घनचक्कर ही घनचक्कर
घनचक्कर ही घनचक्कर
यह बहुत बड़ी घनचक्करी खबर है । अपने आप में यह बड़ी करंट मारने वाली घनचक्करी खबर है । यूं तो ऐसी खबर बिहार में जनमती नहीं क्योंकि यहां चक्कर ही चक्कर होता है कि जो मंत्री न बने वह मंत्री बनने के लिए किसके किसके दरबार में चक्कर चला रहे हैं । घनचक्कर नहीं होता है । होता है तो सुन समझ कर दिमाग ही घनचक्कर हो जाता है । पता नहीं सीएजी को यह खबर कब लगती और हम यह मान कर चलते कि बिहार राज्य बिजली बोर्ड में पौने छे सौ करोड़ का घाटा दिख जाता । मगर वाह रे घनचक्कर बिहार राज्य विद्युत विनियामक आयोग का कि जिसे बोर्ड ने 578 करोड़ रुपए का घाटा माना ,उसे केवल राजस्व घाटा 9 करोड़ बना दिया ।
यह राजस्व घाटा क्या होता है , इसकी जानकारी कोई निर्वहन कुमार ही दे सकता है । किस्सा कुल जमा इतना है कि विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली बोर्ड के उन आंकड़ों को घनचक्करी माना जिसमें घाटा पौने छे सौ करोड़ माना गया था । नियामक आयोग के इस घनचक्कर से फायदा उन्हें हुआ जिनको बिजली मिलती है और बिल भी दे देते हैं । अब बिजली सिर्फ 5 पैसे प्रति यूनिट महंगी होगी । इसकी घनचक्करी में न पड़ें कि प्रति यूनिट बिकली कितनी की पड़ती है । अब तो यह निर्वहन कुमार को तय करना होगा कि उनका बिजली बोर्ड इतना घाटा क्यों दिखाता है और उनका ही आयोग उसे खारिज क्यों कर देता है ।
लेकिन टेपों की घनचक्करी आवाजों के बीच असली घनचक्करी तो हमारे कृषि मंत्री साहेब शरद पवार जी की है । निर्वहन कुमार को भी कृषि मंत्रालय का अच्छा खासा अनुभव है । अब तो उन्होने मान भी लिया है कि रासायनिक खाद से खेत की उपज ताकत कम होती है । जैविक खाद उत्पादन की योजना बना रहे हैं । हो सकता है कि शरद पवार की बात के बाद बिहार भी दलहन उपजाने के नजरिए से विदेश हो जाए । साहेब ने कहा है कि दाल नहीं तो क्या हुआ विदेश में उपजाओ – हम खरीद लेंगे । उन्होने तो यहां तक कहा कि हिंदुस्तानी लोग विदेश में जमीन लीज पर ले कर दाल उपजाएं ।
जब देश में तरह तरह की घनचक्करी हो ही रही है तो ऐसी हालत में केंद्र को चाहिए कि दाल उपजाने के लिए बिहार को विदेश का दर्जा दे दिया जाए । विशेष राज्य में दिक्कत हो रही है न । लेकिन दाल के लिए विदेश का दर्जा देने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए । उलटा जिस किसी राज्य को दाल विदेश का दर्जा मिलेगा ,वह केद्र को विशेष शुल्क भी देगा । एक अलग से पासपोर्ट होगा – दाल पासपोर्ट । देश में जो लोग कहीं भी नौकरी के आवेदन के साथ एक किलो दाल भी नत्थी करेंगे ।
घनचक्करी लोग दाल का उत्पादन बढ़ाने के लिए दाल मंडी खेल को भी बढ़ावा दे सकते हैं । कोई कांग्रेसी दालमाड़ी इस बढ़ावा का अध्यक्ष होगा । दाल भारत का बिकेगा अमेरिका में । इस पर संसद में हंगामा होगा । हंगामा इस पर भी हो सकता है कि दालमाड़ी ने दाल का उत्पादन बढ़ाने के लिए विदेशी विशेषज्ञों के बजाए देसी जानकारों कि सलाह क्यों ली ।
निर्वहन कुमार बिहार को राष्ट्र के नाम संदेश दे सकते हैं कि दाल हमारी विरासत है । बिहार राज्य दाल विनियामक आयोग साबित कर सकता है कि देश में दाल की कमी नहीं है ,बल्कि मुनाफाखोरों की कमी है जो दाल कालाबाजरी का उचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं ।


