छात्र विरोधी यूजीसी गजट के खिलाफ आंदोलन : बहुजन छात्रों को प्रताड़ित कर रहा कुलपति
छात्र विरोधी यूजीसी गजट के खिलाफ आंदोलन : बहुजन छात्रों को प्रताड़ित कर रहा कुलपति
जेएनयू : द्रोणाचारी प्रोफेसर आरक्षित वर्ग के छात्रों को सामान्य वर्ग की तुलना में बहुत कम अंक देते हैं
भागलपुर, 21 अप्रैल। प्रगतिशील समझे जाने वाले दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विशवविद्यालय में पिछले पांच वर्षों में दलित वर्ग के छात्रों को साक्षात्कार में औसतन 30 अंकों में से 6, ओबीसी वर्ग के छात्रों को औसतन 5 जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को औसत 20 अंको से भी अधिक अंक दिये गए हैं।
यह आरोप जेएनयू में सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ते हुए निलम्बन झेल रहे छात्र नेताओं ने लगाया है।
आज यहाँ न्याय मंच द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता को जेएनयू के छात्र नेताओं मुलायम सिंह, प्रशांत कुमार व बिरेंद्र कुमार ने एक अपील जारी की।
छात्र नेताओं की अपील का मूल पाठ निम्नवत् है -
हम जे.एन.यू. के निलंबित छात्र मीडिया के माध्यम से सूचित करना चाहते हैं कि; विगत कई वर्षों में सूचना के अधिकार (2005) के तहत प्राप्त किये गए आंकड़ों का विश्लेषण करने पर हम यह पाते हैं कि एमफिल/पी.एच.डी कि प्रवेश परीक्षा में साक्षात्कार के दौरान जाति/ धर्म/ भाषा/ नस्ल के आधार पर भेदभाव करके द्रोणाचारी प्रोफेसरों द्वारा आरक्षित वर्ग के छात्रों को सामान्य वर्ग की तुलना में बहुत कम अंक दिए जाते हैं।
पिछले पांच वर्षों में दलित वर्ग के छात्रों को साक्षात्कार में औसतन 30 अंकों में से 6, ओबीसी वर्ग के छात्रों को औसतन 5 जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को औसत 20 अंको से भी अधिक अंक दिये जाते हैं।
हम विश्वविद्यालय के सामाजिक न्याय पसंद छात्र लगातार इस भेदभाव को कम करने के लिए साक्षात्कार के अंकों को 30 से घटाकर 10 करने की मांग जे.एन.यू प्रशासन तथा वर्तमान कुलपति एम. जगदीश कुमार से कर रहे हैं।
जे.एन.यू. प्रशासन द्वारा मई 2016 में गठित की गई अब्दुल नफे समिति ने भी वंचित समुदायों के छात्रों के साथ साक्षात्कार में बड़े पैमाने में हो रहे भेदभाव की पुष्टि की है।
समिति ने सिफारिश की है कि एमफिल/पी.एच.डी. के प्रवेश परीक्षा में हो रहे भेदभाव को कम करने के लिए साक्षात्कार के अंकों को 30 से कम करके 15 कर देना चाहिए। जे.एन.यू. प्रशासन द्वारा बनायीं गयी अन्य समितियों जैसे कि राजीव भट्ट समिति, प्रो. थोराट समिति ने भी साक्षात्कार में होने वाले भेदभाव को माना है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार साक्षात्कार के अंकों को परीक्षा के कुल अंको के 15% से अधिक किया जाना असंवैधानिक है। 23 दिसम्बर 2016 को फीस में बढ़ोत्तरी, साक्षात्कार के मार्क्स कम करने, अल्पसंख्यक डेप्रिवेशन पॉइंट्स लागू करने, एसोशिएट तथा प्रोफेसर स्तर पर ओबीसी आरक्षण लागू करने इत्यादि मुद्दों को लेकर प्रसाशन द्वारा स्पेशल AC-एकेडमिक काउंसिल मीटिंग बुलाई गयी थी।
अकादमिक परिषद की मीटिंग के पार्ट A में लंबी चली बहस में VC-वाइस चांसलर ने डेप्रिवेशन पॉइंट्स पर बात करने से पूरी तरह से मना कर दिया। मीटिंग में प्रशासन ने अपनी द्वारा गठित कमिटी की सिफारिशों को खारिज़ कर दिया। वर्तमान समय में जहां प्रशासन को भेदभाद खत्म करने के लिये साक्षात्कार का अंक कम करने के बजाय VC ने UGC -विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नोटिफिकेशन (जिसमे एमफिल./पी.एच.डी प्रवेश परीक्षा में साक्षात्कार को 100% करने की बात कही गयी है) पूरी तरह लागू कर दिया। इस गजट के लागू होने से जेएनयू में जहां पिछली सत्र में एम.फिल∕ पीएचडी में 970 छात्रों का प्रवेश हुआ था वहीं इस बार मात्र 102 सीटों पर ही दाखिला होगा। इस गजट के लागू होने से जेएनयू की अपनी प्रगतिशील एडमिशन नीति को खत्म कर दिया गया। जिसमें प्रत्येक महिला को 5 अतिरिक्त मार्क्स डेप्रिवेशन पॉइंट के तहत दिए जाते थे।
इसके साथ सूदूर पिछड़े क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को क्वर्टाइल पॉइंट के तहत अतिरिक्त नंबर दिये जाते थे, जिससे जेएनयू में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। अब इस गजट के लागू हो जाने से दलित/ पिछड़े/आदिवासी∕ अल्पसंख्यक/ ग्रामीण परिवेश से वास्ता रखने वाले समुदायों के होनहार छात्रों का विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना असंभव सा हो जाएगा।
बहुजन छात्र कुलपति के अलोकतांत्रिक रवैये का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे। लेकिन VC ने हम 9 छात्रों को हिंसात्मक माध्यम अपनाकर 26 दिसम्बर की AC मीटिंग को रोकने का आरोप लगाकर बिना किसी जाँच के रातों-रात छात्रावास तथा अन्य अकादमिक गतिविधियों से निलंबित कर दिया। अब आए दिन नोटिसों के माध्यम से प्रशासन लगातार हमें प्रताड़ित कर रहा हैं।
इस छात्र विरोधी यूजीसी गजट के खिलाफ आंदोलन करने के कारण प्रशासन हम निलंबित छात्रों पर दिल्ली पुलिस में कई एफ.आई.आर कर चुका है। ऐसे नाजुक तथा फासीवादी दौर में हम निष्कासित छात्र सामाजिक न्याय पसंद, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक एवं प्रगतिशील अवाम से अपील करते है कि इस ब्राह्मणवादी, सामंती व्यवस्था के खिलाफ एकजुट होकर सामाजिक न्याय की लड़ाई में हिस्सा ले।
हम जेएनयू के छात्र पूरे देश के विश्वविद्यालयों में घूमकर छात्र-नौजवानों को एकजुट कर रहे हैं। बिहार में इस मुहिम का पहले चरण की शुरूआत हो रही है। आगे देश के अन्य विश्वविद्यालयों में इस कारवां को ले जाना है।


