जंतर-मंतर पर पुलिस नहीं सुनेगी आदिवासियों के हक में हिमाँशु कुमार की बात
जंतर-मंतर पर पुलिस नहीं सुनेगी आदिवासियों के हक में हिमाँशु कुमार की बात
नई दिल्ली। क्या आदिवासियों के हक-औ-हकूक के लिये उठने वाली हर आवाज़ को सरकार कुचल देगी ? ऐसा न भी हो पर कथित मेनस्ट्रीम मीडिया के समर्थन से जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है उससे यह शंका बलवती होती है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर उपवास पर बैठे गाँधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता हिमाँशु कुमार को उपवास की मनाही कर दी गयी है।
कुछ देर पहले हिमाँशु कुमार न बताया, “अभी अभी पुलिस ने मुझे एक पत्र सौंपा है कि मुझे उपवास करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मुझे खुद को जंतर-मंतर के उपवास स्थल से बल पूर्वक हटाये जाने की आशंका है”। उन्होंने कहा कि वे 5 जून तक तो हर हाल में उपवास पर बैठेंगे चाहे पुलिस उन्हें उठाकर फेंक भले ही दे।
मानवाधिकार कार्यकर्ता महताब आलम ने बताया कि 5जून को सायं तीन बजे एक बैठक बुलायी गयी है जिसमें आगे की रणनीति तय की जायेगी। उन्होंने बताया कि सम्भवतः दिल्ली में 8 जून से14 जून तक पदयात्रा का कार्यक्रम तय किया जा सकता है।
हिमाँशु कुमार ने कहा, “सरकार के अलावा जब भी कोई मानवाधिकार हनन करता है, तो उसे दण्ड देने के लिये क़ानून है, अदालत है, सरकार है। लेकिन जब सरकार मानवाधिकार का हनन करती है समस्या तब खड़ी होती है। मनवाधिकार कार्यकर्ता को वहीं सामने आना चाहिये। लेकिन जो लोग सरकार के ज़ुल्मों को देखते हुये भी चुप रहते हैं शक तो उनकी नीयत पर होता है कि आखिर इनका कौन सा स्वार्थ देशवासियों पर होने वाले ज़ुल्मों के समय इन्हें चुप रहने पर विवश कर रहा है। ”


