‘‘चलो अब नयी शुरुआत करो/ मजदूर मुक्ति की बात करो’’
‘‘चलो अब नयी शुरुआत करो/ मजदूर मुक्ति की बात करो’’
बादाम मज़दूरों की हड़ताल का जारी
अन्धकार का युग बीतेगा/ जो लड़ेगा वो जीतेगा..
नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर इलाके में कई करोड़ रुपयों की आमदनी वाले बादाम उद्योग में लगे बादाम मज़दूरों ने अपनी श्रम-क़ानूनों को लागू करने की माँग को लेकर करावल नगर मज़दूर यूनियन के बैनर तले हड़ताल की घोषणा कर दी है।
बादाम का यह कारोबार वैश्विक असेम्बली लाइन का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है जिसके तार कैलिफोर्निया, ऑस्टेलिया से लेकर खारी बावली के व्यापारी तक जुड़े हैं, जहाँ से ये मम्बई और अहमदाबाद के तट पर जहाज से आते हैं और फिर खारी बावली से होता हुये करावल नगर की संकरी-अंधेरी गलियों में पहुँचते हैं जहां 60 से ज्यादा बादाम पफैक्टरियों में इसके छिलका तोड़ने, साफ करने और पुनः पैक किये जाने के बाद घरेलू और अन्तर्राष्ट्रीय दोनों ही बाज़ारों में बिक्री के लिये भेज दिये जाते हैं।
करावल नगर में बादाम फैक्टरियों में तकरीबन 2000 से ज्यादा महिला मजदूर परिवार समेत कार्यरत हैं जो बिहार-उत्तर प्रदेश की प्रवासी आबादी है। केएमयू के सचिव नवीन ने बताया कि हजारों की संख्या में महिला मजदूर बादाम फैक्टरी बिना किसी पंजीकरण के मजदूरों का भंयकर शोषण शिकार हो रही हैं जिसमें न तो मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी तय है, न ही कोई पहचान कार्ड और न ही कोई सुरक्षा उपकरण। करावल नगर मजदूर यूनियन कई बार उप-श्रमआयुक्त के पास फैक्टरी एक्ट लागू करने की लिखित शिकायत दर्ज करा चुकी। लेकिन श्रम कार्यालय द्वारा कोई सुनवाई न होने पर, केएमयू ने जनसंघर्ष का रास्ता चुनकर बादाम मज़दूरों ने अनिश्चितकालिन हड़ताल की घोषणा कर दी है।
हड़ताल के दूसरे दिन माहिला मजदूरों ने सारे इलाके में फिर रैली निकाली। केएमयू का रोप है कि मालिकों ने पुलिस को बुलाकर माहिल मजदूरों को डराने-धमकाने की कोशिश लेकिन मजदूरों ने बिना डरे अपनी रैली जारी रखी। इसके बाद करावल नगर थाना के एस.एच.ओ समेत गोदाम मालिकों से मजदूर प्रतिनिधियों की बातचीत हुयी जो बेनतीजा रही। फिर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ए.सी.पी. ने केएमयू और बादाम मालिकों को कानून व्यवस्था को दुरस्त बनाने की सलाह दी। केएमयू नेता नवीन के कहा कि सवाल यह भी है कि कानून व्यवस्था को सही करने के लिये इलाके में चले रहे अवैध् फैक्टरियों को भी या तो बन्द करना चाहिये वरना उनका पंजीकरण के लिये क्षेत्र के श्रमायुक्त को सूचित करना चाहिये।
गुरूवार शाम को मजदूरों के बीच फिल्म शो का प्रदर्शन किया गया जिसमें मई दिवस पर बनी वृत्तचित्र तथा ‘‘मुम्बई हमारा शहर’’ दिखायी गयी।
इसके बाद सभा को सम्बोधित करते हुये बिगुल मजदूर दस्ता के अजय ने कहा कि बेहिसाब महँगाई में न्यूनतम मज़दूरी भी न मिलने से मज़दूरों के परिवार के सामने दाल-रोटी की चिन्ता बढ़ गयी है। इसलिये मजदूरों जायज मजदूरी में बढ़ोत्तरी की जाये, मजदूरों को पहचान-कार्ड, वेतन पर्ची दी जाये। इसके साथ ही वेतन पर काम करने वाले मज़दूरों को दिल्ली सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मज़दूरी दी जाये। वैसे सरकार ने मजदूरों के लिये 260 से ज्यादा श्रम काननू कागजों पर दर्ज कर रखे लेकिन ये कानून सिर्फ कागजों पर ही शोभा देता है और असल जिन्दगी में इन श्रम कानूनों को मालिक और ठेकेदार अपनी जेब में रखता है इसलिये आज मजदूरों को हजारों कुर्बानी देकर मिले इन अधिकारों के लिये नये सिरे से संघर्ष की शुरूआत करनी होगी। सभा का अन्त मजदूरों ने नारे लगा कर किया ‘‘चलो अब नयी शुरुआत करो/ मजदूर मुक्ति की बात करो’’।


