मानहानि टिप्पणी -ग्रीनपीस भेजेगा गृह मंत्रालय को कानूनी नोटिस
नई दिल्ली। 25 मई 2015। ग्रीनपीस ने आज गृह मंत्रालय पर मीडिया को हथियार बनाकर ग्रीनपीस इंडिया को बदनाम करने का आरोप लगाया। एनजीओ के कार्यकारी निदेशक समित आईच ने कहा कि हम गृह मंत्रालय को कानूनी नोटिस भेज रहे हैं जिसमें मंत्रालय से बिना शर्त माफी मांगने और निराधार आरोपों को वापस लेने की मांग की गयी है।

इसी महीने के 21 तारीख को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एक खबर प्रकाशित की थी जिसमें गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी बीके प्रसाद ने कहा था, ‘हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि ग्रीनपीस ने ग्रामीणों को विरोधी बनने के लिये पैसे दिये हैं’। उसी खबर में रॉयटर्स ने यह भी लिखा था कि मंत्रालय के अधिकारी ने ग्रीनपीस पर आरोप लगाया है कि संस्था ने अपने विदेशी फंड से 60 लाख रुपये से अधिक की राशि आंदोलनकारियों को विकास कार्य में बाधा पहुंचाने के लिये दिए हैं।

समित आईच ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बिना किसी सबूत के मीडिया के सहारे गृह मंत्रालय ने हमारे उपर बहुत ही गंभीर आरोप लगाया है। हम इन झूठी, दुर्भावनापूर्ण और घोर अपमानजनक बयानों के मद्देनजर कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपना रहे हैं। इस सबसे स्पष्ट है कि गृह मंत्रालय कितना हताश हो गया है। अब वे हमें बदनाम करने के लिये बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं क्योंकि हमें जनता का अपार समर्थन मिल रहा है”।

गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव(एडिशनल सेक्रेटरी) बी के प्रसाद ने खबर में यह भी कहा था कि ग्रीनपीस इंडिया सोसाइटी के किसी भी घरेलू खातों को बंद नहीं किया गया है। उन्होंने रॉयटर्स में बयान दिया था, ‘उनके घरेलू चंदों को प्राप्त करने वाले खातों को बंद ही नहीं किया गया है फिर वे लोग बिना मतलब के इतनी शिकायत क्यों कर रहे हैं?’

समित ने आगे कहा, “यह सरासर झूठ है। पिछले महीने हजारों भारतीय समर्थक हमारे घरेलू बैंक खातों में पैसा जमा करवाने में असफल रहे और वे समर्थक इस महीने भी चंदा नहीं दे पा रहे हैं। जबतक हमारे खातों को बंद करके रखा जाता है हो सकता है वो आने वाले महीनों में भी चंदा देने में सक्षम न हो पायें। इसकी वजह से हमें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। हम उन घरेलू खातों से भी अप्रैल से किसी तरह का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। गृह मंत्रालयक के इस बेतुके बयान के बाद हमने एक बार फिर बैंक से दरियाफ्त किया लेकिन हकीकत यह है कि हमारे घरेलू चंदों वाले बैंक खाते अभी भी बंद ही हैं”।

ग्रीनपीस इंडिया ने गृह मंत्रालय से बिना शर्त माफी मांगने और बयान को वापस लेने की मांग की है जिससे देश के लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।