नगर निगम क्षेत्र की समस्यायें हल करा दे तो उद्यमी गृह कर भी जमा करवाना शुरु कर देंगे।

अनुज जैन

महिपाल सिंह

एक अन्य उद्यमी अनुज जैन का कहना है कि क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण बरसात में कच्ची सड़कों की हालत बेहद खराब हो जाती है। बारिश का पानी सड़को से इकाईयों में घुसना शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के उद्यमी अनेक विभागों के कर्मचारियों को सुविधा शुल्क भी देने को विवश रहते हैं। नगर निगम भी मनमाने ढँग से बिल बनाकर भेजता है जबकि नगर निगम द्वारा आज तक क्षेत्र में मामूली सा विकास कार्य भी नहीं कराया गया है। श्री जैन का कहना है कि अगर क्षेत्र के उद्यमी एक जुट होकर प्रयास करें तो समस्याओं से निजात पायी जा सकती है।

उद्यमी उमा चरण प्रसाद ने बताया कि यह औद्योगिक क्षेत्र महरौली गाँव के जमीन पर बना है और पूरी तरह से फ्री होल्ड है। क्षेत्र की उपेक्षा पर नाराज श्री प्रसाद कहते हैं कि नगर निगम ने बुलन्दशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र में एक पार्क की जमीन पर ट्रक पार्किंग के नाम पर कई करोड़ रुपया बर्बाद कर दिया। लेकिन पांडव नगर के विकास के लिये नगर निगम के पास पैसा नहीं है। यह बहुत ही गम्भीर बात है। इसका अर्थ यह है कि अधिकारी वर्ग मनमाने ढँग से कार्य करता है। कार्य प्राथमिकता के आधार पर होने चाहिये लेकिन कार्य अधिकारी की इच्छा के अनुसार हो रहे हैं। नगर निगम लगातार गृह कर के बिल भेज रहा है लेकिन कार्य कुछ नहीं करा रहा है इसलिये उद्यमी भी बिल की राशि जमा नहीं कर रहे हैं।

हरभजन सिंह

एस.के. सिंह

पांडव नगर की समस्याओं के सम्बन्ध में जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबन्धक हिमांशु गंगवार का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में विकास कार्य कराना नगर निगम व यू.पी.एस.आई.डी.सी. की जिम्मेदारी है। जिला उद्योग केन्द्र पांडव नगर के उद्यमियों से शिकायती पत्र प्राप्त होने पर क्षेत्र में विकास कार्य करवाने का प्रयास करेगा।

पांडव नगर के सम्बन्ध में क्षेत्रीय पार्षद नीलम से बातचीत करने का प्रयास किया गया। पार्षद के प्रतिनिधि दिनेश यादव का कहना था कि पांडव नगर के विकास के लिये पहले ही पत्र नगर निगम अधिकारियों को दिया जा चुका है। किन्तु अभी तक पांडव नगर सहित पूरे वाडऱ् में नगर निगम कोई भी विकास कार्य नहीं करा रहा है। पार्षद के स्तर से पांडव नगर के विकास के लिये पुनः प्रयास किये जायेंगे। जब भी नगर निगम वार्ड के विकास कार्य शुरु करवायेगा अवश्य ही पांडव नगर में भी विकास कार्य करवाये जायेंगे।

उद्यमियों से हुयी वार्ता के आधार पर कहा जा सकता है कि शहर के इस उपेक्षित क्षेत्र से न केवल रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं बल्कि प्रदेश सरकार को कई करोड़ रुपया राजस्व प्राप्त हो रहा है। इसके बावजूद जिला प्रशासन व नगर निगम की ओर से क्षेत्र का विकास न कराया जाना दुखद ही है। नगर निगम को तुरन्त क्षेत्र में विकास कार्य कराने चाहिये।