गृह मंत्रालय के नोटिस का ग्रीनपीस ने दिया जवाब, आरोपों का खंडन करते हुए देशी खातों से रोक हटाने की मांग की
नई दिल्ली, 8 मई 2015। ग्रीनपीस इंडिया ने गृह मंत्रालय की ओर से 9 अप्रैल को आए कारण बताओ नोटिस का विस्तार से जबाब देते हुए आज सभी आरोपों का खंडन किया है और अपने देशी बैंक खातों से फौरन रोक हटाने की मांग की है। लिखित जवाब को ग्रीनपीस इंडिया के आधिकारिक प्रतिनिधि मंडल ने आज गृह मंत्रालय को सौंपा।
ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकारी निदेशक समित आइच ने कहा, “हमें विश्वास है कि यह जबाब बिना किसी संदेह हमारी वैधता को स्थापित करेगा। हमारे खिलाफ लगे सभी आरोपों का जबाब हमने दिया है और पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी बरती है। इसके विपरीत गृह मंत्रालय ने हमारा मुंह बंद करने के निर्लज्जतापूर्ण प्रयास में अनर्गल आरोप और मनमाना जुर्माना लगाया है। स्वच्छ हवा, पानी और सस्ती उर्जा के लिए अपने अभियान पर हम गौरव करते रहेंगे और इन गंदी चालबाजियों से भयभीत नहीं होंगे’’।
ग्रीनपीस इंडिया के अनुसार, कारण बताओ नोटिस छोटी छोटी भूलों और अवांक्षित आरोपों से भरा है जिससे गृह मंत्रालय की प्रतिष्ठा धूमिल होती है।
ग्रीनपीस ने यह आरोप भी लगाया कि गृह मंत्रालय प्रासंगिक दास्तावेज मुहैया कराने के अपने आग्रह को पूरा करने में असफल रहा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के बजाए मीडिया में गलत जानकारी लीक करता रहा।
ग्रीनपीस इंडिया ने अपने प्रमुख तर्कों के आधार पर मीडिया को बताने के लिए विस्तृत नोट तैयार किया है, जिसमें बताया गया है कि :
· गृह मंत्रालय के कई आरोपों का संबंध वर्षों पुराने लेन-देन से है। जिनमें कुछ 2010 में एफसीआर कानून पर हस्ताक्षर होने के पहले के हैं। मंत्रालय इस कानून को पूर्व प्रभाव से लागू करना चाहता है जो निश्चित तौर पर न्यायसंगत नहीं है।
· दिल्ली उच्च न्यायालय के 20 जनवरी 2015 के आदेश के बावजूद गृह मंत्रालय ने 23 मांर्च को ग्रीनपीस इंटरनेशनल के द्वारा भेजी रकम को रोक दिया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि उस रकम को रोकना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। ग्रीनपीस इंडिया ने कहा कि वो अब कानूनी प्रक्रिया की तैयारी कर रहा है।
समित ने बताया कि भारत में हम पिछले 14 वर्षों से काम कर रहे हैं और पूरे कार्यकाल में अपना हिसाब-किताब उचित और विश्वसनीय ढंग से सौंप रहे हैं। गृह मंत्रालय का वर्तमान आक्रमण कहीं से जायज नहीं ठहरता और हमें पूरा विश्वास है कि विशेषज्ञों के विश्लेषण में हमारा दावा सही ठहराया जाएगा। हमें स्पष्ट जानना चाहिए कि यह खातों और अंकों का मामला नहीं है। यह एक मंत्रालय द्वारा ग्रीनपीस इंडिया को बंद करने की पागलपन भरी कार्रवाई है जिसे मंत्रालय में सामने आकर खुलकर कहने का साहस नहीं है।
इसके पहले प्रमुख नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने आज दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और ग्रीनपीस जैसे गैर सरकारी संगठनों को बंद करने की साजिश का विरोध किया। इस समूह ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक खुला पत्र भी लिखा है जिसमें उनसे लोकतंत्र को बचाने और असहमति के अधिकार की रक्षा करने का अनुरोध किया है।