22 दिन बाद केजरीवाल को मिलेगी बातचीत की फुरसत
केजरीवाल साहब ने वार्ता के लिए कल किया आंगनवाड़ी कर्मचारियों को सचिवालय पर आमंत्रित !
नई दिल्ली, 28 जुलाई। आज छठे दिन भी आंगनवाड़ी कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी है। हड़ताल पर बैठे हड़तालकर्मियों की विपरीत शारीरिक परिस्थितियों के बावजूद भी आंगनवाड़ी कर्मचारी अपने हक़ों के संघर्ष के लिए डटे हुए हैं।
रविवार को तकरीबन 3000 आंगनवाड़ी कर्मचारियों ने अरविन्द केजरीवाल के आवास से विधान सभा तक एक महारैली निकाल कर एक बार फिर उनकी मांगों को केजरीवाल सरकार के आगे रखा।
आंगनवाड़ी कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात की। नजीब जंग ने उन्हें यह आश्वासन दिलाया की वह नारी व बाल विकास विभाग के मंत्री व सेक्रेटरी दोंनो से इस मसले को संज्ञान में लेकर कार्यवाही करने का आग्रह करेंगे। इसके साथ ही रविवार की महारैली से पहले हुई महासभा के दौरान आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने अपनी मांगें न माने जाने की सूरत में आने वाले नगरनिगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी का बहिष्कार करने का फैसला लिया था।
आज आंगनबाड़ी कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने प्रशांत भूषण से भी मुलाकात कर सुप्रीम कोर्ट में मानदेय का भुगतान करने के लिए और आंगनवाड़ी के कर्मचारियों के मानव अधिकारों के हनन की खिलाफ एक रिट दायर करने के बारे में भी बात चीत की।
कल केजरीवाल साहब ने आंगनवाड़ी कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए दिल्ली सचिवालय पर आमंत्रित किया है। पिछले 22 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंगनबाड़ी के कर्मचारी अरविन्द केजरीवाल के घर के आगे प्रदर्शन कर रहे हैं।
दिल्ली की आंगनबाड़ियों में काम करने वाले कर्मियों को सरकार सरकारी मुलाजिम होना का दर्जा नहीं देती जिसके चलते न तो आंगनबाड़ी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन मिलता है और न ही और कोई सुविधा।
ज्ञात हो कि पिछले 22 दिनों से ये कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर केजरीवाल के घर के आगे बैठे हुए हैं। परन्तु अभी तक सरकार की ओर से इन कर्मचारियों को कोई भी आश्वासन नहीं मिला है। 5 दिन की क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठने के बाद आंगनबाड़ी के कर्मचारियों ने आज से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है।
दिल्ली विधान सभा के घेराव और 17 जुलाई को दिल्ली सचिवालय पर विशाल प्रदर्शन के बाद भी दिल्ली सरकार की नींद नहीं टूटी है। दिल्ली की आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने 17 जुलाई को दिल्ली सचिवालय पर एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया था जिसमे दिल्ली के सभी आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने शिरकत की, मुख्य मंत्री और श्रम मंत्री को अपना ज्ञापन सौपने पहुंचे कर्मचारियों से न तो सरकार के किसी अधिकारी ने कोई ठोस आश्वासन दिया न ही उनकी मांगों की कोई सुनवाई की। मगर इस सब के बावजूद संघर्षशील हड़ताल कर्मी पूरे जोश के साथ अपनी मांगों को लेकर अरविन्द केजरीवाल के आवास के आगे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं।
हड़तालकर्मियों का कहना है कि उनकी तात्कालिक मांगे न माने जाने तक वह अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखेंगे। आंगनबाड़ी कर्मचारियों की तात्कालिक मांग हैं कि उनके वेतन का पिछले भुगतान तुरंत किया जाए, साथ ही वेतन का भुगतान हर महीने की 10 तारीख तक कर दिया जाए, सभी कर्मचारियों को पहचान कार्ड दिया जाए, सभी कर्मचारियों के लिए बीमा योजना शुरू की जाए, पैनल पर रखे जाने वाले कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया जाए साथ ही सबला स्कीम के तेहत मिलने वाले सभी लाभ दिए जाए।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी एक आँगनवाड़ी कर्मचारी ने बताया कि सरकार ने अभी तक उनकी मांगों की सुनवाई करने की कोई पहल नहीं की है और सुपरवाइजर लगातार उनपर दबाव बनाने के लिए उन्हें काम से निकालने की धमकी दे रहे हैं। अपनी सरकार के प्रचार के लिए 526 करोड़ केवल रेडियो विज्ञापनों पर खर्च करने वाली केजरीवाल सरकार के पास दिल्ली के बचपन को संवारने वाली आँगनवाड़ी कामगारों की समस्याओं को सुनने और उनकी मदद करने के लिए समय नहीं है।
हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में आए बिगुल मजदूर दस्ता के नितिन ने बताया कि हड़तालकर्मियों की दीर्घकालिक मांग है कि उन्हें स्थायी किया जाए, उनकी आय की श्रेणी सुनिश्चित की जाए और प्रोहत्साहन राशि की बजाए आय दी जाए, और इस आय का भुगतान हर महीने सुनिश्चित समय तक किया जाए साथ ही सभी कर्मचारियों को पेहचान पत्र, ई.एस.आई., पी.एफ कार्ड दिए जाए, ग्रीष्म कालीन और शीत कालीन छुट्टियां दी जाए और रिटायर होने पर पेंशन दी जाए।
आंगनवाड़ी कर्मचारी दिल्ली की गरीब आबादी के बच्चों को चिकित्सा, शिक्षा पहुँचाने के साथ साथ गर्भवती औरतों की देख-रेख और उन्हें प्रसव के बारे में जानकारी देने और शिक्षित करने का काम करती हैं। हर एक आंगनवाड़ी कर्मचारी पर अपने इलाके के 1000 लोगों की देख रेख की जिम्मेदारी होती है। इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण ज्म्मिेदारी का निर्वाह करने के बावजूद इन कर्मचारियों कि खुद की हालत बेहद खस्ता है, इन्हें प्रति माह 4000 रुपए ओनोरेरियम के रूप में मिलता है जिसका भुगतान भी समय पर नहीं किया जाता। आंगनवाड़ी के कर्मचारियों के प्रति सरकार हमेशा से उदासीन रही है मगर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के साथ कर्मचारियों में यह आशा पैदा हुई थी कि शायद केजरीवाल सरकार आँगनवाड़ी कर्मी की मांगों को पूरा करेगी। मगर केजरीवाल सरकार जहाँ एक तरफ कारखानेदारों को लाइसेन्स राज से मुक्ति दिलाने में एड़ी चोटी का जोर लगा सकती है वहीं दिल्ली की गरीब आबादी के बच्चों के बचपन को संवारने वाली आँगनवाड़ी कामगारों की मांगों को अनदेखा करते हुए अपनी नींद से नहीं जाग रही है। साफ है कि केजरीवाल सरकार में और कांग्रेस, भाजपा में भी कोई अन्तर नहीं है।
यह जानकारी एक विज्ञप्ति में दी गई।