चाहे जानवर बना दो मगर इंसान मत बनाना
चाहे जानवर बना दो मगर इंसान मत बनाना
लघु कथा ( फर्क )
वसीम अकरम त्यागी
दंगे खत्म होने के बाद गाँव में चहल पहल नजर आ रही थी, गाँव के किसान मजदूरों की ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही थी, जिनके घर जले थे वो धुऐं के धब्बों को आँसुओं से धोने की कोशिश कर रहे थे, जिनके परिवार वालों को मारा गया था वो उन्हें भुलाने की कोशिश कर रहे थे, गाँव के वे लोग भी उनके पास आकर उनका गम बाँटने के लिये आते जिन्होंने दंगों में उनकी जान बचाई थी। एक दिन गाँव के प्रधान ने इस सन्नाटे को तोड़ने के लिये गाँव में एक मदारी को बुलाया ताकि गाँव वालों को कुछ खुशी के पल मिल सकें। पीपल के पेड़ के नीचे उसने अपना मजमा लगाया, और डुगडुगी बजानी शुरु कर दी। कुछ ही पल में लोग वहाँ आकर उस तमाशे को देखने के लिये इकट्ठा हो गये। गाँव की महीलायें अपने दरीचों, और छतों से इस तमाशे को देख रहीं थीं।
मदारी ने अपने जमूरे को बुलाया..और कहा मेरे प्यारी माताओं बहनों भाईयों अब आपको सामने ये मदारी और जमूरा एक खेल दिखायेंगे। इसी बात पर जोर से बजाओ ताली। गाँव का माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा...
मदारी - तो शुरु करते हैं आज का पहला खेल पहला आईटम जमूरा यहाँ आओ
जमूरा – आ गया
मदारी - वो छड़ी उठाओ,
जमूरा – उठा लिया बाबा
मदारी – मुझे दो
जमूरा – लीजिये बाबा
मदारी – अब वहाँ जाकर बैठ जाओ,
जमूरा – जी बाबा,
इतना कहकर जमूरा मदारी के सामने जाकर बैठ गया, मदारी डुगडुगी बजाता हुआ चारों तरफ घूमने लगा खेल शुरू हो चुका था सब उसका मजा ले रहे थे, उदास लोगों के चेहरों पर खुशी लौट रही थी, ......
मदारी – ये बताओ आज के इस खेल में तुम्हें क्या बनाया जाये,
जमूरा – बाबा आपके पास कौन कौन से ऑप्शन हैं,
मदारी – इंजीनियर, डॉक्टर, नेता, खिलाड़ी, शिक्षक, या पागल
जमूरा – कुछ देर सोचने के बाद बाबा आप मुझे पागल बना दो
मदारी – क्यों बे तुझे अक्लमंद इंसान अच्छे नहीं लगते क्या ? क्या तुझे इंजीनियर, डॉक्टर, नेता, खिलाड़ी, शिक्षक, बनना पसंद नहीं ? ये बता तू पागल क्यों बनना चाहता है ? तू इंसान बनना क्यों नहीं चाहता ?
जमूरा – बाबा पिछली बार आपने इंसान बनाया था तो मुझे साँप ने काट लिया था मैं सोच रहा था कि अब मैं मर जाऊँगा लेकिन कुछ देर बाद ही वो साँप मर चुका था, और मैं बच गया। और दूसरी बात मैंने इनमें से सभी किरदार निभाये हैं इसलिये पागल का किरदार निभाना बाकी है उसे भी निभा ही डालता हूँ।
मदारी – लेकिन बाकी किरदारों में क्या खराबी है जो तू दोबारा निभाना नहीं चाहता ?
जमूरा – बाबा मैं जब इंजीनियर बना तो मैने फ्लाईऑवर, और एक बिल्डिंग बनाई लेकिन रिश्वत लेकर मैने उसमें नकली सामग्री का निर्वहन होने दिया कुछ दिन बाद ही वह फ्लाई ऑलर और बिल्डिंग गिर गयी जिसमें हजारों मासूम मारे गये, और जब डॉक्टर बना तो गरीबों की किडनियां बेची, नेता बना तो भ्रष्टाचार किया दंगे फसाद कराये हजारों लोगों को आपस में लड़ाया महिलाओं की आबरू को अपनी आँखों के सामने लुटता देखा, मासूम बच्चों को त्रिशूलों पर टँगते देखा, जब शिक्षक बना तो बच्चों को गलत शिक्षायें दीं उन्हें जाती और धर्म के नाम पर बाँटा उनकी मासूम मानसिकता को गुलाम बना दिया, अब मैं इन गुनाहों का पश्चाताप करना चाहता हूँ इसलिये पागल बनना चाहता हूँ...
मदारी – छड़ी उठाकर चल बे तुझे आज मैं इंसान बनाऊँगा, मैं तुझे पागल का किरदार नहीं निभाने दूँगा
जमूरा – खेल छोड़ने की धमकी देते हुये और रोते हुये बोला , बाबा चाहे जानवर बना दो मगर इंसान मत बनाना क्योंकि वो सब इंसान ही थे जिन्होंने महिलाओं की आबरू लूटी थी, वो सब इंसान ही थे जिन्होंने निहत्थों पर हमले किये थे। जिन्होंने मासूमों को जलती आग में झोंका था, जिन्होंने धार्मिक स्थलों में बम फोड़े थे, इसलिये मैं इंसान नहीं बनना चाहता, मैं बस एक जंगली कबूतर बनना चाहता हूँ जो अपनी गुटरगू से बीमारी दूर करेगा, जो अपनी चौंच में पानी लाकर जलते हुये इंसानी जिस्मों की आग बुझायेगा, जो किसी के साथ बलात्कार नहीं करेगा जो किसी मासूम की जान नहीं लेगा, जो किसी को आपस में नहीं लड़ायेगा.......
जमूरे की बात सुनकर वहां पर सन्नाटा छा गया था, वहाँ पर मौजूद कातिल और मक्तूल दोनों जारो कतार इस तरह रो रहे थे.... जैसे वो अपने आँसुओं से अपने दिलों का मैल धो रहे हों....


