चुनावी लाभ के लिए देश को तबाह कर दिया, बैंक / एटीएम पर सेना लगाने की नौबत
चुनावी लाभ के लिए देश को तबाह कर दिया, बैंक / एटीएम पर सेना लगाने की नौबत
चुनावी लाभ के लिए देश को तबाह कर दिया, बैंक / एटीएम पर सेना लगाने की नौबत
सत्येन्द्र पीएस
आज भी कश्मीर से पत्थरबाजी की ढेर सारी फोटो आई थीं। अब तो पूरे देश को कश्मीर बना दिया। हर एटीएम, हर बैंक के सामने कश्मीर है।
सम्भव है कि हर बैंक / एटीएम पर पैलेट गन के साथ सेना लगाने की नौबत आए!
देश का हर युवा जेएनयू का नजीब अहमद बन गया है। लाइनों की धक्का मुक्की और नोटों की तलाश में खुद गायब सा।
प्रधानमन्त्री कह रहे हैं कि नोटबन्दी से परेशान केवल बेईमान हैं।
अगर आप घण्टों लाइन में लग रहे हैं कि नोट बदल जाए, 2000 रुपये मिल जाएं तो आप प्रधानमन्त्री की नजर में घोटालेबाज़ और बेईमान हैं।
संघी लोग जाली नोट जलाकर और नदी में फेककर चुनावी माहौल बना रहे हैं और पब्लिक बैंकों में लाइन लगाए बिलख रही है।
क्या नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली देश को बताएंगे कि यह कौन लोग हैं जिन्होंने नोटबन्दी के ठीक पहले 6 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बैंकों में जमा किए हैं।
बहुत आसान है देशभक्ति के नाम पर छाती कूटना और रोने गाने लग जाना।
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कुछ बैंकों में जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने में (2016) बैंकों में पिछले दो साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे ज्यादा पैसे जमा किये। आरबीआई के आंकड़ों की माने तो सितंबर महीने में (2016) में बैंकों ने कुल 102,08,290 करोड़ रूपये बैंकों में जमा किये जो कि अगस्त 2016 से 5.89 लाख करोड़ ज्यादा थे।
लगभग 6 लाख करोड़ रुपये ज्यादा जमा कराया गया। इसमें न सिर्फ भाजपाई मिलेंगे बल्कि चहेते उद्योगपति, दोस्त और दलाल भी मिलेंगे।
बस पता यह करना है कि इन सभी को ऐसी क्या जल्दी थी, जो उन्होंने आननफानन में इतनी नकदी जमा करवाई। सिर्फ नामों का खुलासा हो जाए अमाउंट के साथ, जनता अपने आप जान जायेगी कि घोटाला है कि नहीं। बाकी का काम कोर्ट कर ही लेगा।
https://m.rbi.org.in/Scripts/QuarterlyPublications.aspx?head=Quarterly Statistics on Deposits and Credit of Scheduled Commercial Banks
चुनावी लाभ के लिए देश को तबाह कर दिया।
ये नाटक करने में लगे हैं। वायुसेना से कैश पहुंचा रहे हैं!
बैंक एम्प्लॉयीज एसोसिएशन अलग बौराया हुआ है। सरकारी बैंकों के कर्मियों की 4 दिन में पागलों जैसी हालत हो गई है। एसोसिएशन ने अपने अधिकारियों को खत लिखा है कि नोट बदलना बैंकिंग का काम नहीं है। सवा अरब आबादी की नोट बदलनी है तो पुलिस, फायर ब्रिगेड, आयकर विभाग सहित हर विभाग के कर्मचारियों को इसमें लगाया जाए!
बेहतर होगा कि सेना को सीधे नोट बदलने के काम में लगाया जाए! हर विभाग के मंत्री बैठक कर अपने कर्मचारी व अधिकारी को नोट बदलने के काम में लगाएं। बैंक वाले सिर्फ बैंकिंग का काम करें!
यह आर्थिक आपात है। चुनावी लाभ के लिए देश को तबाह कर दिया।
ये बीजेपी के काल में ही नमक जैसी चीज की कालाबजारी कैसे हो जाती है!
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