चलत – चलंतू – चालू
चलत – चलंतू – चालू
मेरा सुंदर सपना टूट गया । रुला कर गया सपना मेरा । आज फिर जीने की तमन्ना है – आज फिर मरने का इरादा है । खाया कम खिलाया ज्यादा है । मनमोहन ना बोले , ना बोले ,ना बोले रे । और क्यों बोले कि मेरे ऊपर भी शक करते हो । 2006 की बात 2010 में करते हो । एक आदत सी बन गई है सबकी ईमानदारी दिखाने की । उलटी सीधी बात सुनाने की । सब सच जानते हैं । झूठा सच को पहचानते हैं । मैं ना बोलुंगा । वजह यह है कि मैंने कभी बोला ही नहीं है । जब कभी बोला ही नहीं तो आज क्यों बोलूं । आपको गाना हो तो गाओ । जबरदस्ती का भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार चिल्लाओ । रोका किसने है । मेरे बारे में कहते हो कि डी एम के के सामने झुक गया । झुका हुआ कैसे बार बार झुकेगा । सच तो यह है कि मैं अपने मालिक के सामने ही झुकता हूं । झुकता हूं क्या झुका हुआ हूं । हिम्मत है तो मेरे मालिक की मुझे भी पहचान कराओ ।
मेरा कोई एक मालिक नहीं है । जब दुनिया की बात आती है तो मेरा मालिक अमेरिका हो जाता है । जब देश की बात आती है तो मेरा मालिक कांग्रेस हो जाता है । जब भी मिला जो भी मिला या तो अमेरिका से मिला या कांग्रेस से मिला । इनकी ही बात मानी । इनको ही अपना जाना । आपको यह बात समझ में नहीं आएगी । अमेरिका का मालिक वहां का राष्ट्रपति होता है । कांग्रेस का मालिक कांग्रेस का राष्ट्रपति होता है । अब आप पूछोगे कि कांग्रेस में राष्ट्रपति कहां से आया । अज्ञानी हो । सिर्फ घोटाला का ज्ञान पाते हो । अरे मूरख , आजादी के पहले कांग्रेस का मालिक राष्ट्रपति कहलाता था । आजादी के बाद राष्ट्रपति एक ओहदा कहलाता है । यह एक शोभा पद होता है । अपना देश अनेक है , तभी भारत अनेकता में एकता कहलाता है । एक ही के पास शोभा पद हो यह आज की कांग्रेस को नहीं सुहाता है ।
इसलिए अब प्रधानमंत्री भी शोभा पद ही हो जाता है । जहां तक मेरी बात है तो मैं प्रधानमंत्री कहलाता हूं । अपनी ताकत कांग्रेस से पाता हूं । कांग्रेस में भी ताकत कांग्रेस अध्यक्ष से पाता हूं । मैं तो सिर्फ दाल रोटी खाता हूं । कांग्रेस अध्यक्ष के गुण गाता हूं । वह कहते हैं तो झुक जाता हूं , अमेरिका के लिए तन भी जाता हूं । यह जो लोकतंत्र के नाम पर बनी संसद है । अब इसके बारे में क्या कहूं । यह दरअसल पुराने जमाने का मछली बाजार भी कहलाता है । बात बात पर अड़ता है । चलता कम , बंद ज्यादा रहता है । सांसद वोट के समय ही झुकता है । बाकी समय तना तना रहता है । इसी लिए तो मैं कभी संसद के सौतेले पुत्र लोक सभा का चुनाव नहीं लड़ता । एक बार लड़ा तो हारा । इसलिए सगे पुत्र राज्य सभा से लड़ता हूं । मालिक की मर्जी तो प्रधानमंत्री कहलाता हूं ।
कभी मेरे ऊपर झूठा इलजाम न लगाओ कि मैंने बात छिपाई । मैंने बात बनाई । इसके लिए हमारे मालिक के पास तरह तरह के नमूने हैं । कोई कानून मंत्री कहलाता है । कोई प्रणव बाबू हो जाता है । मैं तो इतना जानता हूं कि मेरा सुंदर सपना टूट गया । रुला कर गया सपना मेरा । आज फिर जीने की तमन्ना है – आज फिर मरने का इरादा है । खाया कम खिलाया ज्यादा है । सब कुछ है चलत – चलंतू – चालू !


