घबराये नीतीश बिहार की सड़क पर टहलकदमी करने के बाद अब दिल्ली की सड़क पर सैर करने गए
घबराये नीतीश बिहार की सड़क पर टहलकदमी करने के बाद अब दिल्ली की सड़क पर सैर करने गए
सुबह की राम राम। बिहार के मुख्यमंत्री जीतन मांझी के निर्णय उनकी सामाजिक राजनैतिक सोच व गरीब-वंचित तबकों के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं। मुझे यकीन है कि अब जीतन मांझी के द्वारा किये गए तमाम निर्णय और दिए गए वक्तव्य बिहार की राजनीति ही नही वरन उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी प्रासंगिक होंगे। उत्तर प्रदेश के आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को उनका संवैधानिक अधिकार आरक्षण दिए जाने की मांग को शक्ति मिलेगी बिहार के मुख्यमंत्री जीतन मांझी के निर्णय से। डॉ. लोहिया की एक और समाजवादी सोच संकल्प विचार का अनुपालन करने हेतु जीतन मांझी- मुख्यमंत्री बिहार का हार्दिक धन्यवाद।।
कुर्सी हासिल करने की लालसा में सर्वमान्य संवैधानिक निर्णय कि बहुमत का फैसला सदन में हो कि अवहेलना कर हडबड़ाये बौखलाए और घबराये नीतीश कुमार बिहार की सड़क पर टहलकदमी करने के बाद अब दिल्ली की सड़क पर सैर करने गए हैं। बिहार में महामहिम राज्यपाल से मिले और बेसब्रों की तरह अब महामहिम राष्ट्रपति से आज शाम मिलेंगे। बोलेंगे कि 130 विधायक हमारे समर्थन में हैं, परिचय पत्र भी साथ है, शिनाख्त कर लीजिये। देखिये साथ में शरद जी, लालू जी, कांग्रेस के, वामपंथी दल के नेता और तो और नेता जी यानि कि मुलायम सिंह यादव जी भी हमारे साथ हैं। अब हमको मुख्यमंत्री बना दीजिये। लेकिन शरद जी और लालू जी देखिये उस वक़्त एक दूसरे को देखकर धीरे धीरे मुस्कुराएंगे, दोनों नेताओं ने नीतीश कुमार की बेअंदाजी को पूर्व में खूब बर्दाश्त किया है लेकिन कभी इस तरह अपनी व्यग्रता प्रदर्शित नहीं की थी।
लेकिन एक बात और विशेष है बिहार के नीतीश कुमार द्वारा रचे गए इस घटनाक्रम में। जरा कल्पना करिए कि अगर बिहार के मसले पर बिहार के विधानसभा सदन में बहुमत सिद्ध करने के स्थान पर सड़क पर, राज्यपाल, राष्ट्रपति की चौखट पर मुख्यमंत्री पद पर फैसला हो गया तो यह निर्णय कम से कम उन राजनेताओं और दलों के लिए शत-प्रतिशत स्वीकार्य होगा जो आज शाम नीतीश कुमार की इस मुहिम में उनके साथ होंगे।
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को उपरोक्त तथ्य का संज्ञान लेना चाहिए। उनको भली भांति ज्ञात है कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार जो कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व में है, के खिलाफ षड्यंत्र रचा बुना जाना बंद नहीं हुआ है। बिहार के मामले में हुआ कोई भी निर्णय उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के मामलों में भी प्रभावी-लागू होगा।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार की मुख्यमंत्री की कुर्सी फिर से हासिल करने की पड़ी है। उनकी कुर्सी हासिल करने की इस दौड़ में किसी ऐसे निर्णय का पक्षधर समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव को नहीं बनना चाहिए, जो कि निकट भविष्य में उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए संकट का सबब बने।
कोई है जो इस तथ्य को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संज्ञान में लाये आज शाम 6 के पहले बाकि सपा मुखिया तक समझो बात पहुँच ही गई।
अपना एक काम जो मन में विचार आये- लिखते रहो।
- अरविन्द विद्रोही


