छद्म राष्ट्रवादियों, यह है भारत, भारत की अंतरात्मा। उसने तुम्हें नकार दिया है।

कन्नड़ लेखिका मुद्दू तीर्थहल्ली ने प्रोफेसर कलबुर्गी की हत्या और लेखकों के प्रतिरोध के प्रति सरकार की उदासीनता के विरोध में कर्नाटक साहित्य अकादमी का पुरस्कार लौटा दिया है। वे ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा हैं। एक छोटे से गाँव में कन्नड़ माध्यम के स्कूल में पढ़ती हैं।

उनके निबन्ध संग्रह को कर्नाटक साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला था। उनके एक उपन्यास पर कन्नड़ भाषा में फिल्म बन चुकी है।
छद्म राष्ट्रवादियों, यह है भारत, भारत की अंतरात्मा। उसने तुम्हें नकार दिया है।
अपना स्वर्णजटित राजमुकुट सम्हाल कर रख लो, लेकिन अंतरात्मा कहाँ से लाओगे ?
आशुतोष कुमार